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तृतीय भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन


हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी में वृद्धि

प्रविष्टि तिथि: 26 MAY 2026 12:10PM by PIB Delhi

 

 

प्रस्तावना

भारत और नॉर्डिक देशों ने 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान एक बहुआयामी साझेदारी आरंभ की थी। साझेदारी नवाचार, हरित प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य भारत के आर्थिक विकास में सहायता करना, सतत विकास मार्गों को बढ़ावा देना, कौशल और प्रतिभा विकास को सुदृढ़ करना और एक जीवंत नवाचार इको-सिस्टम को बढ़ावा देना है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई पहलों में सहयोग के माध्यम से नॉर्डिक विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का भी लाभ उठा सकता है। 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ने इस रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया। शिखर सम्मेलन ने व्यापार, निवेश, डिजिटल नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत किया। दोनों पक्षों ने सामुद्रिक अर्थव्यवस्था, समुद्री सहयोग, एसटीईएम अनुसंधान, गतिशील आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा साझेदारी में सहयोग का भी विस्तार किया। आर्थिक साझेदारी के अतिरिक्त, भारत कूटनीति के सॉफ्ट पावर टूल के माध्यम से भी नॉर्डिक देशों से जुड़ा है।

 

भारत की आर्कटिक नीति

नॉर्डिक देशों के साथ गठबंधन भारत की आर्कटिक नीति का एक अनिवार्य घटक है। आर्कटिक में जलवायु परिवर्तन, विशेष रूप से आर्कटिक बर्फ का पिघलना, मानसून सहित मौसम की स्थिति और वर्षा के पैटर्न को बेहद प्रभावित कर सकता है। ये परिवर्तन भारत की आर्थिक, खाद्य और जल सुरक्षा और 1300 से अधिक द्वीप क्षेत्रों और समुद्री सुविधाओं की स्थिरता के लिए अत्यधिक विघटनकारी हो सकते हैं।

भारत की आर्कटिक नीति जिसका शीर्षक  'भारत और आर्कटिक: सतत विकास के लिए साझेदारी का निर्माण' है, छह  स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित है: भारत के वैज्ञानिक अनुसंधान और सहयोग का सुदृढ़ीकरण, जलवायु और पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक और मानव विकास, परिवहन और कनेक्टिविटी, शासन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आर्कटिक क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमता निर्माण।

 

नॉर्डिक देशों के साथ भारत का बढ़ता सहयोग

नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत का जुड़ाव पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हो गया है। हरित विकास, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, नवाचार और सतत विकास में साझा प्राथमिकताएं इस परिवर्तन को आगे बढ़ा रही हैं। नॉर्डिक देश उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता लाते हैं, जबकि भारत परिमाण, बाजार, प्रतिभा और विनिर्माण क्षमताएं प्रदान करता है। साथ में यह साझेदारी भारत के हरित परिवर्तन, डिजिटल विस्तार, आर्कटिक जुड़ाव और गतिशील आर्थिक विकास रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रही है।

 

डेनमार्क:

  • भारत और डेनमार्क के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 2.05 बिलियन डॉलर था।
  • उसी वर्ष डेनमार्क को भारत का निर्यात 1.06 बिलियन डॉलर और आयात 0.98 बिलियन डॉलर था। सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार 4.25 बिलियन डॉलर तक पहुंचा; 2025 में भारत से निर्यात 1.9 बिलियन डॉलर और आयात 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
  • डेनमार्क में भारतीय निवेश का कुल मूल्य लगभग 560 मिलियन डॉलर है।
  • डेनमार्क में आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न सेक्टरों में लगभग 40 भारतीय कंपनियां विद्यमान हैं और डेनमार्क की लगभग 200 कंपनियों ने भारत में शिपिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और स्मार्ट शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है।
  • 2024 तक डेनमार्क से भारत में संचयी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह 1.413 बिलियन डॉलर था।
  • भारत और डेनमार्क ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2022) और "भारत और डेनमार्क से चांदी के खजाने" प्रदर्शनी  जैसी पहलों के माध्यम से सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत किया।
  • आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान प्रमुख सांस्कृतिक लोक संपर्क कार्यकलापों  में ध्वजारोहण, त्योहार, स्कूल कार्यक्रम, खेल कार्यशालाएं और डेनमार्क भर में व्यापक प्रवासी भागीदारी शामिल हैं, जो सॉफ्ट पावर दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस डेनमार्क के शहरों में व्यापक रूप से मनाया जाता है, जिसमें व्यापक स्तर पर भागीदारी होती है और कोपेनहेगन में "सभी के लिए योग" जैसे प्रमुख कार्यक्रम होते हैं।
  • डेनमार्क में लगभग 21,000 का भारतीय समुदाय सक्रिय रूप से सभी व्यवसायों में योगदान देता है। आरहूस में आरहूस यूनिवर्सिटी के पास गांधी प्लेन (गांधी पार्क), इंडियाकाज (भारत के नाम पर सड़क) और नेहरू रोड जैसे सार्वजनिक स्थान दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत लोगों और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक हैं।
  • 2026 में भारत और डेनमार्क के नेताओं ने गतिशीलता, साझेदारी को मजबूत करने और लोगों के बीच परस्पर आदान-प्रदान का विस्तार करने पर चर्चा की।

