जल शक्ति मंत्रालय
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 7वें जिला कलेक्टर 'पेयजल संवाद' का आयोजन किया
'जल जीवन मिशन' और 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण' के तहत जिलों ने सामुदायिक जुड़ाव, जल स्रोत पुनरुद्धार, स्मार्ट यूटिलिटीज और धूसर जल (ग्रे-वाटर) प्रबंधन में नए तरीके अपनाये
प्रविष्टि तिथि:
15 APR 2026 4:52PM by PIB Delhi
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'जिला कलेक्टरों का पेयजल संवाद' का 7वां संस्करण आयोजित किया। इस संवाद में वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, उपायुक्तों और मिशन निदेशकों ने एक साथ मिलकर 'जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0' और 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम- जी) चरण 2' के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने पर विचार-विमर्श किया।
इस संवाद की अध्यक्षता 'जल जीवन मिशन' के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने की, जिसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन, एसबीएम-जी की संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक श्रीमती ऐश्वर्या सिंह, तथा डीडीडब्ल्यूएस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अपने संबोधन में,पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसके तहत 'जल जीवन मिशन' के अंतर्गत हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित नल का पानी उपलब्ध कराना और 'स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)' के तहत गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित करना शामिल है। बैठक की रूपरेखा तैयार करते हुए, उन्होंने जिला कलेक्टरों के 'पेयजल संवाद' को नए विचारों को साझा करने के लिए एक जीवंत और प्रभावी मंच बताया।
श्री अशोक के.के. मीणा ने आगे कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता अब जल आपूर्ति योजनाओं की कार्यक्षमता और प्रदर्शन से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने "जल अर्पण" की शुरुआत पर प्रकाश डाला, जिसके तहत गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए 15 दिनों के अनिवार्य परीक्षण के बाद, पूरी हो चुकी जल आपूर्ति संपत्तियों को ग्राम पंचायतों को व्यवस्थित रूप से सौंप दिया जाता है। उन्होंने 'जल सेवा आकलन' का भी उल्लेख किया, यह एक नयी व्यवस्था है जिसके माध्यम से लोग और ग्राम पंचायतें पीने के पानी की आपूर्ति की गुणवत्ता और सेवा स्तर का स्व-मूल्यांकन कर सकते हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर 'सुजला गांव आईडी' और 'सुजलम भारत ऐप' के माध्यम से जल संपत्तियों के डिजिटल फुटप्रिंट (डिजिटल रिकॉर्ड) बनाने के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने जिला कलेक्टरों से इन पहलों की प्रभावी निगरानी और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने और ग्राम पंचायत स्तर पर आईडी बनाने का आग्रह किया। उन्होंने 'हर घर जल' प्रमाणीकरण में तेजी लाने, संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) नीतियों को सख्ती से लागू करने और ग्रामीण जलापूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
'जल सेवा आकलन' और जिला सुधार योजना पर डीडीडब्ल्यूएस का प्रेजेंटेशन
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की उप-सचिव, श्रीमती अंकिता चक्रवर्ती द्वारा जल सेवा आकलन और जिला सुधार योजना पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल द्वारा 30 दिसंबर 2025 को ई-लॉन्च किया गया 'जल सेवा आकलन', ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के लिए देशव्यापी ग्राम पंचायत-आधारित कार्यक्षमता मूल्यांकन तंत्र स्थापित करता है।
श्रीमती अंकिता चक्रवर्ती ने इसके विस्तृत ढांचे (फ्रेमवर्क) का विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें ग्राम पंचायत मूल्यांकन फॉर्म (ग्राम सभा के बाद ई-ग्राम स्वराज लॉगिन का उपयोग करके पंचायत सचिवों द्वारा जल जीवन मिशन-एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली पर गांव-स्तरीय डेटा प्रविष्टि), जिला तकनीकी इकाई (डीटीयु) समीक्षा फॉर्म (प्रतिकूल फीडबैक का तकनीकी निदान, जिसकी समय सीमा 20 अप्रैल 2026 है), जिला सुधार योजना (डीआईपी) जिसमें पूर्व-निर्धारित समाधानों और समयबद्ध कार्रवाइयों के साथ ऑटो-एकत्रित डेटा शामिल हैं। इसके लिए 90 प्रतिशत ग्राम पंचायत फॉर्म, डीटीयु पूर्णता और डीडब्ल्यूएसएम बैठकों की और राज्य सेवा सुधार योजना (एसआईपी), जो जिला स्तरीय योजनाओं को एकीकृत करती है, की आवश्यकता होती है ।
