जनजातीय कार्य मंत्रालय
राज्यों द्वारा की जा रही पहलों के साथ जनजातीय कल्याण योजनाओं का समन्वय
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 4:07PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में सूचित किया कि सरकार देश में अनुसूचित जनजातियों तथा जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास हेतु एक रणनीति के रूप में अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) का क्रियान्वयन कर रही है, जिसमें तमिलनाडु राज्य भी शामिल है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त, 41 मंत्रालय/विभाग भी अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और गैर- अनुसूचित जनजातीय आबादी के बीच विकासात्मक अंतर को कम करने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, आवास, विद्युतीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न जनजातीय विकास परियोजनाओं के लिए डीएपीएसटी के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष अपने कुल योजनागत बजट का एक निर्धारित प्रतिशत आवंटित करते हैं। अनुसूचित जनजातियों के कल्याण हेतु बाध्य मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित निधियों सहित योजनाओं का विवरण केंद्रीय बजट दस्तावेज़ के व्यय प्रोफाइल के विवरण 10बी में दिए गए लिंक पर उपलब्ध है।
https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/stat10b.pdf.
राज्य सरकारों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे राज्य में अनुसूचित जनजाति जनसंख्या (जनगणना 2011) के अनुपात में अपने कुल योजनागत आवंटन के सापेक्ष टीएसपी निधियों को चिह्नित करें। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनी स्वयं की निधियों से टीएसपी के अंतर्गत किए गए आवंटन एवं व्यय का विवरण https://statetsp.tribal.gov.in पर उपलब्ध है।
जैसा कि तमिलनाडु राज्य सरकार द्वारा सूचित किया गया है कि ‘थोलकुडी ऐथिनई कार्यक्रम’ पूर्णतः राज्य वित्तपोषित योजना है। यह योजना विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। राज्य द्वारा कृषि एवं संबद्ध आजीविकाओं हेतु निधियाँ आवंटित की जाती हैं, जिनमें सतत् कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए ऑन-फार्म गतिविधियाँ जैसे बागवानी उत्पादन, बहु-फसली उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, नकदी फसल उत्पादन, कसावा उत्पादन आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ऑफ-फार्म गतिविधियों के अंतर्गत वन एवं पशुधन आधारित उद्यमों, मत्स्य पालन आदि को सुदृढ़ किया जाता है तथा गैर-कृषि गतिविधियों के रूप में जनजातीय युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर समूहों का विकास, कृषि यंत्रों की खरीद, कृषि यंत्र शेड का निर्माण आदि शामिल हैं। राज्य ने आईआईएमआर, आईआईएचआर, टीएएनयूवीएएस, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, एनबीएफजीआर, सीआईएई, एनआरसीबी तथा सीटीसीआरआई जैसे विभिन्न संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं और राज्य इन संस्थानों की जनजातीय उपयोजना के अंतर्गत आजीविका योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु निधियाँ आवंटित करता है।
आगे, आदिवासी कार्य मंत्रालय ने आजीविका गतिविधियों को लागू करने के लिए आदिवासी बहुउद्देशीय विपणन हेतु निधियाँ आवंटित की हैं। मंत्रालय ने 45 वन धन विकास केन्द्रों के लिए भी निधियाँ स्वीकृत की हैं, जिसमें राज्य की हिस्सेदारी का 50% शामिल है।
इसके अतिरिक्त, जनजातीय कार्य मंत्रालय देश में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के कल्याण एवं विकास हेतु विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रहा है। इन योजनाओं/कार्यक्रमों का विवरण परिशिष्ट-I में दिया गया है।
इन योजनाओं/कार्यक्रमों के अंतर्गत मंत्रालय द्वारा हाल के वित्तीय वर्षों के दौरान किए गए निधि आवंटनों का विवरण परिशिष्ट-II में दिया गया है।
मंत्रालय ने डीएपीएसटी के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में उपलब्ध निधियों के समन्वय के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों के विकास हेतु दो मिशनों का संचालन किया है, जिनके नाम हैं – प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए)।
पीएम जनमन: सरकार ने 18 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश में निवास करने वाले 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) प्रारंभ किया है। इस मिशन का उद्देश्य 3 वर्षों में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क एवं दूरसंचार संपर्क, अविद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण तथा सतत् आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। इन उद्देश्यों को 9 पंक्तिबद्ध मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 हस्तक्षेपों, जिनमें छात्रावास एवं मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) शामिल हैं, के माध्यम से प्राप्त किया जाना प्रस्तावित है। पीएम जनमन का कुल बजटीय परिव्यय ₹24,104 करोड़ है (केंद्रीय अंश: ₹15,336 करोड़ तथा राज्य अंश: ₹8,768 करोड़)।