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भारत की बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली
पूर्वानुमान और आपदा जोखिम घटाने में डिजिटल परिवर्तन
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 11:24AM by PIB Delhi
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मुख्य बातें
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- बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली ने अलग-अलग पूर्वानुमान की बजाय एकीकृत, स्वचालित पूर्वानुमान की ओर पूर्ण डिजिटल परिवर्तन को संभव बनाया है।
- भारत और इसके पड़ोसी क्षेत्रों की लगभग 80 प्रतिशत आबादी तक अब प्रभाव-आधारित, स्थान-विशिष्ट चेतावनियां पहुंच रही हैं।
- रियल-टाइम पूर्वानुमान और प्रभाव-आधारित चेतावनियों ने पूर्वानुमान तैयार करने के समय में 50 प्रतिशत की कमी की है और पूर्वानुमान की सटीकता में 30 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
- एमएचईडबल्यू-डीएसएस को लागू करने से, 1999 से 2024 के बीच लोगों को सुरक्षित निकालने की लागत घटकर एक-तिहाई रह गई है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि आईएमडी द्वारा 3 से 5 पहले जारी किए जाने वाले पूर्वानुमानों में चक्रवात के टकराने के स्थान से संबंधित त्रुटियों में कमी आई है।
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परिचय
भारत अपनी विविध भौगोलिक संरचना, लंबी तटरेखा और मानसून-आधारित जलवायु के कारण चक्रवात, बाढ़, लू, सूखा और भूस्खलन जैसी मौसम संबंधी घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, भारत हर वर्ष इस तरह की सैकड़ों मौसम संबंधी घटनाओं का सामना करता है, जिनमें बाढ़ लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि को प्रभावित करती है और हाल के दशकों में लू की घटनाएं बढ़ी हैं। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडबल्यू) के अनुसार, भारत के 75 प्रतिशत से अधिक जिले कई प्रकार के जलवायु संबंधी खतरों के दायरे में हैं, जबकि केवल चक्रवात और बाढ़ ही आपदा-संबंधी क्षति के अधिकांश हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। इस संदर्भ में, बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (एमएचईडबल्यू-डीएसएस) का स्वदेशी विकास एक समयोचित और रणनीतिक कदम है, क्योंकि सटीक पूर्वानुमान और एकीकृत जोखिम विश्लेषण से आपदा से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है। इससे समय पर निकासी और तैयारी उपायों पर ध्यान दिया जा सकता है और जटिल मौसम संबंधी आंकड़ों को सरकारों, समुदायों और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल से साझा करके सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ायी जा सकती है।
एमएचईडबल्यू-डीएसएस के मुख्य उद्देश्य
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस एक उन्नत डिजिटल पूर्वानुमान प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओपन-सोर्स तकनीक और अपनी आंतरिक विशेषज्ञता का उपयोग करके विकसित किया है। मिशन मौसम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण डिजिटल परिवर्तन पहल के रूप में प्रस्तुत यह प्रणाली भारत की रियल-टाइम मौसम निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी क्षमताओं को सुदृढ़ करती है।
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस को आधिकारिक रूप से जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था और यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मानचित्रों जैसे उपकरणों का उपयोग करते हुए रियल-टाइम में कार्य करता है। इससे पूर्वानुमानकर्ताओं को मौसम संबंधी जानकारी को तेजी से एकत्र करने, विश्लेषण करने और स्पष्ट तथा आसान तरीके से उपयोगकर्ता तक प्रसारित करने में मदद मिलती है।

उपग्रह और रडार डेटा सहित विभिन्न आंकड़ों तथा आधुनिक पूर्वानुमान उपकरणों को एकीकृत करके, यह प्रणाली तेज़ और अधिक विश्वसनीय प्रारंभिक चेतावनियां प्रदान करती है और किसानों, परिवहन सेवाओं, मछुआरों, ऊर्जा प्रदाताओं तथा पर्यटन क्षेत्र के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अलर्ट उपलब्ध कराती है।