भावी रणनीति पर जोर देते हुए, उन्होंने जिला कलेक्टरों से जिला तकनीकी इकाई मूल्यांकन में तेजी लाने, जिला सुधार योजना की अनिवार्य शर्त के रूप में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठकें बुलाने और चार सप्ताह के भीतर डीआईपी प्रविष्टि शुरू करने का आग्रह किया, जिसकी प्रगति की निगरानी जल जीवन मिशन- एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली पर प्रारूप बी 48 के माध्यम से की जाएगी। 'जल सेवा आकलन' पंचायतों को बुनियादी ढांचे के केवल प्राप्तकर्ता से बदलकर सक्रिय जल सेवा प्रशासक के रूप में परिवर्तित करता है। यह सामुदायिक जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित सुधारात्मक योजना के माध्यम से संवहनीय ग्रामीण जलापूर्ति के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
प्रेजेंटेशन के ज़रिए ज़िलों ने नए और सर्वोत्तम तरीके प्रस्तुत किए
'पेयजल संवाद' के दौरान, कुल पाँच ज़िलों ने अपनी प्रगति और क्षेत्र की सर्वोत्तम पद्धतियों को प्रस्तुत किया। इससे अन्य राज्यों के ज़िलों को जल जीवन मिशन 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण 2 के तहत बेहतर विकास करने में और अधिक सहायता मिलेगी। प्रत्येक प्रेजेंटेशन संबंधित ज़िला कलेक्टर/ज़िला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त/ज़िला अधिकारियों द्वारा दिया गया।
टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड: ज़िलाधिकारी श्रीमती नितिका खंडेलवाल ने ज़िले की शानदार प्रगति को दिखाते हुए बताया कि यहाँ 99.72% घरों में नल के पानी का कनेक्शन है और 81.32% घरों तक 'हर घर जल' योजना का लाभ पहुँचा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के विकास कार्यक्रमों के तहत गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नियमित निगरानी, जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की लगातार बैठकें और संचालन व रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है। इस पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि ‘इंदवाल’ और ‘कोट’ गाँव उपभोक्ता शुल्क संग्रह के मामले में सर्वश्रेष्ठ गाँवों के रूप में उभरे हैं। इसके अलावा, उन्होंने जल स्रोतों की संवहनीयता के लिए संस्थागत तालमेल पर ज़ोर दिया। इसके तहत एक अहम पहल 'स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी' (सर्रा) के साथ तालमेल बिठाना है, जो सिंचाई, वन और ग्रामीण विकास जैसे विभागों के साथ मिलकर काम करती है। वैज्ञानिक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और 'गैप फंडिंग' से मिलने वाली मदद, खासकर पहाड़ी और जंगली इलाकों में, पानी के स्थायी स्रोतों को सुनिश्चित करती है। उन्होंने कुछ अन्य बेहतरीन तरीकों पर भी रोशनी डाली, जैसे कि जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई संपत्तियों के लिए केएमएल फ़ाइलें बनाकर उनका डिजिटलीकरण करना जिन्हें बाद में ‘पीएम गति शक्ति पोर्टल’ पर अपलोड किया जाता है। साथ ही, उन्होंने शिकायत निवारण प्रणाली और जिला प्रयोगशाला की एनएबीएल मान्यता का भी उल्लेख किया।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण 2 के तहत, श्रीमती नितिका ने टिहरी की ग्राम पंचायत कटखेत के 'ग्रे-वॉटर प्रबंधन संतृप्ति दृष्टिकोण' (ग्रेवाटर मैनेजमेंट सैचुरेशन अप्रोच) पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन गाँवों ने ग्रे-वॉटर प्रबंधन के क्षेत्र में 100% कवरेज हासिल कर लिया है और यह मॉडल जल के संवहनीय उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने 'स्रोत स्थिरता' के लिए सर्रा (स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी) अभिसरण मॉडल की सराहना की और राज्यों तथा जिलों से इस तरह के नवाचारी मॉडल पेश करने का आग्रह किया।

