सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय
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गैर-पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या 9 करोड़ से अधिक हुई जिससे आर्थिक विकास को गति मिल रही है


असंगठित क्षेत्र में 15 करोड़ से अधिक रोजगार

डिजिटल कामकाज को गति मिली: 10 में से 8 प्रतिष्ठान ऑनलाइन और कैशलेस

प्रविष्टि तिथि: 21 MAY 2026 4:00PM by PIB Delhi

स्नैपशॉट:

  • प्रतिष्ठानों की संख्या और कुल रोजगार दोनों में पिछले वर्ष की इसी तिमाही (जनवरी-मार्च) की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि।
  • प्रतिष्ठानों की अनुमानित संख्या 9.16 करोड़, इसमें पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 16.69 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि।
  • अनिगमित (असंगठित) क्षेत्र में रोजगार 15 करोड़ के आंकड़े के पार, मुख्य कारण अन्य सेवा क्षेत्र जिसमें रोजगार में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि।
  • गैर-कृषि क्षेत्र के गैर-निगमित संस्थानों में लगभग 81 प्रतिशत में उद्यमशीलता उद्देश्यों के लिए इंटरनेट का उपयोग।
  • लगभग 81 प्रतिशत प्रतिष्ठानों ने नकदी रहित लेनदेन के तरीके अपनाए।
  • इस क्षेत्र में महिला कार्यबल की संख्या प्रभावशाली और कुल रोजगार का 29 प्रतिशत से अधिक।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय – एनएसओ ने जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के लिए गैर-कृषि क्षेत्र के त्रैमासिक अनुमान जारी किए हैं।

उच्च आवृत्ति के बेहतर संकेतक उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय वर्ष 2025 से गैर-कृषि क्षेत्र के गैर-निगमित क्षेत्रों से संबंधित प्रमुख निष्कर्षों पर त्रैमासिक बुलेटिन प्रकाशित कर रहा है। वर्तमान बुलेटिन, जनवरी-मार्च 2026 के लिए गैर-निगमित (असंगठित) क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन, गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण का त्रैमासिक संस्करण है और नियमित अंतराल पर प्रमुख अनुमान प्रदान करता है। गैर-निगमित (असंगठित) क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन की शुरुआत भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक पर नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितपक्षकारों को समय पर उपयोगी डेटा उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

जबकि गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण वित्तीय और गैर-वित्तीय संकेतकों के व्यापक समूह पर विस्तृत वार्षिक अनुमान प्रकाशित करना जारी रखेगा, वहीं गैर-निगमित (असंगठित) क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन उसी ढांचे का उपयोग करते हुए गैर-कृषि उद्यमों के आकार, संरचना और रोजगार प्रोफाइल पर आवधिक त्रैमासिक अनुमान प्रदान करता है। इस क्षेत्र में अल्पकालिक बदलावों को दर्शाना त्रैमासिक आंकड़ों का उद्देश्य है।

गैर-कृषि क्षेत्र निगमित नहीं है पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रमुख योगदानकर्ता, रोजगार का वृहद् स्रोत और स्थानीय उद्यमशीलता एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं का महत्वपूर्ण चालक बना हुआ है। इसे देखते हुए, एनएसओ ने 2021-22 में एएसयूएसई (गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण) को एक वार्षिक सर्वेक्षण के रूप में शुरू किया, जिसके बाद इस क्षेत्र पर तीन और वार्षिक सर्वेक्षण किए गए, जो इस क्षेत्र की संरचना और संचालन में व्यापक वार्षिक जानकारी प्रदान करते हैं।

यह प्रेस नोट जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही के लिए त्रैमासिक बुलेटिन से संबंधित है, जिसे मंत्रालय की वेबसाइट (https://mospi.gov.in) पर उपलब्ध करा दिया गया है।

एएसयूएसई 2026 की व्यापकता, नमूना पद्धति और डेटा संग्रह तंत्र का संक्षिप्त अवलोकन एंडनोट (अंत में दी गई टिप्पणी) में दिया गया है।

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के परिणामों की मुख्य विशेषताएं :

