इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
डिजिटल इंडिया भाषा प्रभाग (डीआईबीडी) और आयुष मंत्रालय ने आयुष पारिस्थितिकी तंत्र में बहुभाषी दक्षता के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
प्रविष्टि तिथि:
14 MAY 2026 7:45PM by PIB Delhi
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) और आयुष मंत्रालय ने भारत की राष्ट्रीय भाषा के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भाषिनी प्लैटफॉर्म के माध्यम से आयुष पारिस्थितिकी तंत्र में बहुभाषी डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 'भाषिनी सेवा संचालन-भाषिनी सहयोग' की शुरुआत की है। इस सहयोग से आयुष प्लैटफॉर्म और सेवाओं में बहुभाषी एआई मॉडल, अनुवाद एपीआई, ध्वनि-आधारित प्रौद्योगिकियों (वॉइस-इनेबल्ड टेक्नोलॉजी) और भाषा उपकरणों को एकीकृत किया जा सकेगा, जिससे सुलभता और लोगों की सहभागिता में वृद्धि होगी।

इस पहल का उद्देश्य आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं में बहुभाषी शासन और सेवा वितरण को मजबूत करना है, जिससे देशभर में आयुष सेवाओं और डिजिटल प्लैटफाॅर्मों तक व्यापक पहुंच संभव हो सके।
इस साझेदारी के तहत आयुष मंत्रालय और भाषिनी टीम भाषिनी एडिट, मित्रा, ऐप मित्रा और प्रवक्ता जैसी पहलों के साथ-साथ कई भाषाओं में अनुवाद एपीआई एकीकरण, आयुष के लिए विशिष्ट एआई भाषा मॉडल, बहुभाषी शब्दावली और भाषादान के तहत डेटासेट संवर्धन को भी सक्षम बनाएंगे।
भाषिनी टीम ने बहुभाषी एआई के उपयोग के मामलों को भी प्रदर्शित किया, जिनमें एआई-संचालित प्रिस्क्रिप्शन जनरेशन, श्रमिक वर्ग के लिए आवाज-आधारित सीवी निर्माण, श्रुतलेख के माध्यम से वास्तविक समय प्रतिलेखन और भाषा प्रौद्योगिकियां शामिल हैं जो राष्ट्रीय डिजिटल ज्ञान भंडार की परिकल्पना के तहत भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत के संरक्षण में सहायक हैं।
चर्चा के दौरान आयुर्वेद और यूनानी जैसी पद्धतियों में भारतीय भाषा के एआई मॉडल और प्रासंगिक स्वास्थ्य देखभाल संचार को मजबूत करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों में अपार सभ्यतागत ज्ञान और सांस्कृतिक गहराई समाहित है। समावेशी स्वास्थ्य सेवा वितरण और जन जागरूकता के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह ज्ञान प्रत्येक भारतीय भाषा में सुलभ हो। भाषिनी के साथ इस सहयोग के माध्यम से हमारा लक्ष्य आयुष पारिस्थितिकी तंत्र में बहुभाषी क्षमताओं को सुदृढ़ करना, मजबूत डोमेन-विशिष्ट शब्दावली विकसित करना और भविष्य के लिए तैयार एआई सिस्टम बनाना है जो भाषाई सीमाओं के पार नागरिकों को निर्बाध रूप से सहायता प्रदान कर सकें।
स्वास्थ्य सेवा वितरण में बहुभाषी एआई की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता गर्ग ने कहा कि भाषिनी के साथ आज का समझौता ज्ञापन आयुष मंत्रालय और देश के व्यापक स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। हम लंबे समय से आयुष ग्रिड और हमारे डिजिटल स्वास्थ्य प्लैटफॉर्मों के भीतर उन्नत बहुभाषी प्रौद्योगिकियों के उपयोग की परिकल्पना करते रहे हैं। भाषिनी द्वारा प्रस्तुत एआई-आधारित डॉक्टर-मरीज संवाद विशेष रूप से भारतीय भाषाओं में दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच को मजबूत करने में भाषा एआई की अपार क्षमता को दर्शाता है। हम इस सहयोग को व्यापक, प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य सेवा वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि मानते हैं।
इस साझेदारी पर डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि समावेशी डिजिटल शासन का भविष्य ऐसी प्रणालियों के निर्माण पर निर्भर करता है जो प्रत्येक नागरिक की भाषा को समझ सके और उसमें संवाद कर सके। आयुष मंत्रालय के साथ इस सहयोग के माध्यम से हमारा लक्ष्य बहुभाषी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को मजबूत करना, विषय-विशिष्ट शब्दावली विकसित करना, भाषा मॉडल में सुधार करना और एआई-संचालित समाधानों को सक्षम बनाना है जो भारत के विविध भाषाई परिदृश्य में लोगों को सहजता से सहायता प्रदान कर सकें।
आयुष ग्रिड के ओएसडी नमन गोयल ने बताया कि योग पोर्टल और आयुष ग्रिड के मुख्य पोर्टल, जिसे एमएआईएसपी कहा जाता है, में पहले से ही भाषिनी अनुवाद प्लगइन का एक संस्करण एकीकृत किया जा चुका है और देश भर के उपयोगकर्ताओं से उनकी स्थानीय भाषाओं में उत्साहजनक प्रतिक्रिया और व्यापक पहुंच प्राप्त हुई है। इस समझौता ज्ञापन के बाद आयुष ग्रिड इकोसिस्टम के तहत आने वाले सभी पोर्टल भाषिनी से जुड़ जाएंगे, जिससे आयुष सेवाएं भाषा की बाधाओं को पार करते हुए देश के हर कोने तक पहुंच सकेंगी।
यह सहयोग भाषा संबंधी डेटा के योगदान, जागरूकता पहलों और सार्वजनिक मंचों में भाषा प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के माध्यम से आयुष संस्थानों में बहुभाषी एआई को अपनाने को भी बढ़ावा देगा।
यह समझौता ज्ञापन समावेशी और सुलभ एआई-संचालित शासन और स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए भारत के जनसंख्या-स्तरीय भाषा अवसंरचना के रूप में भाषिनी की भूमिका को और मजबूत करता है।
2014 में स्थापित आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी है।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) के बारे में:
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) द्वारा संचालित डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन और भाषा प्रौद्योगिकी के लिए भारत की राष्ट्रीय पहल है। नैशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी (एनएचएलटी) के माध्यम से भाषिनी शासन, सार्वजनिक मंचों और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में स्केलेबल स्पीच और टेक्स्ट-आधारित एआई सेवाएं सक्षम बनाती है। यह प्लैटफॉर्म 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित करता है। प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक निष्कर्षों को संसाधित करता है और 36 भारतीय भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है। डीआईबीडी ओपन-सोर्स नवाचार, बहुभाषी एआई अनुसंधान, डेटासेट निर्माण, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और शैक्षणिक सहयोग को भी प्रोत्साहित करता है, जिससे भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलती है।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2263083)
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