आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सस्ते आवास उपलब्ध कराने हेतु एमपीडी-2021 में पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) नीति और पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) एवं शुल्क संबंधी विनियम, 2026


पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) और शुल्क विनियम, 2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासन (ट्रांजिट-लिंक्ड) संबंधी शहरी विकास को बढ़ावा देने के इस दृष्टिकोण पर आधारित है: श्री मनोहर लाल

पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) नीति के अंतर्गत, मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में योजनाबद्ध, उच्च घनत्व और मिश्रित उपयोग संबंधी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा: श्रीमती रेखा गुप्ता

वर्तमान नीति में कॉरिडोर आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है और इससे 207 वर्ग किलोमीटर (मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के 500 मीटर के दायरे) का क्षेत्र मुख्य रूप से योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए खुलेगा


प्रविष्टि तिथि: 07 APR 2026 3:33PM by PIB Delhi

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) की अवधारणा की परिकल्पना दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में पहले ही की जा चुकी है और पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) और शुल्क संबंधी विनियम, 2026 इसी दृष्टिकोण पर आधारित है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासन से संबंधित शहरी विकास को बढ़ावा देना है ताकि पहुंच में सुधार हो और बड़े पैमाने पर सस्ते आवासों का निर्माण संभव हो सके।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से ये परिवर्तनकारी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण का साक्षी बन रही है जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

वहीं, श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच के अनुरूप दिल्ली के भविष्य को और मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) नीति के अंतर्गत, मेट्रो और आरआरटीएस गलियारों के 500 मीटर के दायरे में लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध, उच्च घनत्व और मिश्रित उपयोग की दृष्टि से विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इससे सस्ते आवास, आवागमन के लिए बेहतर संपर्क और सुगमतापूर्वक जीवन-यापन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह पहल विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण रूप से सहायक सिद्ध होगी।

नई नीति के माध्यम से दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सस्ते आवास और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना की उपलब्धता और सघन मिश्रित उपयोग विकास के माध्यम से भूमि का यथासंभव उपयोग सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी ताकि वर्तमान और भविष्य में बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को लाभ हो।

वर्तमान नीति में कॉरिडोर आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है और इसके अंतर्गत 207 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में (मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के 500 मीटर के दायरे में) मुख्य रूप से योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से सस्ते आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इस 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से लगभग 80 वर्ग किलोमीटर का वह क्षेत्र जो भूमि पूलिंग, कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र और अनधिकृत कॉलोनियों के अंतर्गत आता है जिसे पिछली टीओडी नीति में शामिल नहीं किया गया था, उसे अब नई टीओडी नीति के दायरे में लाया गया है।

इस नीति में लचीलापन है जिससे चालू तथा प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर/आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के साथ-साथ टीओडी विकास हो सकता है। इससे टीओडी विकास नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के अनुरूप हो सकेगा। ऐसे क्षेत्रों में नए सस्ते आवास और उनसे संबंधित बुनियादी ढांचे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए जा सकेंगे। इससे मेट्रो के यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी और उनका बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित होगा।

इस नीति से टीओडी प्रावधानों के अंतर्गत 2000 वर्ग मीटर के छोटे आकार के भूखंडों का विकास संभव होगा।

2000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के भूखंडों पर 18 मीटर चौड़ी सड़क के साथ टीओडी क्षेत्र में अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक के एफएआर की स्वीकृति है। इसमें से स्वीकृति योग्य कुल एफएआर का 65% अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है जिसमें 100 वर्ग मीटर ( 99 वर्ग मीटर) के निर्मित क्षेत्र वाली आवासीय इकाइयां शामिल हैं ताकि मेट्रो कॉरिडोर के साथ सस्ते आवास उपलब्ध हो सकें।

इस नीति में उच्च घनत्व वाली, मिश्रित उपयोग वाली योजनाबडद्ध विकास परियोजना की परिकल्पना की गई है जिसका विशेष उद्देश्य सभी मेट्रो गलियारों के साथ सस्ते आवासों का निर्माण करना है।

शेष 35% एफएआर में से 10% का उपयोग आवासीय क्षेत्र के लिए वाणिज्यिक और अन्य सुविधाओं के प्रावधान के उद्देश्य से किया जाएगा। लचीले रूप से 25% एफएआर का उपयोग बड़े आकार के आवास, कार्यालय स्थान,  अतिथि गृह और स्टूडियो अपार्टमेंट के निर्माण के लिए किया जा सकता है।