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए): माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया गया। यह अभियान 17 पंक्तिबद्ध मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 हस्तक्षेपों को समाहित करता है और 5 वर्षों में 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों एवं 2,911 प्रखंडों में स्थित 63,843 गांवों में अवसंरचनात्मक कमियों को दूर करने, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करने तथा आजीविका के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखता है, जिससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी लाभान्वित होगी। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय ₹79,156 करोड़ है (केंद्रीय अंश: ₹56,333 करोड़ तथा राज्य अंश: ₹22,823 करोड़)।
तमिलनाडु राज्य सरकार द्वारा सूचित किया गया है कि थोलकुडी अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत जनजातियों के लिए आवास हेतु पिछले तीन वर्षों में निम्नानुसार निधियों का आवंटन एवं व्यय किया गया है:
|
2023-24
|
2024-25
|
2025-26
|
|
घरों की संख्या
|
धनराशि (करोड़ में)
|
घरों की संख्या
|
धनराशि (करोड़ में)
|
घरों की संख्या
|
धनराशि (करोड़ में)
|
|
1500
|
79.28
|
750
|
40.33
|
1200
|
52.68
|
थोलकुडी अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत तमिलनाडु कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र के सूचीबद्ध प्रशिक्षण भागीदारों के माध्यम से 1000 जनजातीय युवाओं के लिए टू व्हीलर तकनीशियन, जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, ब्यूटीशियन कोर्स, सीएनसी प्रशिक्षण, वेल्डिंग आदि जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। तमिलनाडु राज्य ने अब तक पश्चिमी जिलों में लगभग 797 जनजातीय युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के लिए शिक्षा, कौशल विकास एवं आजीविका के अवसरों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने हेतु तमिलनाडु सरकार सहित राज्य सरकारों के साथ विभिन्न तंत्रों के माध्यम से समन्वय करता है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) योजना का क्रियान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय जनजातीय छात्र शिक्षा सोसायटी (नेस्ट्स) के माध्यम से किया जाता है, जो ईएमआरएस की स्थापना एवं प्रबंधन के लिए नामित राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से राज्य सरकारों के साथ समन्वय में कार्य करती है।
ट्राइफेड पीएमजेवीएम योजना के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी है तथा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार ट्राइफेड इस योजना का क्रियान्वयन प्रत्यक्ष रूप से अथवा राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों (एसआईए) के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से करता है।
अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) के अंतर्गत भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय/विभाग अपनी-अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से करते हैं।
डीएजेजीयूए के अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय एवं निगरानी के लिए राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इनमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय शीर्ष समिति, जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियाँ तथा जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को सुगम बनाने हेतु प्रखंड स्तरीय कार्यान्वयन दल शामिल हैं।
डीएपीएसटी के ढांचे के अंतर्गत बाध्य मंत्रालयों/विभागों द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किए गए आवंटन एवं व्यय की समीक्षा हेतु समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं।
परिशिष्ट-I
लोकसभा अतारांकित प्रश्न सं. 6308 (दिनांक 02.04.2026) के भाग (क) से (घ) तक के उत्तर में संदर्भित परिशिष्ट, डॉ. टी. सुमथि उर्फ तमिऴाची थंगापांडियन द्वारा पूछे गए “राज्य द्वारा की जा रही पहलों के साथ जनजातीय कल्याण योजनाओं के समन्वय” के संबंध में।
देश में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित प्रमुख योजनाओं/कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण:
(i) धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए): माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 2 अक्टूबर, 2024 को धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया गया। यह अभियान 17 पंक्तिबद्ध मंत्रालयों द्वारा क्रियान्वित 25 हस्तक्षेपों का समुच्चय है तथा इसका उद्देश्य 5 वर्षों में 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों एवं 2,911 प्रखंडों के 63,843 ग्रामों में अवसंरचनात्मक अभावों की पूर्ति करना, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुँच में सुधार करना तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय जनसंख्या को लाभ होगा। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय ₹79,156 करोड़ है (केंद्रीय अंश: ₹56,333 करोड़ एवं राज्य अंश: ₹22,823 करोड़)।
