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प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की; 200वीं जयंती समारोहों का शुभारंभ किया


प्रधानमंत्री ने सामाजिक समानता और सशक्‍तीकरण के एक मार्गदर्शक के रूप में महात्मा फुले की भूमिका को रेखांकित करते हुए एक लेख में अपने विचार साझा किए

प्रविष्टि तिथि: 11 APR 2026 9:14AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी समाज सुधारक बताया, जिन्होंने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि महात्मा फुले महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के पक्षधर के रूप में अग्रणी थे तथा उनके प्रयासों से शिक्षा सशक्‍तीकरण का एक प्रभावी माध्यम बनी। श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस वर्ष महान समाज सुधारक की 200वीं जयंती समारोहों का महत्वपूर्ण शुभारंभ हो रहा है। इस अवसर को चिह्नित करने के लिए प्रधानमंत्री ने एक लेख लिखकर साझा किया कि महात्मा फुले आज भी अनेक लोगों के लिए प्रेरणापुंज हैं और शिक्षा, ज्ञान तथा जन कल्‍याण पर उनका जोर आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। श्री मोदी ने आगे कामना की कि उनके विचार समाज की प्रगति के प्रयासों में सभी का मार्गदर्शन करते रहें।

एक्स पर पोस्टों की एक श्रृंखला में प्रधानमंत्री ने लिखा:

“महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर एक दूरदर्शी समाज सुधारक को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित किया। वे महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के अग्रणी पक्षधर भी थे। उनके प्रयासों से शिक्षा सशक्‍तीकरण का एक प्रभावी माध्यम बनी। इस वर्ष हम उनकी 200वीं जयंती समारोहों की शुरुआत कर रहे हैं। उनके विचार समाज की प्रगति के प्रयासों में सभी का मार्गदर्शन करते रहें।”

"महात्मा ज्योतिराव फुले यांच्या जयंतीदिनी, समता, न्याय आणि शिक्षण या मूल्यांसाठी आपले जीवन समर्पित करणाऱ्या या द्रष्ट्या समाजसुधारकाला अभिवादन करतो. महिला आणि उपेक्षितांच्या हक्कांचा लढा सुरु करणारेही तेच होते. त्यांच्या प्रयत्नांमुळे शिक्षण हे सक्षमीकरणाचे एक शक्तिशाली साधन बनले."

“महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोहों की शुरुआत के अवसर पर मैंने कुछ विचार लिखे हैं कि वे किस प्रकार वे अनेक लोगों के लिए आज भी प्रेरणापुंज बने हुए हैं और शिक्षा, ज्ञान तथा जन कल्याण पर उनका जोर आज के समय में भी प्रासंगिक है।”

"आपण महात्मा फुले यांच्या जयंतीच्या द्विशताब्दी वर्षात पाऊल ठेवत असल्याच्या पार्श्वभूमीवर, ते कशा प्रकारे अनेक लोकांसाठी मार्गदर्शक दीपस्तंभ ठरले आहेत तसेच त्यांनी शिक्षण, अध्ययन आणि सर्वांच्या कल्याणावर दिलेला भर आजच्या युगातही कसा समर्पक आहे, याबद्दलचे काही विचार लेखणीतून उतरवले"

महान समाज सुधारक महात्मा फुले की 200वीं जयंती वर्ष के समारोहों का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान और जन कल्याण को समर्पित कर दिया। वे कैसे आज भी करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बने हुए हैं, इसी को लेकर मैंने इस आलेख में अपने विचार रखे हैं।

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पीके/केसी/पीके


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