विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 21वीं सदी भारत की है; जैव-अर्थव्यवस्था 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी
भारत जैव प्रौद्योगिकी से क्वांटम तक फुल-स्टैक तकनीकी नेतृत्व की ओर आगे बढ़ रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह
आईआईटी रुड़की में विजन 2047 सम्मेलन भारत के विकास रोडमैप पर वैश्विक संस्थानों को एक साथ लाता है
भारत के बायोटेक इकोसिस्टम में 11,000 स्टार्टअप्स का आंकड़ा पार करने के साथ ही जीनोम इंडिया, सीएआर-टी थेरेपी और एमआरएनए प्लेटफॉर्म्स ने अभूतपूर्व प्रगति की है।
प्रविष्टि तिथि:
24 APR 2026 4:20PM by PIB Delhi
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी और जीव विज्ञान के नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था द्वारा संचालित होगी। देश की जैव-अर्थव्यवस्था 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है।
आईआईटी रुड़की में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत नीतिगत सुधारों, मजबूत संस्थागत ढांचे और तेजी से बढ़ते नवाचार इकोसिस्टम द्वारा समर्थित जीन से क्यूबिट तक, समुद्र की गहराई से बाहरी अंतरिक्ष तक पूर्ण स्पेक्ट्रम तकनीकी क्षमता की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री आईआईटी रुड़की में आयोजित "विजन 2047: समृद्ध और महान भारत 2.0" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य भाषण दे रहे थे। यह सम्मेलन आईआईटी रुड़की और स्वदेशी शोध संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। इसमें भारत और विदेश के 100 से अधिक संस्थान शामिल हुए है। इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित श्रीधर वेम्बू उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का विकास मार्ग एक सभ्यतागत लोकाचार पर आधारित है। यह "अर्थमूलधर्मम" सिद्धांत द्वारा निर्देशित नैतिक मूल्यों के साथ आर्थिक प्रगति को एकीकृत करता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के विषय, रोजगार और आर्थिक विकास से लेकर विज्ञान नेतृत्व, स्थिरता, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग तक, एक व्यापक राष्ट्रीय परिवर्तन एजेंडे को दर्शाते हैं।
सरकार की नीतिगत बल पर केंद्रीय मंत्री ने 2024 में अनुमोदित बायोई3 नीति (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) का उल्लेख करते हुए, इसे जैव-विनिर्माण के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर आज 165 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई है। 2030 तक 300 बिलियन डॉलर के लक्ष्य के साथ यह लगभग 18% सालाना की दर से बढ़ रही है। बायोटेक स्टार्टअप की संख्या लगभग 50 से बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने 50,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) और 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड का भी उल्लेख किया। इसे डीप-टेक इनोवेशन के लिए दीर्घकालिक, कम लागत वाला वित्तपोषण प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल के वर्षों में हासिल की गई प्रमुख वैज्ञानिक प्रगति की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। इसमें जीनोम इंडिया के अंतर्गत प्रगति, स्वदेशी सीएआर-टी सेल थेरेपी, एमआरएनए वैक्सीन प्लेटफॉर्म का विकास, भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित एंटीबायोटिक, एक राष्ट्रीय बायोबैंक की स्थापना और इसरो के सहयोग से किए गए अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी प्रयोग शामिल हैं। उन्होंने समुद्रयान जैसे मिशनों के माध्यम से सस्ती कैंसर देखभाल प्रदान करने और गहरे समुद्र की खोज में प्रगति के लिए परमाणु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को भी रेखांकित किया।
उभरती प्रौद्योगिकियों में विकास का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने निर्धारित समय से पहले महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की हैं। जबकि भारत ने कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में विश्व स्तर पर शीर्ष रैंक में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक रैंकिंग 81 से बढ़कर 39 हो गई है और पिछले एक दशक में अनुसंधान और विकास व्यय दोगुना से अधिक हो गया है। यह विज्ञान और नवाचार की निरंतर राष्ट्रीय प्राथमिकता को दर्शाता है।
आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैव-अर्थव्यवस्था के विस्तार, जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को बढ़ावा देने, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को चालू करने और समुद्री जैव प्रौद्योगिकी तथा कार्बन-तटस्थ प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने सहित 2030, 2035, 2040 और 2047 के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत का लक्ष्य वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन जैव-अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है।
छात्रों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें "अमृत पीढ़ी" बताया और उनसे भारत के वैज्ञानिक परिवर्तन के अगले चरण का नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने आईआईटी रुड़की जैसे संस्थानों से जैव-निर्माण, नवाचार और अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में यात्रा को प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और युवा वैज्ञानिक दिमागों द्वारा विश्व स्तर पर प्रासंगिक, नवाचार-संचालित भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने से आकार दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शुक्रवार को आईआईटी रुड़की द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "विजन 2047: समृद्ध और महान भारत 2.0" में मुख्य भाषण देते हुए।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2255366)
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