(ii) प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन): सरकार द्वारा 15 नवंबर, 2023 को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) का शुभारंभ किया गया, जिसे ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। यह मिशन लगभग ₹24,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के परिवारों एवं बस्तियों को लक्षित करते हुए 3 वर्षों की समयावधि में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुँच, सड़क एवं दूरसंचार संपर्क, अविद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण तथा सतत् आजीविका के अवसर जैसी मूलभूत सुविधाओं का संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखता है।
(iii) प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसे जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने हेतु दो पूर्ववर्ती योजनाओं के एकीकरण के माध्यम से डिज़ाइन किया गया है, अर्थात् “न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वन उपज (एमएफपी) के विपणन की व्यवस्था एवं एमएफपी की मूल्य श्रृंखला का विकास” तथा “जनजातीय उत्पादों/उपज के विकास एवं विपणन हेतु संस्थागत समर्थन।”
यह योजना चयनित लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के निर्धारण एवं घोषणा का प्रावधान करती है। यदि किसी विशेष एमएफपी वस्तु का प्रचलित बाजार मूल्य निर्धारित एमएसपी से नीचे चला जाता है, तो निर्धारित राज्य एजेंसियों द्वारा पूर्व-निर्धारित एमएसपी पर क्रय एवं विपणन कार्य किया जाएगा। साथ ही, सतत् संग्रहण, मूल्य संवर्धन, अवसंरचना विकास, एमएफपी के ज्ञान आधार का विस्तार तथा बाजार सूचना तंत्र के विकास जैसे मध्यम एवं दीर्घकालिक मुद्दों का भी समाधान किया जाएगा।
(iv) एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) की शुरुआत वर्ष 2018-19 में जनजातीय बच्चों को उनके अपने परिवेश में नवोदय विद्यालय के समकक्ष गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। नई योजना के अंतर्गत सरकार ने 440 ईएमआरएस स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिसमें प्रत्येक ऐसे प्रखंड में एक ईएमआरएस स्थापित किया जाना है जहाँ अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जनसंख्या 50% से अधिक हो तथा कम से कम 20,000 जनजातीय व्यक्ति (जनगणना 2011 के अनुसार) निवास करते हों। शुरुआत में 288 ईएमआरएस विद्यालयों को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान के माध्यम से वित्तपोषित किया गया था, जिन्हें अब नए मॉडल के अनुरूप उन्नत किया जा रहा है। तदनुसार, मंत्रालय ने देशभर में कुल 728 ईएमआरएस स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे लगभग 3.5 लाख एसटी विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होगा।
(v) संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के उपबंध के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति (एसटी) जनसंख्या वाले राज्यों को अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को सुदृढ़ करने तथा जनजातीय समुदाय के कल्याण हेतु अनुदान प्रदान किए जाते हैं। यह एक विशेष क्षेत्र कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत राज्यों को 100% अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकारों को निधियों का निर्गमन एसटी जनसंख्या की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक कमियों को दूर किया जा सके।
(vi) अनुसूचित जनजातियों के कल्याण हेतु कार्यरत स्वयं-सेवी संगठनों को अनुदान सहायता: इस योजना के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण हेतु कार्यरत स्वयं-सेवी संगठनों को अनुदान प्रदान किया जाता है। मंत्रालय शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है, जिनमें आवासीय विद्यालय, गैर-आवासीय विद्यालय, छात्रावास, चलित औषधालय, 10 या उससे अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, आजीविका संबंधी गतिविधियाँ आदि शामिल हैं।
(vii) अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: यह योजना कक्षा IX–X में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर लागू होती है। अभिभावकों की सभी स्रोतों से वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस योजना के अंतर्गत डे-स्कॉलर विद्यार्थियों को ₹225 प्रति माह तथा छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को ₹525 प्रति माह की छात्रवृत्ति वर्ष में 10 माह की अवधि के लिए प्रदान की जाती है। छात्रवृत्ति का वितरण राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के माध्यम से किया जाता है। वित्तीय भागीदारी का अनुपात केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 है, जबकि पूर्वोत्तर एवं पर्वतीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह पूर्णतः (100%) केंद्रीय अंश के रूप में वहन किया जाता है।
