रेल मंत्रालय
भारतीय रेलवे ने पिछले तीन वर्षों में यात्रियों की भीड़ प्रबंधन संबंधी सहित विभिन्न सुविधाओं के लिए 34,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि आवंटित की
देश के कुल 76 भीड़भाड़ वाले स्टेशनों में से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में स्थित 23 स्थायी होल्डिंग क्षेत्रों का विकास कार्य जारी है
इस साल आगामी त्योहारों की भीड़ से पहले सीएसटी, बांद्रा टर्मिनस, भोपाल, लखनऊ और वाराणसी जैसे अधिक संख्या में यात्रियों वाले स्टेशनों पर विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है
लोगों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, उन्नत डिजिटल संचार उपकरण, वॉर रूम मॉनिटरिंग और आवश्यकता के आधार पर टिकट बिक्री पर नियंत्रण
प्रविष्टि तिथि:
02 APR 2026 7:14PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ का प्रबंधन कएने के उद्देश्य से निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:
1. भारतीय रेलवे के 76 चिन्हित स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए स्थायी होल्डिंग क्षेत्र बनाना।
- रेल मंत्रालय ने 76 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्मों से भीड़ कम करने के लिए 'पैसेंजर होल्डिंग एरिया' (यात्री प्रतीक्षा क्षेत्र) बनाने की योजना शुरू की है। इन क्षेत्रों को आरामदायक और व्यवस्थित जगहों के तौर पर तैयार किया गया है। इन स्थानों पर बैठने की जगह, पीने का पानी, शौचालय, टिकट की सुविधा, जानकारी दिखाने वाले डिस्प्ले और सुरक्षा जांच जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, ताकि भीड़भाड़ वाले समय में यात्रियों की आवाजाही को आसानी से संभाला जा सके। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर होल्डिंग एरिया पहले ही चालू कर दिया गया है। इससे भीड़ कम हुई है और यात्रियों को अधिक सुविधा मिली है; यहां पर अतिरिक्त टिकट काउंटर, एटीवीएम, पीएएस, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन जानकारी बोर्ड, सीसीटीवी निगरानी, सामान स्कैन करने वाले स्कैनर, डीएफएमडी, बिना रुकावट बिजली की आपूर्ति, बेहतर रोशनी, एचवीएलएस पंखे, आग बुझाने और बिजली गिरने से बचाव के सिस्टम, आरओ से शुद्ध पीने का पानी तथा और पुरुषों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- अन्य स्टेशनों पर भी इसी तरह के प्रावधान योजना और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनकी समय-सीमा में आवश्यकतानुसार बार-बार सुधार किया जा सकता है।
- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में स्थायी होल्डिंग क्षेत्र विकसित करने के लिए पहचाने गए स्टेशनों के नाम इस प्रकार हैं:
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राज्य
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स्टेशनों की संख्या
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स्टेशनों का नाम
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मध्यप्रदेश
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04
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उज्जैन, सीहोर, भोपाल और जबलपुर।
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महाराष्ट्र
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07
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छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, नागपुर,
नासिक रोड, पुणे, दादर और बांद्रा टर्मिनल्स।
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उत्तर प्रदेश
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12
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पं. दीन दयाल उपाध्याय, ग़ाज़ियाबाद,
लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या धाम, कानपुर,
वीरांगना लक्ष्मी बाई झाँसी, मथुरा, आगरा कैंट, गोरखपुर, लखनऊ जंक्शन, बनारस।
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2. पहुंच नियंत्रण
यहां पर पूरी तरह से पहुंच नियंत्रण की सुविधा दी जा रही है, जिससे कन्फर्म आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को सीधे प्लेटफॉर्म पर जाने की अनुमति होगी, जबकि बिना टिकट वाले या वेटिंग लिस्ट टिकट वाले यात्रियों को बाहर बने निर्धारित वेटिंग एरिया में ठहराया जाएगा। यहां पर पूरी तरह से पहुंच नियंत्रण की सुविधा दी जा रही है, जिसके तहत जिन यात्रियों के पास कन्फर्म आरक्षित टिकट हैं, उन्हें सीधे प्लेटफॉर्म पर जाने की अनुमति होगी; जबकि जिन यात्रियों के पास टिकट नहीं है या जिनके पास वेटिंग लिस्ट का टिकट है, उन्हें होल्डिंग एरिया में इंतज़ार करना होगा।
3. चौड़े फुट-ओवर-ब्रिज (एफओबी): 12 मीटर (40 फीट) और 6 मीटर (20 फीट) चौड़ाई वाले स्टैंडर्ड एफओबी के दो नए डिज़ाइन तैयार किए गए हैं। ये नए, चौड़े और स्टैंडर्ड एफओबी सभी स्टेशनों पर लगाए जाएंगे।
4. सीसीटीवी कैमरे: रेलवे स्टेशनों और आस-पास के इलाकों में बड़ी संख्या में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि बारीकी से निगरानी की जा सके और भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
5. वॉर रूम: बड़े स्टेशनों पर वॉर रूम बनाए जा रहे हैं, जहां सभी विभागों के अधिकारी मिलकर काम करेंगे, ताकि भीड़-भाड़ वाली स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।
6. नई पीढ़ी के संचार उपकरण: अधिक भीड़ वाले सभी स्टेशनों पर वॉकी-टॉकी, घोषणा प्रणाली और कॉलिंग प्रणाली जैसे आधुनिक डिजाइन वाले डिजिटल संचार उपकरण लगाए जाएंगे।
7. नए डिजाइन का आईडी कार्ड: स्टेशन में नियंत्रित और सुरक्षित प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए सभी कर्मचारियों और सेवा कर्मियों को नए डिज़ाइन वाले क्यूआर-आधारित आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे।
8. कर्मचारियों के लिए नए डिजाइन की वर्दी: सभी कर्मचारियों को नए डिजाइन की वर्दी दी जाएगी, ताकि संकट की स्थिति में उनकी आसानी से पहचान की जा सके।
9. स्टेशन डायरेक्टर के पद का उन्नयन: सभी बड़े स्टेशनों पर एक सीनियर अधिकारी को स्टेशन डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। उन्हें स्टेशन में सुधार के लिए मौके पर ही फैसले लेने की वित्तीय शक्ति दी जाएगी। सभी दूसरे विभाग सीधे स्टेशन डायरेक्टर को रिपोर्ट करेंगे, ताकि एक ही कमांड और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
10. क्षमता के हिसाब से टिकटों की बिक्री: स्टेशन डायरेक्टर को स्टेशन की क्षमता और उपलब्ध ट्रेनों के हिसाब से टिकटों की बिक्री को कंट्रोल करने का अधिकार होगा। साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान, यात्रियों की सुविधाओं के लिए क्रमशः 9392 करोड़ रुपये, 12884 करोड़ रुपये और 12018 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इसमें भीड़ के आधारभूत ढांचा पर होने वाला खर्च भी शामिल है।
यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में दी।
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पीके/केसी/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2248770)
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