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस का मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत और स्वदेशी पूर्वानुमान प्रणाली का निर्माण करना है, जो पूरे भारत में सटीक, रियल-टाइम और प्रभाव-आधारित बहु-आपदा पूर्वानुमान प्रदान करने में सक्षम हो। यह प्रणाली पूर्वानुमानकर्ताओं, निर्णय-कर्ताओं और समुदायों को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे सूचना के प्रवाह में सुधार हो और समय पर प्रारंभिक चेतावनियां जारी की जा सकें। इन क्षमताओं के माध्यम से, यह प्रणाली प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियों का समर्थन करती है, जिससे आईएमडी के पूर्वानुमानकर्ता जटिल मौसम संबंधी आंकड़ों को उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी जानकारी में परिवर्तित कर सकें। यह दृष्टिकोण आपदा तैयारी को मजबूत करता है और सार्वजनिक सुरक्षा को बढ़ाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि पूर्व चेतावनी से संबंधित जानकारी विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के लिए सुलभ, विश्वसनीय और प्रासंगिक हो।
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एमएचईडबल्यू-डीएसएस की मुख्य विशेषताएं
🛰️स्वचालित मौसम डेटा प्रसंस्करण: मौसम संबंधी आंकड़ों के संग्रह, गुणवत्ता जांच और एकीकरण का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वचालित है, जिससे मौसम प्रणालियों और उनके संभावित प्रभावों का तेज़ी से पता लगाना संभव हो पाता है।
📊पूर्वानुमान मॉडलों का बेहतर उपयोग: अब 95 प्रतिशत से अधिक संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल इनपुट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे विभिन्न मौसम संबंधी खतरों के लिए जोखिम आकलन में सुधार हुआ है।
⚙️पुनः तैयार पूर्वानुमान प्रणाली: संपूर्ण पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पुनः तैयार किया गया है, जिससे रियल-टाइम अलर्ट जारी करना और तेज़ निर्णय-निर्माण संभव हो पाया है।
📅लंबी पूर्वानुमान अग्रिम अवधि: पूर्वानुमान की अग्रिम अवधि 5 दिनों से बढ़ाकर 7 दिन कर दी गई है, जिससे प्राधिकरणों और समुदायों को पहले से तैयारी करने का अधिक समय मिल जाता है।
⏱️तेज़ पूर्वानुमान तैयारी: पूर्वानुमान तैयार करने में लगने वाला समय 6 घंटे से घटकर लगभग 3 घंटे रह गया है, जिससे चेतावनियों का तेजी से प्रसार संभव हो गया है।
💰लागत बचत और आत्मनिर्भरता: इस प्रणाली ने लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत की बचत की है और विदेशी एजेंसियों पर निर्भरता को समाप्त किया है, जिससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत हुई है।
🌪️प्रभावी चक्रवात पूर्वानुमान: बिपरजॉय चक्रवात और दाना चक्रवात के दौरान सटीक पूर्वानुमानों ने समय पर निकासी संभव बनाई, जिसके परिणामस्वरूप गुजरात और ओडिशा में शून्य जनहानि हुई।
🚨निकासी लागत में कमी: बेहतर पूर्व चेतावनियों के कारण 1999 से 2024 के बीच निकासी लागत एक-तिहाई तक कम हो गई है, जो आईएमडी की ओर से जारी 3–5 दिन पूर्व के चक्रवात लैंडफॉल पूर्वानुमान में त्रुटि में कमी के कारण संभव हुआ है।
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एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस भारत सरकार के “मौसम के लिए तैयार और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र” के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है और “हर हर मौसम, हर घर मौसम” के सिद्धांत को साकार करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि समय पर और उपयोगी मौसम संबंधी जानकारी प्रत्येक घर, क्षेत्र और इलाके तक पहुँचे।
एमएचईडबल्यू-डीएसएस को समर्थन देने वाला संस्थागत ढांचा
बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (एमएचईडबल्यू-डीएसएस) एक अत्याधुनिक अनुप्रयोग है, जिसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मिशन मौसम के अंतर्गत स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह एक वेब जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे मौसम पूर्वानुमान तैयार करने, बड़े पैमाने पर मौसम संबंधी डेटा का आकलन करने और समय पर मौसम चेतावनियां प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस प्रणाली के अंतर्गत कई क्षेत्र-विशिष्ट भू-स्थानिक अनुप्रयोग विकसित किए गए हैं। इनमें से एक अनुप्रयोग, ‘मौसमग्राम’ है जो हाइपर-लोकल स्तर पर मौसम पूर्वानुमान को अंतिम चरण तक प्रसार को सक्षम बनाता है, जिससे मौसम संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रभावी रूप से नागरिकों और मौसम पर निर्भर क्षेत्रों तक पहुंच जाती है।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस):