(viii) अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति: इस योजना का उद्देश्य पोस्ट-मैट्रिक अथवा पोस्ट-सेकेंडरी स्तर पर अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूर्ण करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अभिभावकों की सभी स्रोतों से वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस योजना के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूल की जाने वाली अनिवार्य फीस की वापसी राज्य की फीस निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित सीमा तक की जाती है तथा पाठ्यक्रम के अनुसार ₹230 से ₹1200 प्रति माह तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। यह योजना राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा क्रियान्वित की जाती है। वित्तीय भागीदारी का अनुपात केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 है, जबकि पूर्वोत्तर एवं पर्वतीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह 100% केंद्रीय अंश के रूप में वहन किया जाता है।
(ix) अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति: यह जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसके अंतर्गत अनुसूचित जनजाति के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा हेतु (नवीनतम क्यूएस विश्व रैंकिंग के अनुसार शीर्ष 1000 संस्थानों/विश्वविद्यालयों में) छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। यह योजना वर्ष 1954-55 से संचालित है। इस योजना का क्रियान्वयन विदेश मंत्रालय के माध्यम से भारतीय दूतावासों/मिशनों द्वारा किया जाता है। प्रति वर्ष 20 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं। जिन एसटी विद्यार्थियों के परिवार की वार्षिक आय ₹6.0 लाख से अधिक नहीं है, वे इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के पात्र हैं।
(x) अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप एवं उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति:
(ए) राष्ट्रीय छात्रवृत्ति – (टॉप क्लास) योजना [स्नातक स्तर]: इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) के मेधावी विद्यार्थियों को देशभर के मंत्रालय द्वारा चिन्हित 265 उत्कृष्ट संस्थानों, जैसे आईआईटी, एम्स, आईआईएम, एनआईआईटी आदि में निर्धारित पाठ्यक्रमों में अध्ययन हेतु प्रोत्साहित करना है। अभिभावकों की सभी स्रोतों से वार्षिक आय ₹6.00 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस छात्रवृत्ति के अंतर्गत ट्यूशन फीस, जीवन-यापन व्यय तथा पुस्तकों एवं कंप्यूटर के लिए भत्ते शामिल होते हैं।
(बी) अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप: इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को भारत में एम.फिल एवं पीएच.डी. स्तर पर उच्च अध्ययन हेतु प्रतिवर्ष 750 फेलोशिप प्रदान की जाती हैं। फेलोशिप का अनुदान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुसार दिया जाता है।
(xi) जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता: इस योजना के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्य सरकारों को उन राज्यों में नए टीआरआई स्थापित करने तथा जहाँ टीआरआई पहले से विद्यमान हैं, उनके सुदृढ़ीकरण हेतु सहायता प्रदान करता है, जिससे वे अनुसंधान एवं प्रलेखन, प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास तथा समृद्ध जनजातीय धरोहर के संवर्धन से संबंधित अपनी मूल जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन कर सकें। जनजातीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए टीआरआई को विभिन्न गतिविधियों—जैसे अनुसंधान एवं प्रलेखन, कला एवं कलाकृतियों का संरक्षण एवं रखरखाव, जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना, जनजातीय समुदायों के लिए राज्य के अन्य भागों में अध्ययन भ्रमण तथा जनजातीय उत्सवों के आयोजन—के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आवश्यकतानुसार, शीर्ष समिति की स्वीकृति के साथ, टीआरआई को 100% अनुदान सहायता प्रदान की जाती है।
परिशिष्ट-II
लोक सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 6308 दिनांक 02.04.2026 के भाग (क) से (घ) तक के उत्तर में डॉ. टी. सुमथी उर्फ तमिऴाची थंगापांडियन द्वारा पूछे गए “जनजातीय कल्याण योजनाओं का राज्य द्वारा की जर रही पहलों के साथ समन्वय” के संदर्भ में उल्लिखित परिशिष्ट।
हाल के वित्त वर्षों के दौरान इन योजनाओं/कार्यक्रमों के अंतर्गत मंत्रालय द्वारा तमिलनाडु राज्य में किए गए राज्य-वार निधि आवंटन का विवरण निम्नानुसार है:
|
अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत जारी एवं व्यय की गई निधियों का विवरण:
|
|
(करोड़ रु.में)
|
|
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
वित्त वर्ष 2021-22
|
वित्त वर्ष 2022-23
|
वित्त वर्ष 2023-24
|
वित्त वर्ष 2024-25
|
वित्त वर्ष 2025-26
|
|
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
निधि जारी (उपयोग प्रमाण पत्र (यूसी) अभी प्राप्त नहीं)
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
5.47
|
5.47
|
4.04
|
4.04
|
3.62
|
3.62
|
0.60
|
0.60
|
8.13
|
|
अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत जारी एवं उपयोग की गई निधियों का विवरण:
|
|
(करोड़ रु. में)
|
|
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
वित्त वर्ष 2021-22
|
वित्त वर्ष 2022-23
|
वित्त वर्ष 2023-24
|
वित्त वर्ष 2024-25
|
वित्त वर्ष 2025-26
|
|
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि
|
उपयोग की गई निधि
|
जारी की गई निधि (यूसी अभी प्रस्तुत नहीं)
|
|
1
|
तमिल नाडु
|
48.49
|
48.49
|
28.54
|
28.54
|
20.00
|
20.00
|
25.00
|
25.00
|
26.33
|
ईएमआरएस की स्थापना और संचालन के लिए वर्षवार जारी निधियां (28.02.2026 तक):
लाख रु. में
|
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25
|
2025-26
(28.02.2026 तक)
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
1,098.78
|
1,099.80
|
1,738.95
|
2,797.39
|
मल्टी पर्पज कम्युनिटी सेंटर (एमपीसी) के लिए जारी निधियों का विवरण, वर्षवार और राज्यवार (करोड़ रुपये में):
|
राज्य
|
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जारी निधियाँ
|
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान जारी निधियाँ
|
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जारी निधियाँ
|
वित्त वर्ष 2025-26 में एस.एन.ए. स्पर्श पर निपटाए गए बिल
|
|
तमिल नाडु
|
5.2
|
20.67
|
-
|
5.07
|
विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के विकास के तहत वर्षवार और राज्यवार जारी निधियों का विवरण (लाख रु. में):
|
क्रम संख्या
|
राज्य का नाम
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
1967.81
|
907.70
|
0.00
|
2723.11
|
*अस्थायी
पिछले 5 वर्षों के दौरान एससीए के तहत टीएसएस/पीएमएएजीवाई को राज्यवार जारी निधियाँ
(लाख रु. में)
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
पीएमएएजीवाई
|
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
|
जारी निधि
|
जारी निधि
|
जारी निधि
|
जारी निधि
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
285.32
|
285.62
|
855.805
|
461.37
|
*अस्थायी
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना के तहत जारी निधियों की स्थिति:
(लाख रु. में)
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना
|
|
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
2025-26*
|
|
कुल जारी राशि
|
प्राप्त यूसी
|
कुल जारी राशि
|
प्राप्त यूसी
|
कुल जारी राशि
|
प्राप्त यूसी
|
कुल जारी राशि
|
प्राप्त यूसी
|
वित्त वर्ष 2025-26 में एस.एन.ए. स्पर्श पर निपटाए गए बिल
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
285.32
|
251.95
|
285.62
|
211.39
|
855.805
|
854.27
|
461.37
|
0
|
662.44
|
*अस्थायी
|
अनुसूचित जनजातियों के कल्याण हेतु कार्यरत स्वयं-सेवी संगठनों को अनुदान (ग्रांट-इन-एड) के तहत वर्ष 2013-14 से 2025-26 तक जारी निधियों का विवरण (लाख रु. में):
|
|
राज्य
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
2025-26 (12.02.2026 तक*
|
|
तमिलनाडु
|
250.31
|
377.29
|
189.10
|
321.25
|
वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक ‘जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को समर्थन’ योजना के अंतर्गत जारी निधियों का विवरण
(लाख रु. में)
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
जारी निधि
|
|
|
2020-21
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
0.00
|
135.09
|
0.00
|
25.00
|
300.00
|
|
*अस्थायी
संविधान के अनुच्छेद 275(1) की उपधारा के तहत जारी निधियाँ और उपयोग की गई राशि इस प्रकार है (लाख रु. में):
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25*
|
|
|
|
जारी निधि
|
राज्य सरकार द्वारा बताया गया उपयोग
|
जारी निधि
|
राज्य सरकार द्वारा बताया गया उपयोग
|
जारी निधि
|
राज्य सरकार द्वारा बताया गया उपयोग
|
जारी निधि
|
राज्य सरकार द्वारा बताया गया उपयोग
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
0.00
|
0.00
|
0.00
|
1146.26
|
650.49
|
0.00
|
2019.665
|
481.64
|
*अस्थायी
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी निधियों का विवरण (करोड़ रु.में) – 21.01.2026 तक:
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
जारी
|
|
ए
|
बी
|
एफ़
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
2.31
|
|
विलेज डेवेलपमेंट वैनिटी कमिटी (वीडीवीके) की स्थापना के लिए स्वीकृत निधियाँ
|
|
|
|
|
|
|
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
स्वीकृत वीडीवीके की कुल संख्या
|
स्वीकृत निधि (लाख रु. में)
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
8
|
120.00
|
|
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) के तहत वीडीपीके की स्थापना के लिए स्वीकृत निधियाँ
|
|
|
|
|
|
|
क्रम संख्या
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
स्वीकृत वीडीवीके
|
स्वीकृत निधि (लाख रु. में)
|
|
1
|
तमिलनाडु
|
37
|
120.15
|
*****
पीके/केसी/पीके / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2248669)
आगंतुक पटल : 62
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English