सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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​​ सड़क सुरक्षा जागरूकता एक राष्ट्रीय आंदोलन है जिसके लिए सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से जिम्मेदार व्यवहार की आवश्यकताः राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा


श्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने पीएचडीसीसीआई उत्तराखंड एडवेंचर राइड के तीसरे संस्करण को झंडी दिखाकर रवाना किया, सड़क सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की

प्रविष्टि तिथि: 09 APR 2026 4:54PM by PIB Delhi

सड़क परिवहन तथा राजमार्ग एवं कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता पहल केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि देश भर में जिम्मेदार सड़क उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन के अभिन्न अंग हैं।

श्री मल्होत्रा ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित उत्तराखंड एडवेंचर राइड के तीसरे संस्करण को झंडी दिखाकर सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

श्री मल्होत्रा ​​ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत ने सड़क अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी और आचरण पर निर्भर करता है।

उन्होंने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड एडवेंचर राइड के सफल आयोजन और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने के लिए पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल साहसिक पर्यटन को जन जागरूकता के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण संदेश को व्यापक रूप से पहुंचाया जा सकता है।

श्री मल्होत्रा ​​ने इस चुनौती की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई हैं, जिनमें प्रतिवर्ष लगभग 1.8 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन दुर्घटनाओं में से लगभग 45 प्रतिशत दोपहिया वाहनों से संबंधित होती हैं, जो चालकों के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से, सड़क सुरक्षा के राजदूत के रूप में कार्य करने और उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

सरकार के सक्रिय और व्यापक दृष्टिकोण को दोहराते हुए, श्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने मंत्रालय की 4ई रणनीति—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभालके बारे में विस्तार से बताया, जो भारत के सड़क सुरक्षा ढांचे की आधारशिला है। उन्होंने सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुधारने, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 जैसे विधायी उपायों के माध्यम से प्रवर्तन को सुदृढ़ करने और देशव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को बढ़ाने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता पहुंचाने के लिए पीएम राहत योजना और राह-वीर योजना जैसी कई नागरिक-केंद्रित पहलें शुरू की गई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मृत्यु दर को कम करने और दुर्घटना के बाद देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण समाज का निर्माण करना आवश्यक है।

युवाओं की सहभागिता पर दिए जा रहे बल की सराहना करते हुए श्री मल्होत्रा ​​ने कहा कि संवादात्मक सत्रों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में सड़क अनुशासन की दीर्घकालिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कम उम्र से ही जिम्मेदार ड्राइविंग की आदतें विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और हेलमेट के बिना वाहन चलाना, तेज गति से वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना और कम उम्र में वाहन चलाना जैसे जोखिम भरे व्यवहारों से बचने का आग्रह किया।

श्री मल्होत्रा ​​ने सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए टिप्पणी की:

हेलमेट पहनना कोई विकल्प नहीं है, यह सुरक्षा का साधन है।

"गति शक्ति नहीं, जोखिम है।"

"जीवन महत्वपूर्ण है—सुरक्षा से बढ़कर कोई और जरूरी पुकार नहीं है।"

प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री मल्होत्रा ​​ने सड़क सुरक्षा परिणामों में सुधार लाने में एआई-आधारित यातायात निगरानी प्रणालियों, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस), स्वचालित प्रवर्तन तंत्र और फास्टैग-सक्षम निर्बाध गतिशीलता के उपयोग का उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्थक और स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकीय प्रगति के साथ-साथ जिम्मेदार मानवीय व्यवहार भी आवश्यक है।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, सरकारी मंत्रालयों, कंपनियों और मोटरसाइकिल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 सवारों ने भाग लिया। श्री मल्होत्रा ​​ने उनके समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की बहु-हितधारक भागीदारी सुरक्षित सड़कों के निर्माण की दिशा में एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास को दर्शाती है।

अपने संबोधन के समापन करते हुए श्री मल्होत्रा ने सभी नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, जिम्मेदारी से वाहन चलाने और अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सरकार, संस्थानों और नागरिकों के निरंतर एवं सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता है।

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पीके/केसी/एसकेजे/केएस


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