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) भारत सरकार का नोडल मंत्रालय है, जो सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास के लिए वायुमंडलीय तथा महासागरीय प्रक्रियाओं की निगरानी, पूर्वानुमान और समझ के लिए संचालन संबंधी सेवाएं और वैज्ञानिक अनुसंधान प्रदान करता है। यह भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) सहित प्रमुख संस्थानों तथा अन्य पूर्वानुमान और अनुसंधान केंद्रों की देखरेख करता है, जो पूरे देश में मौसम और जलवायु सेवाओं का समर्थन करते हैं।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी):
1875 में स्थापित, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मौसम विज्ञान और संबंधित विज्ञानों के लिए प्रमुख सरकारी एजेंसी के रूप में कार्य करता है। यह व्यवस्थित रूप से मौसम संबंधी अवलोकन करता है और आपदा जोखिम घटाने, कृषि, विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, जल, सिंचाई, सतही परिवहन, नौवहन, विमानन, तटीय एवं अपतटीय उद्योगों तथा पर्यटन जैसे मौसम-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए वर्तमान और पूर्वानुमानित मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करता है। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस के अंतर्गत, आईएमडी एक केंद्रीय संचालन संबंधी भूमिका निभाता है, जो एकीकृत डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से रियल-टाइम पूर्वानुमान और चेतावनियां जारी करता है।
सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित, मिशन मौसम देशभर में मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रमुख पहल है। इस मिशन का उद्देश्य चक्रवात, भारी वर्षा और लू जैसी गंभीर मौसम घटनाओं के लिए पूर्वानुमानों की सटीकता, समाधान क्षमता और अग्रिम समय को बढ़ाना है। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस के अंतर्गत, यह मिशन अवलोकन नेटवर्क, डेटा सम्मिश्रण और मॉडलिंग क्षमताओं में सुधार के माध्यम से पूर्वानुमान की वैज्ञानिक और तकनीकी आधारशिला को मजबूत करता है, जिससे प्रभावी आपदा तैयारी के लिए समय पर मौसम चेतावनियां जारी करना संभव हो पाता है।
क्या आप जानते थे?
जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया, ‘मौसमग्राम’ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा विकसित एक वेब-आधारित, हाइपर-लोकल मौसम पूर्वानुमान पोर्टल है। यह प्लेटफ़ॉर्म 10 दिनों तक के स्थान-विशिष्ट पूर्वानुमान प्रदान करता है, जो भारत के 1.5 लाख से अधिक पिन कोड, 5,700 ब्लॉकों और 6.2 लाख से अधिक गांवों को कवर करता है। आईएमडी की वेबसाइट, ‘मौसम’ मोबाइल ऐप, सचेत प्लेटफ़ॉर्म, ई-पंचायत सेवा और एपीआई के माध्यम से सुलभ यह पोर्टल व्यापक सार्वजनिक और संस्थागत पहुंच सुनिश्चित करता है। यह 36 घंटे तक के लिए प्रति घंटे पूर्वानुमान, 5 दिनों तक के लिए 3-घंटे के अंतराल पर पूर्वानुमान, और 10 दिनों तक के लिए 6-घंटे के अंतराल पर पूर्वानुमान प्रदान करता है, जिससे मौसम घटनाओं के प्रति योजना, तैयारी और प्रारंभिक प्रतिक्रिया में सुधार होता है। मौसमग्राम के माध्यम से पूर्वानुमानकर्ता देशभर तथा उत्तर भारतीय महासागर क्षेत्र तक सीधे पहुँच बना सकते हैं, जिसमें मछुआरे और किसान शामिल हैं। यह सूचना केंद्रीय और राज्य कृषि मंत्रालयों के सहयोग से, ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से कृषि सखी और पशु सखी तक, तथा पंचायती राज मंत्रालय के माध्यम से वार्ड सदस्यों, सरपंचों और पंचायत सचिवों तक पहुँचाई जाती है।
सामूहिक रूप से, ये संस्थान और प्लेटफ़ॉर्म एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस इकोसिस्टम की संचालन संबंधी रीढ़ का निर्माण करते हैं। अवलोकन, मॉडलिंग और डिजिटल प्रसार में उनकी संयुक्त क्षमताएं भारत की सटीक, स्थान-विशिष्ट पूर्वानुमान और समय पर प्रारंभिक चेतावनियां प्रदान करने की क्षमता को सुदृढ़ करती हैं, जिससे आपदा तैयारी में सुधार होता है और देशभर के मौसम के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों को समर्थन मिलता है।