असंगठित क्षेत्र में विकास की मजबूत गति

गैर-कृषि क्षेत्र में गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 16.69 प्रतिशत की वृद्धि रही। जनवरी-मार्च 2026 के दौरान गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की अनुमानित संख्या बढ़कर 9.16 करोड़ हो गई, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.85 करोड़ थी। वृद्धि में ग्रामीण क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान रहा, जिसमें 20.46 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। शहरी क्षेत्र में इस अवधि में 12.59 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कार्यबल रुझान: जनवरी-मार्च 2026 में गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार 15.17 करोड़ तक पहुंच गया, जो पहली बार 15 करोड़ के आंकड़े के पार पहुंचा है। इस क्षेत्र में पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 15.51 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि रही, जो विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या के एक बड़े हिस्से के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करने में इसका महत्व दर्शाता है।

तिमाही आंकड़ों से प्राप्त प्रतिष्ठानों और श्रमिकों की अनुमानित संख्या चित्र 1 में प्रस्तुत है:

कार्यबल संरचना में बदलाव:

जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में गैर-निगमित क्षेत्र में कार्यरत स्वामित्वधारी लोगों का कार्यबल में सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जो कुल श्रमिकों का 60.97 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 58.29 प्रतिशत था। इसके विपरीत, किराए के श्रमिकों में मामूली गिरावट आई और यह इसी अवधि में 26.86 प्रतिशत से घटकर 24.77 प्रतिशत रह गया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सहायक गैर-पंजीकृत उद्यमों के बढ़ते महत्व में ग्रामीण कार्यबल की वृद्धि और भी स्पष्ट रही। इस अवधि के दौरान इसमें 21.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्र में 10.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कई गैर-पंजीकृत इकाईयां आकस्मिक श्रम, प्रवासी श्रमिकों और सहायकों पर निर्भर करती हैं, जो अक्सर मौसमी कृषि कार्य में शामिल होते हैं और जब इस क्षेत्र में गतिविधि मजबूत होती है तो या तो उद्यमी के रूप में या एक श्रमिक के रूप में लौट आते हैं, जिससे रोजगार और प्रतिष्ठानों में वृद्धि होती है।

व्यापक गतिविधि श्रेणियों (विनिर्माण, व्यापार और अन्य सेवाएं) के अंतर्गत प्रतिष्ठानों और श्रमिकों का प्रतिशत हिस्सा क्रमशः चित्र 2 और चित्र 3 में दर्शाया गया है।

चित्र 2: व्यापक गतिविधि श्रेणियों के अंतर्गत प्रतिष्ठानों का प्रतिशत हिस्सा (जनवरी-मार्च 2026)

चित्र 3: व्यापक गतिविधि श्रेणियों में श्रमिकों का प्रतिशत हिस्सा (जनवरी-मार्च 2026)

 

 

असंगठित अर्थव्यवस्था को गति देने वाला सेवा क्षेत्र:

जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में असंगठित सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़ोतरी रही और पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में प्रतिष्ठानों की संख्या और रोजगार दोनों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। प्रतिष्ठानों की संख्या में 24.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसी अवधि में इस क्षेत्र में कार्यबल 31.13 प्रतिशत बढ़ा।

असंगठित अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की सुदृढ़ व्यापकता इस क्षेत्र में बढ़ती उद्यमशीलता गतिविधि, रोजगार के प्रमुख चालक के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका और स्थानीय सेवाओं की बढ़ती मांग दर्शाता है।

महिला भागीदारी:

इस क्षेत्र में महिला कार्यबल की उपस्थिति प्रभावशाली बनी रही, जो कुल रोजगार का लगभग 29 प्रतिशत है। यह गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण 2025 की इसी तिमाही में इसकी संख्या से थोड़ा अधिक है। यह महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करने और समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने में इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

डिजिटल युक्तिकरण और औपचारिकीकरण को बढ़ावा:

गैर-कृषि क्षेत्र के गैर-निगमित उद्यमों में इंटरनेट का उपयोग अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रतिष्ठानों के कामकाज में डिजिटल तौर-तरीके अपनाने की उत्साहजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण 2026 के नए संशोधित सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मॉड्यूल द्वारा एकत्रित उपयोग संबंधी आंकड़ों के अनुसार गैर-निगमित क्षेत्र के लगभग 81 प्रतिशत प्रतिष्ठानों ने उद्यमशीलता के उद्देश्यों के लिए इंटरनेट का उपयोग किया। इसके अलावा, लगभग 81 प्रतिशत प्रतिष्ठानों ने ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, प्वाइंट ऑफ सेल उपकरणों (दुकानों पर बिलिंग, नकद रहित भुगतान जैसे कार्ड और क्यूआर कोड स्वीकार करने और इन्वेंट्री को प्रबंधित करने में सहायक) और अन्य डिजिटल भुगतान तंत्रों सहित नकदी रहित लेनदेन के तरीकों को अपनाया है।

