कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
साधना सप्ताह के उद्घाटन अवसर पर कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने कहा कि सिविल सेवाओं में भविष्य के नेतृत्व का निर्धारण केवल वरिष्ठता से नहीं, बल्कि योग्यता से होगा
कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने कहा कि मिशन कर्मयोगी को अंतिम छोर तक शासन को मज़बूत करने के लिए जिलों तक पहुंचना चाहिए
मिशन कर्मयोगी एक राष्ट्रीय प्रयास है, जिसके लिए सभी स्तरों पर उत्तरदायित्व की आवश्यकता है: कैबिनेट सचिव
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 6:23PM by PIB Delhi
भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों के भीतर एक मज़बूत सीखने की संस्कृति का निर्माण मूल रूप से नेतृत्व पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी सीखने की प्रक्रिया में गंभीरता से शामिल होते हैं और स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करते हैं, तो यह पूरे संगठन के व्यवहार को आकार देता है। मिशन कर्मयोगी को एक राष्ट्रीय पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा, जब यह जिलों और ज़मीनी स्तर तक पहुंचेगा, जहां नागरिक सीधे तौर पर शासन का अनुभव करते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अग्रिम पंक्ति के अधिकारियों को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक कौशल, प्रेरणा और दक्षताओं से लैस होना चाहिए।
निरंतर सीखने के महत्व पर जोर देते हुए, कैबिनेट सचिव ने कहा कि जहां सिविल सेवाओं में करियर में तरक्की वरिष्ठता के आधार पर स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर जाने वाला मार्ग लग सकती है, वहीं वास्तविक ज़िम्मेदारी वाले पदों तक पहुंचना अब अधिक से अधिक काबिलियत और काम करके दिखाने की क्षमता पर निर्भर करता है। एक तुलना करते हुए, उन्होंने कहा कि जहां "वरिष्ठता एक ऐसी शक्ति की तरह काम कर सकती है जो करियर को ऊपर की ओर ले जाती है, वहीं यह काबिलियत ही है जो यह तय करती है कि कोई व्यक्ति वस्ताव में कितना ऊपर तक पहुंचता है।" उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में, जहां ज्ञान और कौशल जल्दी ही पुराने पड़ जाते हैं, निरंतर सीखना न केवल शासन के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए, बल्कि व्यक्तियों को अपनी पूरी पेशेवर क्षमता का एहसास कराने में सक्षम बनाने के लिए भी आवश्यक है।
यह संबोधन नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' के एक विशेष सत्र के दौरान दिया गया, जिसमें भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। यह सत्र प्रशिक्षण संस्थानों और गुणवत्ता ढांचों पर हुई विषयगत चर्चाओं के बाद, दोपहर के भोजन के उपरांत आयोजित कार्यक्रम का एक हिस्सा था। इस सत्र में कैबिनेट सचिव ने शासन प्रणालियों में क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने पर अपने विचार साझा किए।
इससे पहले दिन में, भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने क्षमता निर्माण के माध्यम से एक अनुकूलनीय और उद्यमशील राज्य बनाने पर एक मास्टरक्लास दी। उन्होंने शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका के बारे में बात की और इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे दौर में, जहां बदलाव तेजी से होते हैं, सरकारों को सीखने, खुद को ढालने और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता की चाह में समयबद्धता की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, और जटिलता व अनिश्चितता से निपटने के लिए सीखने पर आधारित शासन प्रणालियां अत्यंत आवश्यक हैं।
दिन में दो मुख्य विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए। सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों, पीएसयू और मंत्रालयों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, ताकि चार कार्यबलों द्वारा तैयार की गई व्यावहारिक सिफारिशों पर चर्चा की जा सके। इन सिफारिशों में सहयोगात्मक क्षमता निर्माण, संस्थागत नेतृत्व, एआई-सक्षम प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सतत वित्तपोषण तंत्र जैसे क्षेत्र शामिल थे; ये सिफारिशें 150 से अधिक अधिकारियों के साथ परामर्श और विभिन्न क्षेत्रों के 62 प्रशिक्षण संस्थानों के साथ सहभागिता पर आधारित थीं।
कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क पर हुए एक सत्र में एक ऐसे विकसित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर सीखी गई बातें, बेहतर निर्णय लेने और सेवा प्रदान करने में बदल सकें। यह फ्रेमवर्क, जिसे उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के विशेषज्ञों की भागीदारी वाली एक बहु-विषयक परामर्श प्रक्रिया के ज़रिए तैयार किया गया है, गुणवत्ता के लिए एक एकीकृत जीवनचक्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण खोज, डिज़ाइन, विकास, वितरण, मूल्यांकन और सुधार के सभी चरणों में लागू होता है। कार्यबल के सदस्यों की एक पैनल चर्चा में, सीखने की प्रक्रिया को वास्तविक प्रशासनिक संदर्भों से जोड़ने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। साथ ही, सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
डॉ. सोमनाथन ने राज्य सरकारों से मिशन कर्मयोगी को सक्रिय रूप से अपनाने और उसका विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल केंद्र सरकार की पहल नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय प्रयास है जिसके लिए सभी स्तरों पर शासनाधिकार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को विशेष रूप से ज़िला और उप-ज़िला स्तरों पर अपनी शासन प्रणालियों में क्षमता निर्माण को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, क्षमता निर्माण आयोग और कर्मयोगी भारत जैसे संस्थान साझे ढांचों, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों और विभिन्न पहलों के माध्यम से इस विस्तार में सहयोग कर रहे हैं। इन पहलों को स्थानीय ज़रूरतों और संदर्भों के अनुकूल बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन और ज्ञान प्रणालियों में बदलाव की गति काफी तेज हो गई है, जिससे निरंतर कौशल उन्नयन के बिना प्रभावी बने रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि पहले सीमित स्रोतों के माध्यम से अपडेटेड रहना संभव था, लेकिन आज व्यवस्थित और निरंतर सीखने की प्रक्रिया आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की शासन प्रणालियों में प्रदर्शन और क्षमता पर अधिक ज़ोर दिए जाने की संभावना है; ऐसे में, निरंतर क्षमता-निर्माण न केवल लोक सेवा के लिए एक आवश्यकता है, बल्कि यह किसी व्यक्ति के अपने पेशेवर विकास में किया गया एक निवेश भी है।
2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया जा रहा कर्मयोगी साधना सप्ताह, 'मिशन कर्मयोगी' के तहत एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। यह कार्यक्रम 'प्रौद्योगिकी', 'परंपरा' और 'ठोस परिणामों' जैसे प्रमुख विषयों पर केंद्रित है, और भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था बनाने के लिए मंत्रालयों, राज्यों और सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साथ लाता है। यह पहल मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने और क्षमता निर्माण की विभिन्न नई पहलों के शुभारंभ का प्रतीक है।



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पीके/केसी/एसके/ डीए
(रिलीज़ आईडी: 2248668)
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