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एमएचईडबल्यू-ईएसएस का संचालन संबंधी ढांचा
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस बड़े पैमाने पर मौसम संबंधी आंकड़ों को एकीकृत करता है और संपूर्ण कार्य को पुनः तैयार करके पूर्वानुमान प्रक्रिया को स्वचालित बनाता है।
यह प्रणाली रडार, स्वचालित मौसम स्टेशन, उपग्रह, जहाजों और समुद्री बॉय जैसे विभिन्न स्रोतों से रियल-टाइम डेटा एकत्र करके कुशल डेटा संग्रह को सक्षम बनाती है। यह जानकारी एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म पर मानकीकृत और संसाधित की जाती है, जिससे मौसम पैटर्न की बेहतर समझ के लिए उन्नत डेटा विश्लेषण और डेटा अवलोकन संभव होता है।

मल्टी-मॉडल एकीकरण और सहमति-आधारित पूर्वानुमान के माध्यम से, यह प्रणाली मॉडल आउटपुट की वास्तविक अवलोकनों से तुलना करती है, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले मॉडलों का चयन करती है, और सटीकता बढ़ाने के लिए एन्सेम्बल तकनीकों तथा गड़बड़ी सुधार का उपयोग करती है, विशेषकर मौसम संबंधी गंभीर घटनाओं के दौरान। ये जानकारियां समय पर निर्णय-लेने में सहायता करती हैं, चेतावनियों की तैयारी को तेज़ बनाती हैं और हितधारकों तथा आम जनता तक जानकारी के प्रभावी प्रसार को सुनिश्चित करती हैं।
इस प्रणाली के केंद्र में मौसम विश्लेषण और पूर्वानुमान सक्षम प्रणाली (डबल्यूएएफईएस) है, जो पूर्वानुमानकर्ताओं को डेटा का विश्लेषण करने, चार्ट तैयार करने और जीआईएस-आधारित मानचित्रों के माध्यम से मौसम की स्थिति का आकलन करने में सहायता करता है। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस ने पहले की मैनुअल पूर्वानुमान पद्धति को हटा दिया है और मौसम वैज्ञानिकों को रियल-टाइम अवलोकनों की तुलना मॉडल आउटपुट से करने की सुविधा प्रदान की है, जिससे अधिक सटीक मौसम पूर्वानुमान तैयार किए जा सकते हैं।
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इसका प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियों पर विशेष ध्यान है। इसका अर्थ है कि केवल मौसम की स्थिति का पूर्वानुमान करने की बजाय, यह प्रणाली यह भी आकलन करती है कि गंभीर मौसम कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों को कैसे प्रभावित कर सकता है। यह प्रणाली विभिन्न जोखिम स्तरों को दर्शाने के लिए सरल और समझने में आसान रंग-आधारित चेतावनियां जारी करती है। जीआईएस-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से यह चक्रवात, भारी वर्षा, लू, आंधी/बिजली और समुद्री परिस्थितियों जैसे कई खतरों से संबंधित अलर्ट को एक साथ प्रस्तुत करती है। पूर्वानुमान तैयार होने के बाद, चेतावनियां डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, एसएमएस, ईमेल, एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई), ‘मौसम’ मोबाइल ऐप, कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) और ग्राफिकल बुलेटिन के माध्यम से अधिकारियों और आम जनता तक पहुँचाई जाती हैं, जिससे समय पर कार्रवाई संभव होती है और आपदा तैयारी में सुधार होता है।
रियल-टाइम अवलोकनों और उन्नत मॉडलिंग उपकरणों के संयोजन से यह प्लेटफ़ॉर्म मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों की सटीकता, गति और स्पष्टता को बढ़ाता है। वैज्ञानिक आंकड़ों को जोखिम-आधारित सलाह में परिवर्तित करने की इसकी क्षमता प्रशासन, विभिन्न क्षेत्रीय एजेंसियों और समुदायों को समय पर बचाव संबंधी कदम उठाने में सक्षम बनाती है, जिससे आपदा तैयारी मजबूत होती है और मौसम की गंभीर घटनाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान को सक्षम बनाने वाली एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस की प्रमुख प्रणालीगत विशेषताएँ
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस को एक मजबूत और भविष्य-उन्मुख प्रणाली के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी, डेटा और संस्थागत समन्वय को एकीकृत करता है। इसकी संरचना विस्तार योग्य, अंतरसंचालनीय और उपयोगकर्ता-केंद्रित वितरण पर केंद्रित है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में सुचारू संचालन संभव हो पाता है।