किसी भी प्रकार का पंजीकरण कराने वाली फर्मों का 41.37 प्रतिशत होने के अनुमान के साथ यह नियामक तंत्रों के साथ उद्यमों का बढ़ता एकीकरण दर्शाता है।

जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही के लिए गैर-निगमित (असंगठित) क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन (क्यूबीयूएसई) के प्रमुख संकेतक निम्नलिखित तालिका में प्रस्तुत हैं:

सूचक

जनवरी-मार्च 2026

प्रतिष्ठानों की संख्या

9,16,472

स्वामित्व और साझेदारी प्रतिष्ठानों का प्रतिशत

98.95

किराए पर काम करने वाले कर्मचारियों के प्रतिष्ठानों का प्रतिशत

13.54

श्रमिकों की संख्या

15,17,055

कार्यरत स्वामित्व का प्रतिशत

60.97

किराए के श्रमिकों का प्रतिशत

24.77

अन्य श्रमिकों (जिनमें अवैतनिक पारिवारिक श्रमिक भी शामिल हैं) का प्रतिशत

14.26

 

टिप्पणी: गैर-निगमित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) में कवरेज, नमूनाकरण योजना और डेटा संग्रह तंत्र की संक्षिप्त जानकारी:

ए. व्यापकता :

ए.1. भौगोलिक दृष्टि से, सर्वेक्षण में (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ गांवों को छोड़कर, जहां पहुंचना मुश्किल है) पूरे भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र शामिल हैं।

ए.2. क्षेत्रवार- इस सर्वेक्षण में तीन क्षेत्रों से संबंधित गैर-कृषि प्रतिष्ठान - विनिर्माण, व्यापार और अन्य सेवाएं शामिल हैं।

ए.3. स्वामित्व अनुसार- स्वामित्व, साझेदारी (सीमित देयता भागीदारी को छोड़कर), सहकारी समितियों, समितियों/ट्रस्टों आदि से संबंधित गैर-निगमित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों को इस सर्वेक्षण में शामिल किया गया है।

बी. नमूनाकरण योजना :

यह सर्वेक्षण बहुस्तरीय स्तरीकृत नमूनाकरण योजना के तहत संचालित किया गया है। इसमें प्रथम चरण की इकाईयां (एफएसयू) ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना गांव हैं (ग्रामीण केरल को छोड़कर, जहां पंचायत वार्डों को एफएसयू माना गया है) और शहरी क्षेत्रों में शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (यूएफएस) खंड हैं, जिनका समय-समय पर नवीनीकरण किया जाता है। अंतिम चरण की इकाईयां (यूएसयू) दोनों क्षेत्रों के प्रतिष्ठान हैं। बड़े एफएसयू के मामले में, ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समूहों और शहरी क्षेत्रों में उप-खंडों के रूप में नमूनाकरण का मध्यवर्ती चरण तैयार किया गया है।

सी. नमूना आकार :

सम्पूर्ण भारत स्तर पर, जनवरी 2026 से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान 5,998 प्रथम चरण इकाइयों (ग्रामीण क्षेत्र में 2,408 गांव और शहरी क्षेत्र में 3,590 यूएफएस खंड) का सर्वेक्षण किया गया। इसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के ग्रामीण क्षेत्रों की प्रथम चरण इकाइयों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों के कारण क्षेत्र कार्य में उप-चरण प्रतिबंध लागू नहीं किए गए। इसी अनुरूप, इस बुलेटिन के लिए सर्वेक्षण किए गए प्रतिष्ठानों की संख्या (इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/क्षेत्रों को छोड़कर) कुल 1,72,845 है (ग्रामीण क्षेत्रों में 74,824 और शहरी क्षेत्रों में 98,021)।

डी. डेटा संग्रह तरीके :

