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अहमदाबाद स्थित कंकरिया भारत का पहला वॉटर न्‍यूट्रल कोचिंग डिपो बना; इसने जल शुद्धिकरण के लिए पौधों का उपयोग करने की एक अद्भुत उपलब्धि अर्जित की


अपशिष्ट जल के उपचार और पुन: उपयोग के माध्यम से डिपो प्रतिदिन 1.60 लाख लीटर पानी की बचत करता है, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होती है

कांकरिया डिपो पर्यावरण के अनुकूल फाइटोरेमेडिएशन तकनीक और उन्नत बहु-स्तरीय शुद्धिकरण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित रेलवे को बढ़ावा देता है

प्रविष्टि तिथि: 17 APR 2026 6:13PM by PIB Delhi

पर्यावरण स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कांकरिया कोचिंग डिपो एक वॉटर न्‍यूट्रल रेलवे डिपो के रूप में उभरा है, जो दर्शाता है कि कैसे नवोन्मेषी कार्यप्रणालियां पारंपरिक रेलवे संचालन को पर्यावरण के अनुकूल मॉडल में बदल सकती हैं। यह पहल जल संरक्षण में एक बड़ी उपलब्धि को रेखांकित करती है, क्योंकि डिपो उन्नत उपचार और पुन: उपयोग प्रणालियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1.60 लाख लीटर पानी की बचत कर रहा है - जो 300 से अधिक घरेलू टैंकों के बराबर है।

इस रूपांतरण का मूल आधार फाइटोरेमेडिएशन पर आधारित एक आधुनिक अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें पौधों का उपयोग जल शुद्धिकरण के लिए किया जाता है। डिपो ने कोच की धुलाई और रखरखाव जैसे नियमित कार्यकलापों से उत्पन्न अपशिष्ट जल के उपचार के लिए इस पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक कार्यान्‍व‍ित किया है। जल को बहाए जाने के बजाय, इसे साफ करके पुनः उपयोग किया जाता है, जिससे ताजे पानी के स्रोतों पर निर्भरता अत्‍यधिक कम हो जाती है।

यह प्रणाली वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई बहु-चरणीय प्रक्रिया का अनुसरण करती है, जिसमें प्रभावी शुद्धिकरण सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक और तकनीकी विधियों का संयोजन किया गया है। आर्द्रभूमि आधारित उपचार में, पौधे अशुद्धियों को अवशोषित करने और जल की गुणवत्ता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतिम चरण में, उपचारित जल को कार्बन और रेत निस्पंदन के साथ-साथ यूवी कीटाणुशोधन से गुजारा जाता है, जिससे यह परिचालन कार्यकलापों में पुन: उपयोग के लिए सुरक्षित हो जाता है।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि जल खपत की लागत को कम करके आर्थिक लाभ भी प्रदान करती है। यह परियोजना पर्यावरण अधिकारियों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि स्थिरता और अनुपालन साथ-साथ चलें।

प्रतिदिन की बचत से लगभग 5.84 करोड़ लीटर पानी की वार्षिक बचत होती है, जिससे कांकरिया कोचिंग डिपो भारतीय रेलवे में कुशल जल प्रबंधन का एक आदर्श उदाहरण बन गया है। इस प्रकार की नवोन्‍मेषी और टिकाऊ कार्य प्रणालियों को अपनाकर, यह डिपो उदाहरण प्रस्‍तुत करता है कि प्रचालनगत दक्षता बनाए रखते हुए पर्यावरणीय उत्‍तरादायित्‍व की मांगों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है।

कंकारिया कोचिंग डिपो को वॉटर न्‍यूट्रल सुविधा केन्‍द्र में परिवर्तित करना, रेलवे संचालन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, जो सतत विकास और संसाधन संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

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पीके/केसी/एसकेजे/एम

 


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