सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 में 223 करोड़ रुपये का रियायती वित्त प्रदान किया
प्रविष्टि तिथि:
23 APR 2026 8:49PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक उपक्रम है, यह अक्टूबर 1997 से कार्यरत है। यह संस्था रियायती ऋण और सहायता हस्तक्षेपों के माध्यम से सफाई कर्मचारियों, कचरा बीनने वालों, हाथ से मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए काम कर रही है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम वित्तीय संसाधनों तक पहुंच सक्षम बनाकर, श्रम की गरिमा को बढ़ावा देकर और स्थायी आजीविका को प्रोत्साहित करके स्वच्छता कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, 29,448 लाभार्थियों (जिनमें लगभग 97% महिलाएं हैं) को 223.47 करोड़ रुपये का रियायती ऋण वितरित किया। औसत ऋण का आकार बढ़कर 77,000 रुपये हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 16.67% की वृद्धि दर्शाता है। 785 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी और 720 करोड़ रुपये की चुकता पूंजी के साथ, निगम ने 31 मार्च 2026 तक कुल 3340.67 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया है, जिससे 6.08 लाख से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने 'स्वच्छता उद्यमी योजना' के तहत छह सफ़ाई उपकरण/वाहन खरीदने के लिए पुडुचेरी सरकार के 'सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाग' को 2.89 करोड़ रुपये जारी किए। इसके अलावा, इसने सफ़ाई कर्मचारियों के पाँच छात्रों/बच्चों को विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए शिक्षा ऋण के तौर पर 90 लाख रुपये मंज़ूर किए। साथ ही, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने लद्दाख में अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए लघु उद्योग विकास निगम (सिडको) के साथ एक 'समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी पहुँच व योजनाओं के क्रियान्वयन को मज़बूत करने के उद्देश्य से 'राज्य चैनलिंग एजेंसियों' की एक राष्ट्रीय-स्तरीय बैठक आयोजित की।
नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) योजना की एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, निगम ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी की गई धनराशि का पूर्ण उपयोग प्राप्त किया। 'स्वच्छता उद्यमी योजना' के तहत, स्थायी मशीनीकृत स्वच्छता-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 320 लाभार्थियों (सैनिप्रेन्योर्स) के लिए 14.84 करोड़ रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी जारी की गई, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 250 लाभार्थियों की तुलना में अधिक है।
कचरा बीनने वालों से सम्बंधित प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई, जिसमें 3,76,209 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइल तैयार की गई और ई-केवाईसी के माध्यम से 2,49,166 का सत्यापन किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, 1,31,279 कचरा बीनने वालों को पीपीई किट प्रदान किए गए, जबकि देश भर में 1,565 कचरा बीनने वालों और 3,492 सीवर व सेप्टिक टैंक श्रमिकों को व्यावसायिक सुरक्षा और कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
'हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए स्वरोजगार योजना' के तहत, स्थायी आजीविका गतिविधियों का समर्थन करने के लिए 204 हाथ से मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों को 4.72 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी जारी की गई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 88 थी। उल्लेखनीय है कि 74 लाभार्थियों को 40 सीएनजी/पेट्रोल ऑटोरिक्शा और 34 इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा खरीदने में सहायता प्रदान की गई, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्थिरता के क्षेत्र में 'सीएसआर' पहल भी शुरू की। इनमें मध्य प्रदेश में माहवारी से जुड़े स्वच्छता कार्यक्रम, उत्तराखंड में शून्य-अपशिष्ट ग्राम मॉडल, मुंबई में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण, उत्तर प्रदेश के स्कूलों में आरओ जल सुविधाएँ और उत्तराखंड में आंगनवाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण शामिल है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम ने वित्तीय समावेशन, आजीविका सहायता और व्यापक सामाजिक हस्तक्षेपों के माध्यम से, कमज़ोर स्वच्छता कर्मियों को सशक्त बनाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया।
****
पीके/केसी/एसके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2255051)
आगंतुक पटल : 462