यह सर्वेक्षण क्षेत्र के आधार पर किया गया और ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के चुने हुए संघीय उपक्रमों (एफएसयू) में प्रतिष्ठानों की सूची बनाई गई। इन एफएसयू में सूचीबद्ध प्रतिष्ठानों में से , नमूना डिजाइन के अनुसार आवश्यक संख्या में प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण किया गया। अधिकतर, चयनित प्रतिष्ठानों से मासिक संदर्भ अवधि से संबंधित मौखिक पूछताछ द्वारा डेटा एकत्रीकरण किया गया। सर्वेक्षण के लिए डेटा कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (सीएपीआई) का उपयोग कर टैबलेट पर संग्रहीत किया गया।

ई. एएसयूएसई के पहले जारी अनुमानों के साथ त्रैमासिक परिणामों की तुलनीयता और सावधानियां:

इस त्रैमासिक बुलेटिन में प्रस्तुत अनुमान विशेष रूप से विचाराधीन तिमाही के लिए गैर-कृषि क्षेत्र के गैर-निगमित क्षेत्रों से संबंधित हैं। यद्यपि एएसयूएसई के नमूना डिजाइन में एक क्षेत्र सीमा का उपयोग कर त्रैमासिक अनुमान तैयार करने का प्रावधान है, फिर भी त्रैमासिक नमूना आकार वार्षिक नमूना आकार से काफी कम है। यह बुलेटिन नमूने की पर्याप्तता और अनुमानों की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

सर्वेक्षण को प्रासंगिक बनाए रखने और हितधारकों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के निरंतर प्रयास के तहत, एएसयूएसई 2026 में कुछ बदलाव किए गए हैं। एएसयूएसई प्रश्नावली के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) खंड को व्यापक रूप से पुनर्रचित किया गया है और इसमें नीति-उन्मुख प्रश्नों को शामिल किया गया है ताकि इस क्षेत्र में आईसीटी के उपयोग की सीमा और प्रकृति को बेहतर ढंग से समझा जा सके। इसके अलावा, एएसयूएसई 2026 ने एनआईसी 2008 के स्थान पर एनआईसी 2025 को अपनाया है, जिसका उपयोग एएसयूएसई के पिछले चरणों में किया गया था (एक सरकारी प्रणाली है जिसके तहत भारत की सभी आर्थिक गतिविधियों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। इसका प्रयोग सर्वेक्षण, जनगणना, नीति-निर्माण व आर्थिक विश्लेषण में किया जाता है। यह एनआईसी वर्ष 2008 की जगह अब नवीन व अपडेटेड वर्गीकरण है)। इसके परिणामस्वरूप, मोटर वाहनों के रखरखाव और मरम्मत तथा मोटरसाइकिल, मोपेड, स्कूटर और तिपहिया वाहनों के रखरखाव और मरम्मत जैसी कुछ गतिविधियां, जिन्हें एनआईसी 2008 में व्यापार के अंतर्गत माना जाता था, अब सेवा क्षेत्र (एनआईसी 2025) के अंतर्गत मानी जा रही हैं और इसी अनुसार, इन गतिविधियों में संलग्न सभी प्रतिष्ठानों को एएसयूएसई 2026 में अन्य सेवाओं में गिना जाता है।

इसलिए, संभावित सैंपलिंग भिन्नता, गतिविधि स्तरों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव और वर्गीकरण एवं प्रश्नावली में परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए, उपयोगकर्ताओं को त्रैमासिक गतिविधियों की व्याख्या सावधानीपूर्वक करनी चाहिए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एएसयूएसई गैर-कृषि अर्थव्यवस्था के केवल एक भाग, विनिर्माण, व्यापार और सेवाओं (निर्माण को छोड़कर) में कार्यरत प्रतिष्ठानों के गैर-निगमित खंड की ही गणना करता है। अतः, क्यूबीयूएसई में प्रस्तुत गैर-निगमित क्षेत्र के त्रैमासिक परिणामों के रुझान, संपूर्ण अर्थव्यवस्था संबंधी त्रैमासिक सकल घरेलू उत्पाद अनुमानों से सीधे मेल नहीं खा सकते हैं। जहां आवश्यक हो, त्रैमासिक बुलेटिन में प्रस्तुत अनुमानों के साथ विश्वास अंतराल भी दिए गए हैं ताकि अनुमानों की सटीक व्याख्या हो सके।

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही का त्रैमासिक बुलेटिन मंत्रालय की वेबसाइट (https://www.mospi.gov.in) पर उपलब्ध है। प्रकाशन/रिपोर्ट देखने के लिए नीचे दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करें।

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