पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संसद प्रश्न: तापमान में वृद्धि
प्रविष्टि तिथि:
01 APR 2026 11:40AM by PIB Delhi
नेचर सस्टेनेबिलिटी पत्रिका में प्रकाशित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार लगभग 2010 के आसपास विश्व की लगभग 23 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गर्मी की चपेट में थी। वैश्विक तापमान में वृद्धि की यह स्थिति जारी रही तो वर्ष 2050 तक इस अनुपात के बढ़कर लगभग 41 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि पूरी दुनिया में खासकर दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्से में मध्य शताब्दी तक लगभग 3.79 अरब लोग अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हो सकते हैं। वैश्विक तापमान में यह वृद्धि ग्रीनहाउस गैसों के निरंतर उत्सर्जन के कारण है। यदि वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C से 2°C अधिक हुआ तो इसके प्रभाव और भी तीव्र हो सकते हैं।
मौसम विभाग लू सहित चरम मौसम की घटनाओं की पूर्व चेतावनी और प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए समय पर पूर्वानुमान और सलाह प्रदान करता है। इस तरह मौसम विभाग ताप-कार्य योजनाओं जैसी जलवायु अनुकूलन गतिविधियों में योगदान देता है। देश में तापमान वृद्धि से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए प्रभावी जलवायु अनुकूलन कदम निम्नलिखित हैं:
- हीट एक्शन प्लान (एचएपी): राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) 23 राज्यों के साथ मिलकर एचएपी को लागू करने के लिए सहयोग कर रहा है। एचएपी में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जागरूकता अभियान, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाएं और शीतलन केंद्र स्थापित करना शामिल है।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन मौसम विभाग (आईएमडी) विशेष लू चेतावनी बुलेटिन और प्रभाव आधारित लू पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें गृह मंत्रालय, एनडीएमए, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, उपायुक्त/जिला मजिस्ट्रेट, स्वास्थ्य विभाग, भारतीय रेलवे, सड़क परिवहन और मीडिया सहित विभिन्न उपयोगकर्ताओं को मौसम विज्ञान उप-मंडल और जिला स्तर पर ठंडी छतें, शहरी वन, जल निकाय और परावर्तक अवसंरचना जैसे गर्मी प्रतिरोधी शहरी नियोजन उपायों को अपनाने के लिए दिशानिर्देश या सलाह का विवरण प्रदान किया जाता है।
- 2023 से मौसम विभाग ने देश के विभिन्न हिस्सों में लू से संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए सक्रिय उपायों को सक्षम बनाने हेतु मौसमी और मासिक लू पूर्वानुमान जारी करना भी शुरू कर दिया है।
- इसके अलावा, मौसम विभाग लू की जानकारी सहित सभी पूर्वानुमानों को ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यमों से आम जनता तक पहुंचाता है। साथ ही, राज्य की समर्पित वेबसाइटों पर जिलेवार लू की जानकारी उपलब्ध है और स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट बुलेटिन भी उपलब्ध हैं।
सरकार ने शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक विस्तार, हरित ऊर्जा गलियारों का विकास, स्वच्छ विनिर्माण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना तथा बैटरी भंडारण प्रणालियों की तैनाती शामिल हैं। सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एनएपीसीसी) और राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एसएपीसीसी) जैसे विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है। इन योजनाओं में सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि, स्वास्थ्य, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण, सतत पर्यावास विकास, हरित भारत और जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक ज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट मिशन शामिल हैं। एनएपीसीसी जलवायु संबंधी सभी कार्यों के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
मंत्रालय देशभर में मौसम और जलवायु की निरंतर निगरानी और विश्लेषण करता है। क्षेत्रीय और जिला स्तर पर अत्यधिक तापमान, लू और शीत लहरों से संबंधित जानकारी मासिक जलवायु सारांश (https://imdpune.gov.in/cmpg/Product/mcs.php) और वार्षिक जलवायु सारांश (https://imdpune.gov.in/cmpg/Product/acs.php) के माध्यम से दर्ज की जाती है।
इसके अतिरिक्त, मौसम विभाग देश का मासिक और मौसमी जलवायु निदान बुलेटिन (सीडीबीआई) (https://imdpune.gov.in/cmpg/Product/Cdbulletin.html) भी प्रकाशित करता है, जिसमें तापमान और वर्षा की अनियमितताओं, चरम मौसम घटनाओं और ईएनएसओ और आईओडी जैसे बड़े पैमाने पर जलवायु कारकों की जानकारी शामिल होती है, जो देश भर में प्रचलित जलवायु परिस्थितियों का नैदानिक आकलन प्रदान करता है। मौसम विभाग ने देश में लू और शीत लहर की विशेषताओं पर जलवायु संबंधी विश्लेषण भी तैयार किए हैं ( https://imdpune.gov.in/Reports/Met_Monograph_Cold_Heat_Waves.pdf )।
मौसम विभाग ने पिछले 30 वर्षों में विभिन्न राज्यों और जिलों में वर्षा के बदलते पैटर्न और उसकी चरम स्थितियों का भी आकलन किया है। विभिन्न राज्यों से संबंधित "अवलोकित वर्षा परिवर्तनशीलता और परिवर्तन" पर रिपोर्ट मौसम विभाग पुणे की वेबसाइट (https://imdpune.gov.in/Reports/rainfall%20variability%20page/raintrendnew.html) पर उपलब्ध है।
जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) प्रकाशित अध्ययनों के आधार पर जलवायु परिवर्तन, इसके कारणों, संभावित प्रभावों और प्रतिक्रिया विकल्पों के बारे में व्यापक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करता है। आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट (2021-2023) में निम्नलिखित शामिल थे:
डब्ल्यूजी-I(अगस्त 2021): भौतिक विज्ञान आधार
डब्ल्यूजी-II (फरवरी 2022): प्रभाव, अनुकूलन और भेद्यता
डब्ल्यूजी-III (अप्रैल 2022): जलवायु परिवर्तन का शमन
संश्लेषण रिपोर्ट (मार्च 2023): व्यापक निष्कर्षों का सारांश https://www.ipcc.ch/reports/ पर देखा जा सकता है।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने पहली अप्रैल 2026 को लोकसभा में दी।
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पीके/केसी/एके/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2247631)
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