पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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भारत के उत्‍खनन प्रक्रियात्‍मक तंत्र को मजबूत करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने समुद्र मंथन के अंतर्गत डेटा आधारित अन्वेषण सम्मेलन का आयोजन किया।


भारत अनिश्चितता को अवसर में और डेटा को खोज में परिवर्तित कर भारत के ऊर्जा भविष्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी यात्रा को शक्ति प्रदान कर रहा है: श्री हरदीप एस पुरी

प्रविष्टि तिथि: 18 APR 2026 1:33PM by PIB Delhi

भारत के समुद्र मंथन - राष्ट्रीय अपतटीय मिशन के तहत विस्तारित उत्‍खनन एजेंडा के संदर्भ में हाइड्रोजन महानिदेशालय (डीजीएच) ने "डेटा संचालित उत्‍खनन" पर एक सम्मेलन का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य एक मजबूत डेटा प्रक्रियात्‍मक तंत्र के माध्यम से भारत के उत्‍खनन परिणामों में तेजी लाने के लिए उद्योग जगत को शामिल करना था।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, डीजीएच, राष्ट्रीय तेल कंपनियां, वैश्विक उत्‍खनन एवं उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां (बीपी, एक्सॉनमोबिल, शेल आदि), निजी ऑपरेटर (रिलायंस इंडस्ट्रीज, केयर्न इंडिया, इन्वेनायर एनर्जी, अदानी वेल्सपन एक्सप्लोरेशन) और अग्रणी भूकंपीय सेवा प्रदाता एवं प्रौद्योगिकी कंपनियां (टीजीएस, विरिडियन, शीयरवाटर जियोसर्विसेज, एसएलबी, वेव जियो सर्विसेज) शामिल थीं। सम्मेलन का उद्देश्‍य अपतटीय और सीमावर्ती बेसिन विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए उत्‍खनन परिणामों को सक्षम बनाने में भूकंपीय डेटा की भूमिका पर उद्योग के हितधारकों को शामिल करना था।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में इस बात का उल्‍लेख किया कि भारत अब उत्‍खनन के क्षेत्र में संतुलित एवं नियामक दृष्टिकोण आगे बढ़ रहा है और एक साहसिक बहु-ग्राहक मॉडल को अपना रहा है जो अधिक लोगों को व्याख्या करने, नवाचार करने और खोज करने की अनुमति देता है, जिससे उत्‍खनन एवं उत्‍पादन को अनिश्चितता के क्षेत्र के रूप में माने जाने वाले दृष्टिकोण में निर्णायक रूप से बदलाव आ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि समुद्रमंथन के साथ, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी खोज को पूरा करने के लिए खुलेपन, सहयोग और अत्याधुनिक विज्ञान के माध्यम से भारत की विशाल अपतटीय क्षमता को सामने लाया जा रहा है।

सम्मेलन से प्राप्त मुख्य निष्कर्ष:

डेटा प्राथमिक प्रवर्तक के रूप में:

  • उद्योग जगत में इस बात पर स्पष्ट सहमति थी कि भूकंपीय डेटा की उपलब्धता, गुणवत्ता और सुलभता सीधे तौर पर उत्‍खनन परिणामों को निर्धारित करती है।
  • प्रतिभागियों ने इस बात का उल्‍लेख किया कि डेटा कवरेज में कमियां, विशेष रूप से सीमावर्ती और गहरे पानी के बेसिनों में, बेसिन की संभावनाओं, निवेश प्रवाह और उत्‍खनन की तीव्रता को सीमित करती रहती हैं।
  • इमेजिंग प्रौद्योगिकियों और एआई-संचालित व्याख्या में हुई प्रगति का लाभ उठाते हुए, पुराने डेटासेटों के पुनर्संसाधन और पुनर्व्याख्या के माध्यम से महत्वपूर्ण तथ्‍य प्राप्त किए जा सकतें है।

आंकड़ों को आत्‍मसात करने में तेजी लाने की आवश्यकता:

  • प्रतिभागियों ने आगामी लाइसेंसिंग दौरों के अनुरूप लक्षित और त्वरित भूकंपीय डेटा आत्‍मसात की आवश्यकता पर बल दिया । वैश्विक अनुभव से पता चलता है कि प्रारंभिक चरण में डेटा सघनीकरण से भागीदारी और निवेश परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।

