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शासन के तेजी से उभरते क्षेत्रों में तीव्र अनुकूलनशीलता और निरंतर सीखने की क्षमता प्रभावी लोक प्रशासन के लिए जरूरी है: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में लोक प्रशासन कार्यक्रम के दीक्षांत समारोह में शिरकत की

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा - आज प्रशासन तेजी से प्रौद्योगिकी-आधारित होता जा रहा है, जबकि नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं

मंत्री ने वर्तमान समय में संचार के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, इसे एक प्रमुख प्रशासनिक कौशल बताया

प्रविष्टि तिथि: 01 MAY 2026 4:15PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शासन के तेजी से ऊभरते क्षेत्र में त्वरित अनुकूलनशीलता और निरंतर सीखने की क्षमता प्रभावी लोक प्रशासन के लिए आवश्यक है, क्योंकि आज अर्जित ज्ञान तकनीकी प्रगति के सामने जल्दी ही अप्रासंगिक हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. जितेंद्र सिंह भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में 51वें लोक प्रशासन उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम (एपीपीपीए) के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। 1975 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम आईआईपीए की एक प्रमुख क्षमता-विकास पहल है, जिसके तहत पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के सहयोग से लोक प्रशासन और लोक नीति में स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान की जाती है।

इस कार्यक्रम में आईआईपीए के महानिदेशक डॉ. परगड़े, प्रोफेसर सुरभि पांडे, डॉ. सचिन चौधरी, प्रोफेसर रवि सकलानी और अखिल भारतीय तथा केंद्रीय सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सशस्त्र बलों और अन्य क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।

शासन के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज प्रशासन तेजी से प्रौद्योगिकी-आधारित होता जा रहा है, जबकि नागरिकों की अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि लोक प्रशासन को न केवल संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से बल्कि अधिकारियों की मानसिकता में निरंतर परिवर्तन लाकर भी अप्रत्याशित और गतिशील चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्पर रहना होगा।

शासन के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ध्यान "सरकार" से हटकर "शासन" और फिर "न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन" की ओर स्थानांतरित हो गया है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक जोर दिया गया है।

क्षमता विकास की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एपीपीपीए कार्यक्रम ने दशकों से वरिष्ठ अधिकारियों को नीति कार्यान्वयन के लिए आवश्यक विषयगत ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लैस करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मिशन कर्मयोगी के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य अमृत काल में उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार शासन के लिए सिविल सेवकों में दक्षता का विकास करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उभरती जरूरतों के अनुरूप विकसित होना चाहिए। उन्होंने भाग लेने वाले अधिकारियों की अपेक्षाओं के साथ पाठ्यक्रम के डिजाइन को बेहतर ढंग से संरेखित करने के लिए गुमनाम प्रतिक्रिया तंत्र सहित संवादात्मक और प्रतिक्रिया-संचालित दृष्टिकोणों के अधिक उपयोग का सुझाव दिया।

केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान समय में प्रभावी संचार के बढ़ते महत्व की ओर भी इशारा किया। उन्होंने इसे एक प्रमुख प्रशासनिक कौशल बताते हुए कहा कि आधुनिक शासन के लिए अधिकारियों को तेजी से जुड़ते हुए वातावरण में नागरिकों, मीडिया और कई हितधारकों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने की जरूरत है।

आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसे शासन संबंधी नवाचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी, डेटा-संचालित मॉडल ने सभी क्षेत्रों में मापने योग्य सुधार प्रदर्शित किए हैं और अब यह अधिक प्रौद्योगिकी-एकीकृत अगले चरण की ओर बढ़ रहा है, जिससे परिणाम-आधारित शासन को और मजबूती मिलेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अपनी स्थापना के बाद से, एपीपीपीए कार्यक्रम ने अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं के 1,700 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। इनमें सशस्त्र बलों, राज्य सेवाओं और यहां तक ​​कि विदेशी देशों के प्रतिभागी भी शामिल हैं, जिनमें से कई सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए हैं।

प्रतिभागियों, शिक्षकों और आयोजकों को बधाई देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एपीपीपीए जैसे कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाते हैं बल्कि अधिकारियों को तेजी से जटिल होते शासन परिवेश में राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए भी तैयार करते हैं।

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पीके/केसी/एके/एमयू
 


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