कोडरमा, झारखंड के उपायुक्त श्री ऋतुराज ने बताया कि जिले ने जल जीवन मिशन के तहत तकनीक-सक्षम और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से एक मज़बूत कार्यान्वयन मॉडल पेश किया है, यह जिला 1,655 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें लगभग 40% हिस्सा जंगलों से ढका है। निचले पठारी क्षेत्र में स्थित होने के कारण, इसे योजना बनाने, उसे लागू करने और रखरखाव के चरणों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों में ज़मीन और पानी के स्रोतों की पहचान करना और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाना शामिल है।
हालांकि, जल जीवन मिशन डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय पर डेटा-आधारित निगरानी और जियो-टैग सत्यापन, सामुदायिक सहभागिता, सफल एकल ग्राम योजनाओं (एसवीएस) के विस्तार, राज्य सरकार के ऐप 'झारजल' और जिला-निगरानी ऐप 'मीटा' के माध्यम से शिकायत निवारण जैसी प्रमुख रणनीतियों के साथ, जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि 'झारजल' ऐप के माध्यम से तकनीक-संचालित शासन को मजबूत किया गया है, जिससे 72 घंटों के भीतर शिकायतों का वास्तविक समय पर समाधान सुनिश्चित होता है, साथ ही उपभोक्ता शुल्क और शिकायतों की डिजिटल ट्रैकिंग भी की जाती है। जिले ने वैज्ञानिक योजना, जल बजटिंग, पुनर्भरण संरचनाओं और पारंपरिक जल निकायों के पुनरुद्धार के माध्यम से स्रोत स्थिरता को भी प्राथमिकता दी है, जबकि फील्ड टेस्ट किट और प्रयोगशाला प्रणालियों के माध्यम से 95% से अधिक जल गुणवत्ता परीक्षण कवरेज सुनिश्चित किया है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत, उन्होंने बताया कि जिले ने ग्रे-वॉटर प्रबंधन में 97% कवरेज के साथ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है और स्वच्छता संकेतकों में राज्य स्तर पर शीर्ष रैंकिंग प्राप्त की है। कुल मिलाकर, जिले के एकीकृत दृष्टिकोण के कारण सेवा वितरण में सुधार हुआ है, समुदाय की भागीदारी बढ़ी है और जल प्रबंधन के स्थायी परिणाम प्राप्त हुए हैं।
अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर के उपायुक्त डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट ने जल जीवन मिशन के तहत एक परिवर्तनकारी और तालमेल-आधारित कार्यान्वयन मॉडल पेश किया। इस मॉडल की खासियत है-मज़बूत संस्थागत समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और निरंतरता पर ज़ोर। निलफान और मसावती-टॉप की अहम केस स्टडीज़ इस मॉडल के असर को दिखाती हैं। इन इलाकों में दशकों से पानी की भारी कमी थी, जिसकी वजह से महिलाओं को 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था या उन्हें बर्फ पिघलाकर पानी का इंतज़ाम करना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें नल से पानी की पक्की सप्लाई मिल रही है, इससे उनके जीवन की गुणवत्ता में काफ़ी सुधार आया है।
सबसे अच्छी मुख्य कार्यप्रणाली 'सिंगल-विंडो, ज़िला-नेतृत्व वाला अभिसरण तंत्र' है, जिसके तहत 'ज़िला जल एवं स्वच्छता मिशन' के अंतर्गत 8 से अधिक विभागों का समन्वय किया जाता है। यह तंत्र बिना किसी देरी के मंज़ूरी, ज़मीन का सुचारू आवंटन और कार्यों का तालमेल के साथ निष्पादन सुनिश्चित करता है।

इसके अलावा, एसबीएम-जी के तहत जिले ने सामुदायिक और घरेलू सोख गड्ढों को शामिल करते हुए एक व्यापक दृष्टिकोण के माध्यम से 100% ग्रेवाटर प्रबंधन कवरेज हासिल किया है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता को मजबूती मिली है।
रायबरेली, उत्तर प्रदेश की ज़िला कलेक्टर श्रीमती हर्षिता माथुर ने 'जल जीवन मिशन' और 'स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण' (चरण 2) के तहत ज़िले की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि कुल लक्षित परिवारों में से ज़िले ने 93.46% कवरेज हासिल कर लिया है और 100% कवरेज तक पहुँचने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों के निवारण और नागरिकों की भागीदारी के लिए, ज़िला प्रशासन सक्रिय रूप से 'जल सारथी' ऐप का उपयोग कर रहा है। यह एक उपयोगकर्ता-अनुकूल मोबाइल एप्लिकेशन है, जो एंड्राइड और आईओएस दोनों प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से लोग जल आपूर्ति से संबंधित समस्याओं की तुरंत रिपोर्ट कर सकते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (चरण 2) के तहत, जिले ने ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। जिले ने 10 फेकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू कर दिया है और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मटेरियल रिकवरी सुविधाओं को सक्रिय रूप से लागू कर रहा है।