त्वरक के रूप में बहु-उपयोगकर्ता भूकंपीय मॉडल (एमसीएम):

  • बहु-उपयोगकर्ता भूकंपीय मॉडल को लागत दक्षता में सुधार और भागीदारी को व्यापक बनाने के लिए एक संभावित तंत्र के रूप में पहचाना गया, विशेष रूप से सीमावर्ती बेसिनों में।
  • वैश्विक अनुभव से पता चलता है कि एमसीएम डेटा की तेजी से उपलब्धता को सक्षम बनाता है और लाइसेंसिंग में अधिक भागीदारी का समर्थन करता है।
  • इसके साथ ही, भारत के लिए एक चरणबद्ध और सुनियोजित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें बेसिन की परिपक्वता और मौजूदा डेटा स्वामित्व संरचनाओं को ध्यान में रखा जाए।

सरकार एक प्रमुख सहायक के रूप में:

  • डेटा प्रक्रियात्‍मक तंत्र को सक्षम बनाने में सरकार की भूमिका पर जोर दिया गया, जिसमें नीतिगत समर्थन, डेटा अधिग्रहण में निरंतर निवेश और आकंड़ो तक पहुंच संबंधी ढांचे (एनडीआर) को मजबूत करना शामिल है। उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत स्पष्टता और पूर्वानुमानशीलता को महत्वपूर्ण बताया गया।

खरीद एवं कार्यान्वयन ढांचे:

  • अपेक्षित गतिविधि के पैमाने को देखते हुए प्रतिभागियों ने मजबूत खरीद ढांचे की आवश्यकता का उल्‍लेख किया, जिसमें कई सेवा प्रदाताओं के साथ जुड़ाव और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा अधिग्रहण और समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता-सह-लागत-आधारित दृष्टिकोण को अपनाना शामिल है।

चर्चाओं के आधार पर यह प्रस्ताव रखा गया कि

  • आगामी बोली दौरों के अनुरूप, सीमावर्ती और गहरे जल बेसिनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्राथमिकता के आधार पर भूकंपीय डेटा अधिग्रहण का एक रोडमैप तैयार करें।
  • निकट भविष्य में उत्‍खनन के संभावित लाभों को उजागर करने के लिए मौजूदा डेटासेटों के पुनर्संसाधन और एकीकरण हेतु एक संरचित कार्यक्रम प्रारंभ करें।
  • डेटा अधिग्रहण के लिए वाणिज्यिक ढांचे परिभाषित करें , जिसमें बहु-ग्राहक और हाइब्रिड मॉडल का चयनात्मक अनुप्रयोग शामिल हो।
  • पैमाने के अनुरूप खरीद और कार्यान्वयन ढांचे तैयार करें , जिसमें गुणवत्ता-आधारित मूल्यांकन शामिल हो और कई सेवा प्रदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।

डेटा ड्रिवन एक्सप्लोरेशन सम्मेलन ने इस बात की पुष्टि की कि भूकंपीय डेटा अन्वेषण में भागीदारी और निवेश को गति देने का मूलभूत साधन है , विशेष रूप से सीमावर्ती और गहरे जल बेसिनों में। लक्षित और समयबद्ध दृष्टिकोण के माध्यम से डेटा की गुणवत्ता, सुलभता और व्यावसायिक व्यवहार्यता में सुधार की आवश्यकता पर उद्योग जगत में व्यापक सहमति थी।

यह सम्मेलन आम सहमति को क्रियान्वयन में बदलने की आवश्यकता की ओर इशारा करता है , जिसमें प्रमुख कार्य क्षेत्रों को संचालन में लाने पर तत्काल ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें प्राथमिकता के आधार पर डेटा अधिग्रहण रोडमैप को अंतिम रूप देना, उपयुक्त वाणिज्यिक मॉडल विकसित करना और पैमाने और गुणवत्ता आवश्यकताओं के अनुरूप खरीद ढांचे को डिजाइन करना शामिल है।

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पीके/केसी/जेके/एमबी

 


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