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अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 15.9 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि दर्ज की, जो सुदृढ़ आर्थिक गतिविधि और ऋण मांग को दर्शाती है

कृषि और संबद्ध क्षेत्र के ऋण में वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई है, जो एक वर्ष पहले 10.4 प्रतिशत थी, यह ग्रामीण मांग में निरंतरता और ऋण प्रवाह में सुधार को दर्शाता है

औद्योगिक ऋण वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है जो पिछले वर्ष यह 8.2 प्रतिशत था, यह वृद्धि सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ऋण देने की तेज गति से हुई

एनबीएफसी, व्यापार और वाणिज्यिक अचल संपत्ति क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि से सेवा क्षेत्र में ऋण वृद्धि पिछले वर्ष के 12 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है

वाहन और स्वर्ण समर्थित ऋणों की मजबूत मांग और आवास ऋण की स्थिर स्थिति के कारण व्यक्तिगत ऋणों में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष के 11.7 प्रतिशत से अधिक है

प्रविष्टि तिथि: 05 MAY 2026 3:26PM by PIB Delhi

वित्तीय वर्ष 2025-26 में गैर-खाद्य ऋण में पिछले वर्ष की तुलना में 15.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जो कि वर्ष 2025 की इसी अवधि (10.9 प्रतिशत) की तुलना में 497 आधार अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि है। मार्च 2026 में कुल बकाया ऋण 212.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.2 लाख करोड़ रुपये अधिक है।

कम ब्याज दर के माहौल के बीच, सरकार द्वारा समर्थित पूंजीगत व्यय चक्र और समय पर किए गए संरचनात्मक सुधारों के चलते निजी निवेश बढ़ रहे हैं और घरेलू ऋण मांग को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर कॉरपोरेट और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं दोनों का विश्वास बहाल हो रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में ऋण वृद्धि व्यापक आधार पर हुई है, जिसमें सेवा क्षेत्र का बड़ा योगदान है। इसके बाद व्यक्तिगत ऋण खंड, कृषि और संबद्ध गतिविधियां और उद्योग का स्थान रहा है।

क्षेत्रीय ऋण वितरण – मुख्य बिंदु:

क्षेत्रीय ऋण वितरण (वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि प्रतिशत में

  • कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां: इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि दर बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष दर्ज की गई 10.4 प्रतिशत वृद्धि से 528 बीपीएस अधिक है। यह कृषि क्षेत्र को मिल रहे सुदृढ़ समर्थन को दर्शाता है। ग्रामीण मांग में निरंतरता और ग्रामीण ऋण के औपचारिकरण से वित्त वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के ऋण उपयोग में सकारात्मक गति प्राप्त हुई है।
  • औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्र को दिए गए ऋण में पिछले वर्ष की 8.2 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी दर से 15.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 33.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.7 गुना अधिक है। मध्यम आकार के उद्योगों में भी इसी तरह के सकारात्मक रुझान देखे गए हैं, जहां ऋण में 21.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है। औद्योगिक ऋण के प्रमुख चालक हैं: अवसंरचना, बुनियादी धातु और धातु उत्पाद, रसायन और रासायनिक उत्पाद, पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन आदि।
  • सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र के ऋण में वार्षिक आधार पर 19.0 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष इसी अवधि में 12.0 प्रतिशत की तुलना में)। सेवा क्षेत्र का कुल ऋण में 28 प्रतिशत का योगदान है। यह वृद्धि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, व्यापार और वाणिज्यिक अचल संपत्ति जैसे क्षेत्रों से उच्च मांग के कारण हुई।
  • व्यक्तिगत ऋण खंड: कुल ऋण में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तिगत ऋण खंड में वित्त वर्ष 2025-26 में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो एक वर्ष पहले दर्ज की गई ऋण वृद्धि (11.7 प्रतिशत) से 455 बीपीएस अधिक है। आवास खंड में वृद्धि स्थिर रही, जबकि वाहन ऋण और सोने के आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋणों में तीव्र गति बनी रही।

मजबूत ऋण वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ वातावरण को दर्शाती है और भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में ऋण की बढ़ती मांग का संकेत देती है। मजबूत ऋण वृद्धि के परिणामस्वरूप निगम और व्यक्ति व्यवसाय विस्तार और टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए ऋण सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे अचल परिसंपत्तियों में निवेश के माध्यम से अतिरिक्त क्षमता विकास द्वारा औद्योगिक गतिविधि में पहले से अधिक तेजी आ रही है और रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो रहे हैं।

भू-आर्थिक विखंडन और भू-राजनीतिक दबावों से घिरे चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है और यह लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक रही है।

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र, जो आर्थिक विकास का प्राथमिक इंजन है, अपनी सर्वोत्तम स्थिति में है। इसकी मजबूत पूंजी, ऐतिहासिक रूप से कम अवमूल्यन वाली परिसंपत्तियां और निरंतर लाभप्रदता अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाती है। ऋण को लोकतांत्रिक और औपचारिक बनाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में व्यापक स्तर पर ऋण वृद्धि हो रही है।

*(वार्षिक वृद्धि की गणना 4 अप्रैल, 2025 और 31 मार्च, 2026 के ऋण उपयोग के आधार पर की गई है। 31 दिसंबर, 2025 से बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को महीने के अंतिम दिन में बदल दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से आगे की वार्षिक वृद्धि दरें चालू वर्ष के महीने के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के संबंधित महीने के अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुरानी परिभाषा के अनुसार) के आंकड़ों पर आधारित हैं।)

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पीके/केसी/एके/एनजे


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