विजयपुरा, कर्नाटक के उपायुक्त डॉ. आनंद के. ने बताया कि ज़िले ने कृष्णा और भीमा नदियों पर बने अलमट्टी और नारायणपुर बांधों से मिलने वाले टिकाऊ सतही जल स्रोतों का इस्तेमाल करके 40 मल्टी-विलेज स्कीमें (एमवीएस) लागू की हैं। उन्होंने बताया कि इन उपलब्धियों में दो बड़े 'डिज़ाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (डीबीओटी) मोड वाले एमवीएस प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। डॉ. आनंद ने जानकारी दी कि ज़िले ने 'घरेलू नल कनेक्शन (फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन) उपलब्ध कराने के मामले में काफ़ी प्रगति की है। अब ध्यान जल की उपलब्धता से हटकर कुशल वितरण और स्थिरता पर केंद्रित हो गया है। उन्होंने आगे बताया कि जिले ने सभी ग्राम पंचायतों में संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) नीति को अपना लिया है, जिसके तहत जल संबंधी खर्चों के लिए अलग लेखा-जोखा रखा जाता है और मरम्मत के कार्य तुरंत किए जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जल महोत्सव के दौरान 'हर घर जल' के तहत निरंतर सहयोग के लिए सम्मानित की गईं स्वयं सहायता समूह की प्रतिनिधि श्रीमती चन्नम्मा का भी विशेष उल्लेख किया।

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण 2 के तहत, विजयपुरा ने 270 गांवों (41.52%) को 'ओडीएफ प्लस मॉडल' गांव घोषित किया है। उन्होंने आगे बताया कि जिला स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और 'मनरेगा' के फंडों के तालमेल के माध्यम से, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों दोनों के लिए समुदाय-स्तरीय संतृप्ति दृष्टिकोण अपना रहा है।
इन प्रस्तुतियों में जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत हासिल की गई उपलब्धियों, मौजूदा चुनौतियों और बेहतरीन कार्यप्रणालियों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही, 'हर घर जल' और 'स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)' के अंतर्गत प्रगति की गति को तेज़ करने के लिए अपनाए गए विविध दृष्टिकोणों पर भी ज़ोर दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए श्रीमती ऐश्वर्या सिंह, संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण 2 के तहत 100% ओडीएफ मुक्त गाँव का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में राज्यों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने जिला अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें और मिशन के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन घटकों के तहत पूर्ण कवरेज हासिल करने के लिए पूरी लगन से प्रयास करें, ताकि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण 2 के उद्देश्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
अपने समापन भाषण में, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव और मिशन निदेशक, श्री कमल किशोर सोन ने जिलों द्वारा साझा किए गए नवाचारी दृष्टिकोणों की प्रशंसा की और इस बात पर जोर दिया कि जल जीवन मिशन 2.0 और एसबीएम-जी चरण-2 की सफलता अंततः जिला कलेक्टरों के सक्रिय नेतृत्व पर निर्भर करती है। उन्होंने प्रशासकों से डैशबोर्ड डेटा की अग्रिम समीक्षा के साथ नियमित मासिक जिला जल एवं स्वच्छता मिशन बैठकें आयोजित करने का आग्रह किया और जल सेवा आकलन, जल अर्पण, जिला तकनीकी इकाइयों (डीटीयू) के सुदृढ़ीकरण तथा धूसर जल (ग्रे-वाटर) प्रबंधन जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष बल दिया।
जिला कलेक्टरों के 'पेयजल संवाद' के 7वें संस्करण में पूरे देश से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें जिला कलेक्टर/उपायुक्त/जिला अधिकारी, मिशन निदेशक और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य मिशन टीमें शामिल थीं।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2252360)
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