- अंतरसंचालनीय: विभिन्न मॉड्यूल एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर मिलकर कार्य करते हैं, जिससे सामान्य मानकों के माध्यम से मंत्रालयों, विभागों और क्षेत्रों के बीच डेटा का आसान आदान-प्रदान संभव होता है।
- विस्तार योग्य: यह प्रणाली समय के साथ आसानी से विकसित हो सकती है—नए डेटा, तकनीकों, क्षेत्रों और आपदाओं के प्रकारों को बिना बड़े बदलाव के जोड़ा जा सकता है।
- अनुकरणीय: यह मानकीकृत तरीकों पर आधारित है, जिससे इसे अन्य क्षेत्रों में तथा अन्य देशों द्वारा भी आसानी से अपनाया जा सकता है।
- कुशल: रियल-टाइम पूर्वानुमान और प्रभाव-आधारित चेतावनियों ने पूर्वानुमान तैयार करने के समय में 50 प्रतिशत की कमी की है और सटीकता में 30 प्रतिशत का सुधार किया है।
- उत्तरदायी: यह प्रणाली उपयोगकर्ता-अनुकूल और गतिशील है, जो एसएमएस, एपीआई, मोबाइल ऐप और वेबसाइट जैसे विभिन्न माध्यमों से जानकारी साझा करती है।
- पारदर्शी: स्पष्ट डेटा प्रक्रियाएँ और खुले सिस्टम इसे ट्रैक करना, सत्यापित करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना आसान बनाते हैं।
- सतत: दीर्घकालिक योजना, नियमित प्रशिक्षण, सिस्टम उन्नयन और निरंतर ज्ञान साझा करने के माध्यम से इसका समर्थन किया जाता है।
समग्र रूप से, प्रणाली की ये विशेषताएँ एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस को एक व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख प्रणाली बनाती हैं, जो आपदा तैयारी को सुदृढ़ करती है और बेहतर निर्णय-निर्माण में सहायक है।
एएएमएचईडब्ल्यू-डीएसएस का प्रभाव: तैयारी के माध्यम से जीवन और आजीविका की सुरक्षा
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करता है और क्षेत्र-विशिष्ट सलाह प्रदान करता है, जिससे प्राधिकरणों, समुदायों और उद्योगों को चरम मौसम परिस्थितियों के लिए तैयार होने में सहायता मिलती है। वैज्ञानिक पूर्वानुमानों को व्यावहारिक चेतावनियों में परिवर्तित करके, यह प्रणाली सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा प्रबंधन और आपदा तैयारी को सुदृढ़ बनाती है।
चक्रवात और समुद्री सुरक्षा:
- चक्रवात, तूफानी लहर, भारी वर्षा और समुद्र की उग्र स्थिति के लिए पूर्व चेतावनियां प्रदान करता है।
- जब हवा की गति 45 किमी/घंटा से अधिक हो, समुद्र बहुत उग्र हो जाए या आंधी-तूफान की संभावना हो, तब मछुआरों के लिए विशेष अलर्ट जारी किए जाते हैं।
- चेतावनियां एसएमएस, व्हाट्सएप, मोबाइल ऐप, आकाशवाणी, दूरदर्शन और आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से साझा की जाती हैं।
- चक्रवात के दौरान बार-बार अपडेट दिए जाते हैं, जिससे तटीय समुदायों और मछुआरों को समय पर सुरक्षा उपाय करने में मदद मिलती है।
मानव स्वास्थ्य:
- लू पूर्वानुमान और लू कार्ययोजना का समर्थन करता है, जिससे गर्मी से संबंधित बीमारियों को कम करने में मदद मिलती है।
- प्राधिकरणों को कूलिंग सेंटर, अस्पतालों की तैयारी और आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की व्यवस्था करने में सहायता करता है, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं जैसे संवेदनशील समूहों के लिए।
- मौसम संबंधी आंकड़े डेंगू और मलेरिया जैसे वेक्टर-जनित रोगों के पूर्वानुमान में सहायक होते हैं तथा सामुदायिक स्वास्थ्य, पोषण और बचाव कार्यक्रमों को मजबूत करते हैं।
- वायु गुणवत्ता और तापमान संबंधी सलाह संवेदनशील आबादी को निवारक उपाय अपनाने में मदद करती हैं।
उर्जा क्षेत्र:
- सौर विकिरण, पवन, वर्षा और तापमान के पूर्वानुमान प्रदान करता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा योजना में सहायता मिलती है।
- सौर, पवन और जलविद्युत उत्पादन प्रबंधन को समर्थन देता है।
- प्रारंभिक चेतावनियां ऊर्जा अवसंरचना को चरम मौसम से सुरक्षित रखने में मदद करती हैं।
- स्वचालन के कारण अवसंरचना लागत में कमी आई है और प्रति वर्ष लगभग 210,240 किलोवाट बिजली की बचत होती है।
जल संसाधन प्रबंधन:
- सटीक वर्षा पूर्वानुमान, मानसून की भविष्यवाणी और सूखा चेतावनियां प्रदान करता है।
- जलाशय संचालन, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई योजना और भूजल प्रबंधन को समर्थन देता है।
- कृषि-मौसम संबंधी सलाह के माध्यम से किसानों को जल का अधिक कुशल उपयोग करने में मदद करता है।
