मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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हरियाणा के सिरसा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत अधिसूचित खारा जल मत्स्यपालन क्लस्टर की स्थिति की समीक्षा की जाएगी

प्रविष्टि तिथि: 08 APR 2026 4:10PM by PIB Delhi

केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 8 अप्रैल, 2026 को हरियाणा के सिरसा जिले का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य पीएमएमएसवाई के तहत अधिसूचित खारा जल मत्स्यपालन क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा करना और क्षेत्र में खारा जल मत्स्यपालन में लगे झींगा पालकों से बातचीत करना था। इस दौरे में केंद्रीय सचिव ने झींगा और मछली पालकों से भी बातचीत की ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों और चुनौतियों को समझा जा सके।

मछली पालकों को संबोधित करते हुए डॉ. लिखी ने उत्पादकता, उत्पाद की गुणवत्ता और समग्र लाभप्रदता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित झींगा पालन पद्धतियों, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन और सुदृढ़ जैव सुरक्षा उपायों के साथ-साथ सतत क्षमता विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सिरसा जैसे खारे जल से प्रभावित क्षेत्रों में झींगा पालन के माध्यम से भूमि के सर्वोत्तम उपयोग की अपार संभावनाएं हैं, जो आय विविधीकरण, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। एमपीईडीए को निर्यात संबंध स्थापित करने और किसानों के लिए क्षमता निर्माण में सहायता हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने की सलाह दी गई। यह भी बताया गया कि परीक्षण किटों की सुगम उपलब्धता आवश्यक है, और राज्य से आग्रह किया गया कि वे स्थानीय स्तर पर इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि झींगा पालकों को परीक्षण के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास पहलों के समग्र कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा के लिए चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू), सिरसा में हाइब्रिड मोड में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। चर्चा में प्राप्त प्रगति, अंतर-संस्थागत समन्वय, योजनाओं के समन्वय और क्लस्टर स्तर पर कार्यान्वयन संबंधी कमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में केंद्रीय मत्स्य विभाग और हरियाणा सरकार के मत्स्य विभाग के अधिकारी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य क्लस्टरों के प्रतिनिधि, आईसीएआर मत्स्य संस्थानों के वैज्ञानिक और एनएफडीबी, आईसीएआर-सीआईएफई, एमपीईडीए, नाबार्ड, मछली पालकों, झींगा पालकों, मत्स्य सहकारी समितियों, मत्स्य विश्वविद्यालयों और मत्स्य कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान, झींगा पालकों ने बिजली की उच्च लागत और अनियमित उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता और अपर्याप्त जल आपूर्ति सहित कई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि झींगा पालन गतिविधियों के विस्तार में सहयोग के लिए पंचायत के स्वामित्व वाली भूमि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को पट्टे पर उपलब्ध कराई जाए।

 

 

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने हरियाणा के सिरसा जिले के रघुआना गांव में श्री प्रीतपाल सिंह और श्रीमती मनप्रीत कौर के झींगा फार्म का दौरा किया, जिसे पीएमएमएसवाई के तहत विकसित किया गया है। यह फार्म लगभग 3 हेक्टेयर में फैले 7 तालाबों से मिलकर बना है और इसकी कुल परियोजना लागत 42 लाख रुपये है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 28 टन झींगा का उत्पादन होता है, जिससे लगभग 90 लाख रुपये का कारोबार होता है और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। खारा जल मत्स्यपालन की पद्धतियों को जमीनी स्तर पर अपनाने का आकलन करने के लिए झींगा पालकों के साथ बातचीत की गई। खारे पानी के अंतर्देशीय क्षेत्रों में झींगा पालन के सतत विस्तार को समर्थन देने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और चारा की उपलब्धता, बेहतर फार्म अवसंरचना और संगठित बाजारों तक पहुंच सहित पिछड़े और अग्रगामी संबंधों को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।

 

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत हरियाणा ने उल्लेखनीय प्रगति की है और 760.88 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 262.17 करोड़ रुपये है। अंतर्देशीय मत्स्यपालन की क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुल 79.47 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 456 आरएएस और बायोफ्लॉक प्रणालियां स्थापित की गई हैं। अब तक, 176.32 करोड़ रुपये की कुल लागत से 3,766 हेक्टेयर के तालाब, 2,204 हेक्टेयर के खारे और क्षारीय जल क्षेत्र के लिए परियोजनाएं निर्धारित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में मत्स्यपालन के विकास को बढ़ावा देने के लिए 98.90 करोड़ रुपये की लागत से एक एकीकृत एक्वापार्क को मंजूरी दी गई है।

उपायुक्त ने सिरसा में 110 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत एक्वापार्क की स्थापना की घोषणा की, साथ ही कटाई के बाद की प्रक्रिया और मूल्यवर्धन को मजबूत करने के लिए शीत भंडारण अवसंरचना के विकास की भी घोषणा की। जिला मजिस्ट्रेट ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार मत्स्य पालन क्लस्टर को और अधिक मजबूत तथा सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी।

