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इंडिया फार्मा 2026 ने चार प्रमुख पूर्ण सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय बदलाव को प्रदर्शित किया


इंडिया फार्मा 2026 में नीति, विनियमन, एआई और सीआरडीएमओ पर विशेष ध्यान दिया गया

प्रविष्टि तिथि: 13 APR 2026 8:34PM by PIB Delhi

नौवें इंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन चार महत्वपूर्ण पूर्ण सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, नियामकों एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भारत के औषधि एवं जीव विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक साथ मिलकर चर्चा की। इन चर्चाओं में नीतिगत समर्थन, नियामक परिवर्तन और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को अपनाकर नवाचार को तेज करने पर एक मजबूत सहमति बनी।

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उद्घाटन पूर्ण सत्र का विषय “नवाचार को उत्प्रेरित करने के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश” था जिसमें नीतिगत मंशा एवं जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच के अंतर को पाटने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। श्री मनोज जोशी, सचिव, औषधि विभाग ने अनुसंधान एवं विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले मॉडल पर बल दिया, साथ ही उन्होंने सरकारी प्रयोगशाला नेटवर्क को मजबूत करने के महत्व एवं नियामक मॉडल को यूरोपीय प्रणालियों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने कहा कि हालांकि हाल के वर्षों में अनुसंधान वित्तपोषण में कई गुना वृद्धि हुई है लेकिन देश को नवाचारकों में बाजार का आत्मविश्वास और उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच बढ़े हुए विश्वास के साथ भारत मॉडल के अनुसंधान एवं विकास की आवश्यकता है। उद्योग जगत के नेताओं ने अनुसंधान-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए वेंचर कैपिटल की भागीदारी और सह-वित्तपोषण तंत्रों में वृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने और प्रारंभिक चरण की खोजों को वैश्विक समाधानों में बदलने के लिए एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व की बात की। सत्र का समापन "भारत में खोज करें" और देश को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करें जैसे आह्वानों के साथ हुआ।

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दूसरे पूर्ण सत्र का आयोजन “नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नियामक पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाना” विषय पर हुआ जिसमें एक पूर्वानुमानित, कुशल और वैश्विक स्तर पर संरेखित नियामक संरचना के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया। डॉ. राजीव सिंह राघुवंशी, भारत के औषधि महानियंत्रक ने प्रतिक्रियाशील नियामक प्रणालियों को आकार देने में हितधारकों से परामर्श के महत्व को उजागर किया। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी लाने, एकल-खिड़की मंजूरी तंत्र स्थापित करने एवं वैश्विक स्तर पर ज्यादा सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया ताकि दोहराव में कमी लाई जा सके और मरीजों तक पहुंच को तेज किया जा सके। उद्योग जगत के नेताओं ने नियामकों एवं उद्योग के बीच डिजिटल सशक्तिकरण और निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। सत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भविष्य के लिए तैयार नियामक पारिस्थितिकी तंत्र अगली पीढ़ी की चिकित्सा पद्धतियों को विकसित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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तीसरे पूर्ण सत्र का आयोजन "विघटनकारी नवाचार के लिए एआई और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों का उपयोग" विषय पर हुआ जिसमें औषधि मूल्य श्रृंखला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता का पता लगाया गया। फार्मा जगत के नेताओं ने मौजूदा प्रणाली का केवल डिजिटलीकरण करने के बजाय प्रक्रियाओं को पुनः परिभाषित करने पर बल दिया। उन्होंने बड़े पैमाने पर एआई को अपनाने में सक्षम बनाने के लिए मजबूत डेटा एवं तकनीकी नींव के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और नैदानिक दक्षता में सुधार लाने के लिए स्वचालन के तत्काल लाभों पर बल दिया। सत्र का समापन एक भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने सहमति व्यक्त किया कि एआई दवा खोज में तेजी लाने, सटीक चिकित्सा की सुविधा प्रदान करने और एक स्मार्ट, नवाचार-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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चौथे पूर्ण सत्र का आयोजन “भारत की सीआरडीएमओ क्षमता को उजागर करना” विषय पर हुआ जिसमें वैश्विक अनुबंध अनुसंधान, विकास एवं विनिर्माण संगठन (सीआरडीएमओ) परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। पैनल ने पाया कि भारत का सीआरडीएमओ उद्योग, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग 8 अरब डॉलर है, वैश्विक आउटसोर्सिंग की मजबूत मांग को देखते हुए 10-12 प्रतिशत की तीव्र गति से बढ़ रहा है। उद्योग जगत के नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत की अनुसंधान, विकास एवं विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में गति एक महत्वपूर्ण कारक होगी और उन्होंने सीआरडीएमओ पारिस्थितिकी तंत्र को नया रूप देने में एआई और डिजिटल ट्विन सहित डिजिटल प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। सत्र का समापन जटिल पद्धतियों और आउटसोर्स फार्मा सेवाओं में वैश्विक विकास के अगले चरण का नेतृत्व करने के लिए भारत के लिए आवश्यक रणनीतिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ किया गया।

कुल मिलाकर, इंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन के पूर्ण सत्रों ने भारत की वैश्विक औषधीय नवाचार के अगले चरण का नेतृत्व करने की तत्परता को मजबूत किया, जो नीति की दिशा, नियामक लचीलापन एवं तकनीकी उन्नति द्वारा संचालित है।

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पीके/केसी/एके


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