- डिजिटल कार्यप्रवाह के कारण कागज़ी चार्ट निर्माण समाप्त होने से प्रति वर्ष लगभग 63 किलोलीटर पानी की बचत हुई है।
पर्यावरण संरक्षण:
- जलवायु निगरानी, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को समर्थन देता है।
- डिजिटल पूर्वानुमान ने आईएमडी के 40 कार्यालयों में मैनुअल चार्ट प्लॉटिंग को समाप्त कर दिया है।
- प्रति वर्ष 23.4 टन कागज़ की बचत होती है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।
- इससे प्रतिवर्ष लगभग 1.40 करोड़ रुपये की बचत होती है और 2.57 टन सीओ₂ उत्सर्जन से बचाव होता है।
शिक्षा एवं क्षमता निर्माण:
- मौसम वैज्ञानिकों और हितधारकों के लिए डिजिटल पूर्वानुमान उपकरणों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है।
- बुलेटिन, मानचित्रों और ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से मौसम और जलवायु साक्षरता को बढ़ावा देता है।
- जलवायु डेटा और मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराकर अनुसंधान और उच्च शिक्षा को समर्थन देता है।
- हितधारकों को पूर्वानुमानों की बेहतर व्याख्या करने में मदद करता है, जिससे निर्णय-लेने और तैयारी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।
सतत कृषि:
- किसानों के लिए सप्ताह में दो बार कृषि-मौसम संबंधी सलाह और फसल-विशिष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- मौसम की परिस्थितियों के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई और कटाई की योजना बनाने में मदद करता है।
- इन सलाहों का उपयोग करने वाले किसानों की वार्षिक आय, उन्हें न अपनाने वालों की तुलना में 52.5 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
- वर्षा-आधारित जिलों में, यदि फसल मौसम सलाह किसानों तक पहुँचे और उनका उपयोग किया जाए, तो अनुमानित आर्थिक लाभ लगभग 13,331 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष है।
आजीविका संरक्षण:
- किसानों, मछुआरों, परिवहन कर्मियों और दिहाड़ी मजदूरों को समय पर मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करता है।
- समुदायों को अपनी संपत्तियों की सुरक्षा करने, गतिविधियों की सुरक्षित योजना बनाने और मौसम से होने वाले नुकसान से बचने में मदद करता है।
- कृषि, मत्स्य, पर्यटन और परिवहन जैसे क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
शासन को सुदृढ़ करना::
- डेटा संग्रह, विश्लेषण और चेतावनी प्रसार के लिए पूर्णतः डिजिटल पूर्वानुमान कार्य को लागू करता है।
- पूर्वानुमान की सटीकता, डेटा साझा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार करता है।
- 40 पूर्वानुमान कार्यालयों में मैनुअल कार्य को कम करता है और मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करता है।
- डिजिटल परिवर्तन के परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष लगभग 57.6 करोड़ रुपये की मानवशक्ति की लागत की बचत होती है।
- 200 से अधिक संगठन आईएमडी के इस अनुप्रयोग का उपयोग करते हैं, जिनमें नीति आयोग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) शामिल हैं।
समय पर पूर्वानुमान, जोखिम-आधारित चेतावनियों और क्षेत्रीय सलाहों के माध्यम से एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस समुदायों और संस्थानों में तैयारी को सुदृढ़ करता है। इसका प्रभाव आपदाओं के दौरान जीवन की सुरक्षा से लेकर आजीविका के संरक्षण, संसाधनों के कुशल प्रबंधन और शासन तक विस्तृत है। यह प्रणाली एक अधिक लचीले और मौसम-तत्पर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस भारत के आपदा जोखिम प्रबंधन दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो प्रौद्योगिकी, डेटा और संस्थागत समन्वय को एक साथ लाता है। इसका प्रभाव न केवल देश के भीतर आपदा तैयारी को सुदृढ़ करने में दिखाई देता है, बल्कि वैश्विक प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में भारत के योगदान को भी मजबूत करता है। राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर, इस प्रणाली ने क्षेत्रीय सहयोग, अंतरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान साझेदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं को बढ़ावा दिया है, जिससे वैश्विक आपदा जोखिम घटाने में भारत की भूमिका और मजबूत हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस ने क्षेत्रीय और वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचों में भारत की भूमिका को सुदृढ़ किया है। यह प्रणाली उत्तर भारतीय महासागर और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मौसम और जलवायु सेवाओं का समर्थन करती है, जिसमें समुद्री परामर्श, विमानन मौसम विज्ञान और उष्णकटिबंधीय चक्रवात पूर्वानुमान शामिल हैं। यह कार्य विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डबल्यूएमओ) तथा एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएप)/डबल्यूएमओ के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल के अंतर्गत किया जाता है। एक क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र (आरएसएमसी) के रूप में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस के माध्यम से बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देशों को महत्वपूर्ण पूर्वानुमान सहायता और गंभीर मौसम की चेतावनियां प्रदान करता है, जिससे क्षेत्रीय समन्वय और डेटा साझाकरण को मजबूती मिलती है।
राष्ट्रीय स्तर पर, एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस ने आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। वर्तमान में 200 से अधिक संगठन आईएमडी के इस अनुप्रयोग का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआऱएफ) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। यह प्रणाली समय पर पूर्वानुमान और प्रभाव-आधारित चेतावनियां प्रदान करती है, साथ ही शहरी नियोजन एजेंसियों, विद्युत उपयोगिताओं, स्वास्थ्य सेवाओं और विमानन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों को बेहतर निर्णय-निर्माण के लिए उपयोगी मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है।
इस प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मान्यता भी प्राप्त हुई है, जिसमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनडीआरआर) का सासाकावा पुरस्कार 2025 (आईएमडी के महानिदेशक श्री मृत्युंजय मोहापात्र को) तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समिट 2026 में उत्कृष्टता पुरस्कार शामिल हैं, जो सार्वजनिक सेवा वितरण में आईएमडी के नवाचार को दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना को “डिजास्टर मैनेजमेंट एंड पब्लिक सेफ्टी टेक अवॉर्ड” श्रेणी के अंतर्गत द इकोनॉमिक टाइम्स गवटेक अवॉर्ड 2026 भी प्रदान किया गया है।
ये सभी सम्मान एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस की संचालन संबंधी सफलता को रेखांकित करते हैं और आपदा जोखिम प्रबंधन में राष्ट्रीय लचीलापन तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (एमएचईडबल्यू-डीएसएस) भारत के मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के दृष्टिकोण में एक निर्णायक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती है। रियल-टाइम अवलोकनों, उन्नत मॉडलिंग, जीआईएस-आधारित विश्लेषण और ढांचागत सूचना प्रसार को एकीकृत करते हुए, यह प्रणाली मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी को समय पर ऐहतियाती कार्रवाई में परिवर्तित करती है।
एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस ने पर्यावरण, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि, आजीविका और सुशासन जैसे क्षेत्रों में तैयारी को सुदृढ़ किया है। इसने जनहानि को कम किया है, आर्थिक नुकसान को सीमित किया है, सेवा वितरण में सुधार किया है और निरंतर तथा प्रभाव-केंद्रित चेतावनियों के माध्यम से जनविश्वास को बढ़ाया है। यह प्रणाली दर्शाती है कि प्रौद्योगिकी-आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली कैसे राष्ट्रीय स्तर पर मापने योग्य सार्वजनिक लाभ प्रदान कर सकती है और भारत को बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियों में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करती है।
संदर्भ
India Meteorological Department
Council of Scientific & Industrial Research (CSIR)
Council on Energy, Environment and Water (CEEW)
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पीके/केसी/एमएस
(रिलीज़ आईडी: 2248151)
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