जल शक्ति मंत्रालय
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने गुवाहाटी में नेरीवॉल्म (एनईआरआईडब्ल्यूएएलएम) की शासी निकाय की छठी बैठक की अध्यक्षता की

प्रविष्टि तिथि: 19 MAY 2026 5:31PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग के अंतर्गत आने वाले उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (नेरीवॉल्म) के शासी निकाय की छठी बैठक आज गुवाहाटी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और नेरीवॉल्म के शासी निकाय के अध्यक्ष श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

बैठक शुरू होने से पहले श्री सी.आर. पाटिल ने वर्चुअल माध्यम से नेरीवॉल्म के नवनिर्मित अंतर्राष्ट्रीय छात्रावास-सह-अतिथि गृह का उद्घाटन किया।  यह संस्थान के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शासी निकाय ने संस्थान की उपलब्धियों की समीक्षा की, प्रमुख संस्थागत मामलों को मंजूरी दी और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जल एवं भूमि प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। शासी निकाय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को मंजूरी दी और क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं शैक्षणिक गतिविधियों में नेरीवॉल्म की निरंतर प्रगति की सराहना की।

इस वर्ष के दौरान नेरीवॉल्म ने 2,800 से अधिक प्रतिभागियों को लाभान्वित करने वाले 71 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करके अपने प्रशिक्षण लक्ष्यों को पार कर लिया, साथ ही जल संसाधन प्रबंधन में अपने विशेषीकृत एम.टेक. और पी.एच.डी. कार्यक्रमों को भी जारी रखा।

शासी निकाय ने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) में महत्वपूर्ण संशोधनों पर भी विचार-विमर्श किया, जिसमें ‘उपलब्धि समीक्षा समिति’ का मूल्यांकन पांच साल के बजाय हर तीन साल में आयोजित करने और अकादमिक गवर्नेंस को और मजबूत करने के लिए ‘तकनीकी सलाहकार समिति’ (टीएसी) का नाम बदलकर ‘अकादमिक सलाहकार समिति’ (एएसी) करने का प्रस्ताव शामिल है।

बैठक में बाह्य रूप से वित्त पोषित परियोजनाओं में नेरीवॉल्म की बढ़ती भूमिका की समीक्षा की गई, जिसमें असम में सतत सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र जल के मार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव, जल संचयन योजना और उत्तर पूर्व भारत में पारंपरिक जल प्रबंधन प्रथाओं पर अध्ययन शामिल हैं।

बैठक के प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में से एक सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म की स्थापना का प्रस्ताव था, जिसका उद्देश्य उत्तर पूर्व भारत में अनुसंधान, जमीनी प्रदर्शनों और सिंचाई प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देना है।

शासी निकाय ने एम.टेक और पी.एच.डी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति सहायता, संकाय विकास, अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने और जल संसाधन प्रबंधन में जलवायु और जीआईएस-आधारित अनुप्रयोगों में अध्ययन को आगे बढ़ाने से संबंधित सिफारिशों पर भी चर्चा की।

इसके अलावा, बैठक में ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव से प्रभावित परिवारों के सामने आने वाली आजीविका की चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा की गई तथा विस्थापित समुदायों के लिए स्थायी पुनर्वास और आजीविका संबंधी हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन, क्षमता निर्माण और राज्यों की अधिक भागीदारी के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जल एवं भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नेरीवॉल्म की भूमिका को और मजबूत करने के लिए अपने मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन नेरीवॉल्म के निदेशक और शासी निकाय के सदस्य सचिव डॉ. उज्ज्वल मणि हजारिका द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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पीके/केसी/आईएम/केएस

 


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