प्रस्तावित भूखंडों में रहने वाले निवासियों की सुविधा और पैदल चलने में सुगमता को बढ़ाने के लिए और सार्वजनिक परिवहन/मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने के लिए नए भूमिगत/ऊंचे पैदल मार्ग उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

टीओडी क्षेत्र में आने वाले सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक भूखंडों में बढ़े हुए एफएआर के माध्यम से सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं में वृद्धि की जाएगी।

इस नीति में पिछली नीति में मौजूद कमियों को दूर किया गया है और निम्नलिखित संदर्भों में व्यापार करने में सुगमता (ईओडीबी) को बढ़ावा दिया गया है:

    1. किसी भी विकास परियोजना (टीओडी) संबंधी नोड की घोषणा के लिए न्यूनतम 8 हेक्टेयर विकास योग्य भूमि की आवश्यकता वाले नोड-आधारित दृष्टिकोण को कॉरिडोर-आधारित दृष्टिकोण से बदल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, कॉरिडोर चालू या प्रस्तावित हो सकता है।
    2. पिछली नीति के अनुसार भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 1 हेक्टेयर होना आवश्यक था। अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक का कृषि उपयोग अधिकार (एफएआर) केवल 4 हेक्टेयर के न्यूनतम क्षेत्रफल वाले और 30 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित भूखंडों पर ही स्वीकृत था। अब यह 2000 वर्ग मीटर के छोटे भूखंडों पर भी 18 मीटर चौड़ी सड़क पर स्वीकृत है।
    3. वर्तमान नीति में टीओडी भूखंडों के भूमि उपयोग के आधार पर मिश्रित उपयोग का प्रावधान हटा दिया गया है।
    4. पिछली नीति के अनुसार, टीओडी परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले प्रत्येक टीओडी नोड के लिए प्रभाव क्षेत्र योजना (आईज़ेडपी) तैयार करना अनिवार्य था। इसके बाद टीओडी परियोजनाओं को स्थानीय निकायों की ओर से स्वीकृति दिया जाना आवश्यक था। अब व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए इसे एकल खिड़की प्रणाली से बदल दिया गया है।
    5. पिछली नीति के अंतर्दगत, डीई को डीडीए/स्थानीय निकाय को विभिन्न शुल्क जैसे टीओडी शुल्क, अतिरिक्त एफएआर शुल्क ( स्वीकृत एफएआर से अधिक एफएआर के लिए), लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए शुल्क का भुगतान करना पड़ता था। वर्तमान नीति के अंतर्गत इसे सरल और एकल टीओडी शुल्क से बदल दिया गया है।

यह नीति एकल खिड़की आवेदन और स्वीकृति के माध्यम से व्यापार करने में सुगमता (ईओडीबी) को बढ़ावा देती है जिसमें टीओडी परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए सरलीकृत प्रक्रिया शामिल है। डीडीए के उपाध्यक्ष के अधीन टीओडी समिति में सेवा प्रदाता एजेंसियों सहित सभी संबंधित हितधारक शामिल हैं ताकि टीओडी परियोजनाओं की समयबद्ध और सुचारू रूप से स्वीकृति सुनिश्चित की जा सके। अपनी भूमि का विकास करने के इच्छुक नागरिकों को एमसीडी, डीजेबी, डीएफएस आदि जैसी किसी भी सेवा प्रदाता एजेंसी से अलग से संपर्क करने की आवश्यकता के बिना केवल एक ही स्थान पर शुल्क के साथ स्वीकृति के लिए आवेदन करना होगा । यह नीति समयबद्ध स्वीकृति प्रदान करती है।

इस नीति के तहत टीओडी शुल्कों को सरल बनाया गया है और एक ही टीओडी शुल्क प्रस्तावित किया गया है (जिसमें डीजेबी के जल और सीवरेज शुल्क, एमसीडी के स्वीकृत शुल्क, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क और पट्टे से मुक्त स्वामित्व में रूपांतरण के लिए लगाए गए शुल्क/अतिरिक्त शुल्क/अतिरिक्त एफएआर सहित शुल्क और डीडीए शुल्क शामिल हैं)।

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पीके/केसी/केके/एनजे


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