झींगा भारत का प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यात बना हुआ है, और 2024-25 के दौरान देश के समुद्री उत्पादों के निर्यात में जमे (फ्रोजन) झींगे का मूल्य लगभग 69 प्रतिशत रहा। पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है, जो 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें मुख्य योगदान 43,334 करोड़ रुपये मूल्य के झींगे के निर्यात का रहा है। गौरतलब है कि भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र को लगभग 658 प्रसंस्करण संयंत्रों, 532 पूर्व-प्रसंस्करण इकाइयों और ताजी, ठंडी, जीवित, सूखी और नमकीन मछलियों के लिए व्यापक प्रबंधन केंद्रों के नेटवर्क के साथ-साथ देश भर में 734 से अधिक शीत भंडारण सुविधाओं से मदद मिलती है।

केंद्रीय मत्स्य विभाग ने प्रमुख क्षेत्रों में 34 मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टरों को अधिसूचित किया है, जिनमें हज़ारीबाग में मोती क्लस्टर, लक्षद्वीप में समुद्री शैवाल, मदुरै में सजावटी मत्स्य पालन, झारखंड में मोती क्लस्टर, मध्य प्रदेश में जलाशय मत्स्य पालन, गुजरात और पुदुचेरी में मछली पकड़ने के बंदरगाह, सिरसा, पंजाब और राजस्थान में खारे पानी में जलीय कृषि, जम्मू एवं कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में ठंडे पानी में मत्स्य पालन, कर्नाटक में समुद्री पिंजरा संस्कृति (मछली पालन का तरीका), आंध्र प्रदेश में खारे-मीठे पानी का मत्स्य पालन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में टूना, छत्तीसगढ़ में तिलापिया, सिक्किम और मेघालय में जैविक मत्स्य पालन, बिहार में आर्द्रभूमि मत्स्य पालन, तेलंगाना में मुरैल, केरल में पर्ल स्पॉट, ओडिशा में स्कैम्पी, उत्तर प्रदेश में पैंगासियस, पश्चिम बंगाल में सूखी मछली क्लस्टर, नागालैंड में एकीकृत मछली पालन क्लस्टर, मणिपुर में पेंगबा मछली क्लस्टर, असम में नदी-आधारित मछली क्लस्टर, मिजोरम में धान-सह-मछली क्लस्टर, अरुणाचल प्रदेश में जलीय पर्यटन क्लस्टर, गोवा में मुहाना पिंजरा क्लस्टर, त्रिपुरा में पाबदा मत्स्य पालन क्लस्टर और महाराष्ट्र में मत्स्य सहकारी क्लस्टर शामिल हैं।

सिरसा जिले में खारा जल मत्स्यपालन का यह समूह फतेहाबाद, हिसार और रोहतक के साथ भागीदार जिलों के रूप में यह दर्शाता है कि किस प्रकार क्षेत्र-विशिष्ट मत्स्य पालन विकास खारे और क्षारीय क्षेत्रों की उत्पादक क्षमता को उजागर कर सकता है। झींगा, स्कैम्पी और सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों में विविधता को बढ़ावा देकर, यह समूह संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करता है, साथ ही किसानों की आय बढ़ाता है, स्थानीय रोजगार सृजित करता है और बाजार संबंधों को मजबूत करता है।

पृष्ठभूमि -

भारत का अंतर्देशीय मत्स्यपालन क्षेत्र राष्ट्रीय मछली उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। इसका कुल उत्पादन में 75 प्रतिशत का योगदान है। वित्त वर्ष 2024-25 में अंतर्देशीय मछली उत्पादन 153 लाख मीट्रिक टन रहा। 2013-14 और 2024-25 के बीच अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 61 लाख टन से बढ़कर 153 लाख टन हो गया। इस वृद्धि ने भारत के कुल राष्ट्रीय मछली उत्पादन को 197.75 लाख टन तक पहुंचा दिया है, जो इसी अवधि में 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

भारत में अंतर्देशीय जल संसाधनों की अपार क्षमता है और इसका अभी तक पूरी तरह से दोहन नहीं किया गया है। 1.95 लाख किलोमीटर नदियों और नहरों, 6.06 लाख हेक्टेयर खारे पानी, 3.65 लाख हेक्टेयर बील और ऑक्सबो झीलों, 27.56 लाख हेक्टेयर तालाबों और पोखरों तथा 31.53 लाख हेक्टेयर जलाशयों के साथ, सतत अंतर्देशीय मत्स्यपालन विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने अंतर्देशीय मत्स्यपालन को इस क्षेत्र के लिए अपनी रणनीतिक दृष्टि के केंद्र में रखा है।

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पीके/केसी/एवाई/एसएस


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