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डीएफएस के सचिव ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और प्रमुख निजी बैंकों के साथ वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की


सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बैंकों को वित्तीय समावेशन योजनाओं के दायरे में अधिक से अधिक लोगों को लाने के लिए समर्पित रूप से काम करना चाहिए: सचिव, डीएफएस

प्रविष्टि तिथि: 29 APR 2026 7:54PM by PIB Delhi

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री एम. नागराजू ने आज नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों और निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस समीक्षा बैठक में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक उपस्थित थे।

बैठक के दौरान श्री नागराजू ने प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), पीएमस्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना सहित विभिन्न वित्तीय समावेशन योजनाओं के तहत बैंकवार प्रगति की समीक्षा की।

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उन्होंने उन गांवों में बैंकों की भौतिक शाखाएं खोलने की प्रगति की समीक्षा भी की, जहां बैंकिंग सुविधाएं नहीं हैं और बैंकों से उन गांवों में अपना नेटवर्क बढ़ाने का आग्रह किया, जिन्हें शाखा विस्तार के लिए चिन्हित किया गया है, विशेष रूप से उत्तर पूर्वी राज्यों में। श्री नागराजू ने कहा कि अगर बुनियादी ढांचे या नेटवर्क संपर्क से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो बैंकों को राज्य सरकारों और संबंधित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के साथ मिलकर इन समस्याओं का हल निकालना चाहिए। इसी प्रकार, बैंकों के साथ बैंकिंग प्रतिनिधियों की तैनाती के महत्व पर भी चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने के लिए भौतिक बैंक शाखाओं के साथ-साथ डिजिटल बैंकिंग बुनियादी ढांचे को भी विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें सहायक माध्यम और स्थानीय भाषा में सेवाएं उपलब्ध हों।

प्रगति की समीक्षा करते हुए, श्री नागराजू ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बैंकों द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने मुद्रा योजना को वैश्विक स्तर पर सबसे सफल वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों में से एक बताया और कहा कि इस योजना ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों  को नए व्यवसाय का स्वामी बनने के लिए सशक्त बनाया है, जिससे उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला है और अनौपचारिक ऋण देने वाले चैनलों पर निर्भरता कम हुई है, क्योंकि अब ज्यादातर लोग ऋण के लिए सीधे बैंकों से संपर्क कर रहे हैं।

बैठक के दौरान, वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रणनीतियों और आगे की राह पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री नागराजू ने निजी बैंकों से समाज के वंचित वर्गों की सेवा करने और उनकी बैंकिंग से जुड़ी ज़रुरतों को पूरा करने पर अधिक जोर देने और सार्थक वित्तीय समावेशन के लिए एसएलबीसी/डीसीसी/डीएलसीसी जैसे विभिन्न मंचों में पूरी तरह से भाग लेने का आग्रह किया।

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पीके/केसी/एनएस


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