पंचायती राज मंत्रालय
पंचायती राज मंत्रालय हैदराबाद स्थित एनआईआरडी एंड पीआर में आत्मनिर्भर पंचायत पहल पर 2 मई 2026 को एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन करेगा
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है
प्रविष्टि तिथि:
01 MAY 2026 2:55PM by PIB Delhi
भारत सरकार का पंचायती राज मंत्रालय, 2 मई 2026 को राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एवं पीआर), राजेंद्र नगर, हैदराबाद में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर एक कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। कार्यशाला का उद्घाटन पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, तेलंगाना सरकार के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव श्री एम. दाना किशोर, राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, एनआईआरडी एवं पीआर के संकाय सदस्य, आवास एवं शहरी विकास निगम लिमिटेड (एचयूडीसीओ) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के वरिष्ठ अधिकारी तथा तेलंगाना भर से पंचायत प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के दृष्टिकोण, उद्देश्यों और परिचालन ढांचे से परिचित कराया जाएगा। यह कार्यक्रम पंचायती राज मंत्रालय की राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के अंतर्गत एक दूरदर्शी पहल है। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज मुख्य भाषण देंगे, जिसमें वे आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के दृष्टिकोण को रेखांकित करेंगे। इसके बाद राष्ट्रीय नीति के उद्देश्यों, तकनीकी रोडमैप और अपेक्षित परिणामों पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का लाइव और संपूर्ण प्रदर्शन प्रतिभागियों को आवेदन प्रक्रिया और डिजिटल डैशबोर्ड से अवगत कराएगा, जिससे हर स्तर की पंचायतों के लिए यह प्रक्रिया सुलभ और पारदर्शी हो जाएगी। एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र सभी हितधारकों को मंत्रालय के साथ सीधे जुड़ने और भागीदारी के बारे में स्पष्टता प्राप्त करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा। तेलंगाना राज्य भी इस कार्यक्रम के तहत अपनी प्रतिबद्धता और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा, जिससे केंद्र और राज्य के बीच सक्रिय साझेदारी की नींव रखी जाएगी। एचयूडीसीओ और नाबार्ड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन ग्रामीण परियोजना विकास में अपनी विशेषज्ञता और संभावित वित्तीय सहायता के साथ इस कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पात्र ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और ऋण योग्य परियोजनाओं को विकसित और लागू करने में सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जिससे उनके स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) को मजबूती मिले। एक पारदर्शी राष्ट्रीय चुनौती प्रक्रिया के माध्यम से, पंचायतों से चयनित प्रस्तावों को परियोजना विकास से लेकर वित्तीय समापन तक समर्पित तकनीकी सहायता प्राप्त होगी, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सीएसआर वित्तपोषण, बैंक वित्तपोषण और अन्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय शामिल है। ग्राम सभाओं की अनिवार्य सहमति के माध्यम से योजना में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पंचायतों से विचार आएंगे और विजयी विचारों को तकनीकी सहायता, ऋण योग्य परियोजनाओं में विकसित करेगी। अपने चार वर्षीय कार्यान्वयन अवधि में, कार्यक्रम का उद्देश्य आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से आत्मविश्वासी पंचायतों की एक नई पीढ़ी का निर्माण करना है, जो वित्तीय स्वतंत्रता और सुशासन का जीता-जागता उदाहरण होगी।
मंत्रालय के अनुसार, आत्मनिर्भर पंचायत, आत्मनिर्भर भारत की सबसे मजबूत नींव है। हाल के वर्षों में, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। आईआईएम अहमदाबाद के साथ मिलकर पंचायतों को स्वयं राजस्व उत्पन्न करने का प्रशिक्षण देने से लेकर, ओएसआर ढांचे के तहत कुशल ऑनलाइन संग्रह और निगरानी के लिए राजस्व प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और डिजिटाइज़ करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म समर्थ पंचायत पोर्टल को लॉन्च करने तक, राजकोषीय स्वायत्तता को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उत्कृष्टता को और प्रोत्साहित करने के लिए, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को सम्मानित करने हेतु आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (एएनपीएसए) की स्थापना की गई है।
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पीके/केसी/पीएस
(रिलीज़ आईडी: 2257367)
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