 

फ़िनलैंड:

  • 2024-25 में फिनलैंड के साथ वस्तुओं में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा 1.017 बिलियन डॉलर थी। उसी वर्ष फिनलैंड को भारत का निर्यात 356.37 मिलियन डॉलर और आयात 660.70 मिलियन डॉलर था।
  • 2025 में सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार 1.9 बिलियन डॉलर था। भारत से फिनलैंड में निवेश प्रवाह 2 बिलियन डालर से अधिक है, जो कई महत्वपूर्ण अधिग्रहणों और साझेदारियों से प्रेरित है। भारत में 100 से अधिक फिनलैंड की कंपनियों का परिचालन है। भारत में फिनलैंड का निवेश बढ़कर 4 बिलियन डॉलर हो गया है।
  • फिनलैंड में भारतीय संस्कृति की मजबूत उपस्थितीय है, योग केंद्र, प्रदर्शन कला, भारतीय नृत्य स्कूल और सांस्कृतिक संघ संगीत, नृत्य और त्योहारों में नियमित कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं, जो भारतीय दूतावास द्वारा समर्थित हैं। दूतावास 'तेर्वे-नमस्ते' श्रृंखला के तहत भारतीय छात्रों के साथ नियमित रूप से बैठक आयोजित करता है।
  • फिनलैंड में भारतीय समुदाय लगभग 33,000 है, जिसकी आईटी क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति है और लगभग 2,400 छात्र उच्च शिक्षा से जुड़े हैं।
  • पर्यटन और यात्रा संपर्क बढ़ रहे हैं, फिनलैंड के पर्यटक गोवा, केरल और स्वर्ण मंदिर जैसे गंतव्यों की यात्रा कर रहे हैं, जो ई-वीजा सुविधाओं और हेलसिंकी एवं नई दिल्ली के बीच सीधी उड़ानों द्वारा समर्थित हैं।
  • 2026 में भारत और फिनलैंड ने अपनी प्रौद्योगिकी और नवाचार इको-सिस्टम में भारतीय पेशेवरों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया।

 

आइसलैंड:

  • आइसलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा 2024-25 में 77.06 मिलियन डॉलर थी।
  • उसी वर्ष आइसलैंड को भारत का निर्यात 66.01 मिलियन डॉलर और आयात 11.05 मिलियन डॉलर था।
  • भारतीय संस्कृति विशेष रूप से योग, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, पेंटिंग, फिल्मों और भोजन में आइसलैंड में लोकप्रिय है। आइसलैंड में करीब 600 भारतीय नागरिक हैं।
  • 2026 में भारत और आइसलैंड ने सहयोग की समीक्षा की और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने, सांस्कृतिक और पर्यटन आदान-प्रदान का विस्तार करने और आर्कटिक अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

 

नॉर्वे:

  • भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 1.05 बिलियन डॉलर था।
  • भारत ने इसी अवधि में 630 मिलियन डॉलर के सामान का निर्यात किया और 420 मिलियन डॉलर के सामान का आयात किया।
  • सेवाओं में व्यापार करीब 1 बिलियन डॉलर का रहा है।
  • नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (जीपीएफजी) ने भारतीय पूंजी बाजार में लगभग 28 बिलियन डालर (दिसंबर 2025 तक) का निवेश किया है
  • इसके अलावा, अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के दौरान नॉर्वे से एफडीआई प्रवाह 764 मिलियन डॉलर था।
  • भारत और नॉर्वे लगभग 30,000 लोगों के भारतीय समुदाय के माध्यम से लोगों से लोगों के बीच घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं।
  • भारतीय छात्र, शोधकर्ता और 40 से अधिक भारतीय संघ नॉर्वे में सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रूप से योगदान करते हैं।
  • टर्बैंडजेन और ओस्लो कलर फेस्टिवल जैसे आयोजन  नॉर्वे में भारतीय संस्कृति और सॉफ्ट पावर के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं।

स्वीडन:

  • भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 6.96 बिलियन डॉलर था।
  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक स्वीडन से संचयी एफडीआई इक्विटी प्रवाह 2.596 बिलियन डॉलर था।
  • भारत में स्वीडन की लगभग 280 कंपनियों की व्यावसायिक उपस्थिति है, जबकि 2024 में व्यावसायिक उपस्थिति वाली भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है।
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य, योग, आयुर्वेद, भारतीय त्योहारों और सिनेमा जैसी भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को स्वीडन में व्यापक रूप से सराहा जाता है।
  • स्वीडन के शहरों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव भारत के बढ़ते सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है।
  • वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव नमस्ते स्टॉकहोम हजारों आगंतुकों को आकर्षित करता है और भारतीय कला और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
  • भारतीय और स्वीडन के विश्वविद्यालयों के बीच सक्रिय भागीदारी है। उप्साला में इंडोलॉजी का अध्ययन लगभग 200 साल पुराना है, जो भारतीय सभ्यता के साथ विद्वानों के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
  • खेल और सिनेमा भी द्विपक्षीय संबंधों में योगदान करते हैं। 2021 में, भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने स्वीडन का दौरा किया, भारतीय डेविस कप टीम ने 2024 में दौरा किया, स्वीडिश फिल्म निर्माता लेवन अकिन ने 2024 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी मैडल प्राप्त किया।
  • लगभग 88,000 लोगों का भारतीय प्रवासी समूह भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में मदद करने के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

भारत और नॉर्डिक देश नवाचार, स्थिरता और रणनीतिक विश्वास के आकार की साझेदारी का निर्माण कर रहे हैं। यह संबंध अब स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, गतिशील आपूर्ति श्रृंखला, अनुसंधान और समुद्री सहयोग तक फैला हुआ है। भारत के परिमाण और प्रतिभा के साथ मिलकर नॉर्डिक विशेषज्ञता दीर्घकालिक सहयोग के लिए मजबूत अवसर पैदा करती है। बढ़ते संस्थागत, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ यह साझेदारी धीरे-धीरे समावेशी, प्रौद्योगिकी-संचालित और टिकाऊ वैश्विक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है।

 

तीसरा नॉर्डिक शिखर सम्मेलन: दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में भविष्य के कदम

तीसरे नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच चर्चा हुई। पिछले दशक के दौरान द्विपक्षीय व्यापार प्रवाह में चार गुना वृद्धि, निवेश प्रवाह में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि और भारत के आर्थिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव की सराहना करते हुए, भारत और नॉर्डिक देश अपने संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी  में बदलने पर सहमत हुए हैं। इस पहल के तहत, भारत की निम्नलिखित योजना है:

  • भूतापीय ऊर्जा और मत्स्य पालन में आइसलैंड के साथ सहयोग करना,
  • समुद्रीय अर्थव्यवस्था और आर्कटिक सहयोग में नॉर्वे के साथ भागीदारी करना और
  • सामुद्रिक और स्थिरता क्षेत्रों में नॉर्डिक देशों के साथ जुड़ना।

इसके अतिरिक्त, उन्नत विनिर्माण, रक्षा, दूरसंचार, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य-तकनीक, अनुसंधान और नवाचार और आर्कटिक और ध्रुवीय अनुसंधान में सहयोग पर भी चर्चा की गई।  यह साझेदारी भारत और नॉर्डिक क्षेत्र दोनों में आर्थिक विस्तार, प्रौद्योगिकीय प्रगति और रोजगार सृजन के अवसर पैदा करते हुए सतत विकास में सहायता करती है। दोनों देशों ने बहुपक्षीय संस्थानों में तत्काल सुधारों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया और आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता का रुख दोहराया। हाल ही में भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता  (टीईपीए) भारत-नॉर्डिक संबंधों में एक "नए स्वर्ण युग" की शुरुआत करेगा।

 

शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम

शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, डिजिटल नवाचार, टिकाऊ विनिर्माण और जलवायु कार्रवाई पर केंद्रित हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी में अपने संबंधों को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करते हुए व्यापार, निवेश, अनुसंधान सहयोग, गतिशील आपूर्ति श्रृंखलाओं और लोगों के बीच परस्पर विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई।

 

परिणाम 1: भारत-नॉर्डिक हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी

हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी भविष्य में टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के उपयोग और अंगीकरण, सतत विकास और प्रबंधन, संसाधन उपयोग अनुकूलन और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करेगी। डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने से शासन और सेवाओं के निर्बाध वितरण पर और प्रभाव पड़ेगा। इसके परिणाम का जलवायु परिवर्तन शमन और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त यह हरित रोजगार भी सृजित करेगा, शासन को मजबूत करेगा और नॉर्डिक देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाएगा। पानी के सतत उपयोग, इसके पुनर्चक्रण और बेहतर जल प्रबंधन में सहयोग से जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में सहायता मिलेगी। सहयोगात्मक अनुसंधान और शिक्षा से भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को अधिक अनुभव मिलेगा, साथ ही अनुसंधान की गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी।

 

परिणाम 2: भारत-ईएफटीए टीईपीए: भारत-नॉर्डिक संबंधों पर प्रभाव

भारत ईएफटीए टीईपीए बाजार पहुंच में सुधार करने, व्यापार बाधाओं को कम करने, व्यापार और निवेश प्रवाह को प्रोत्साहित करने और मूल्य श्रृंखलाओं को एकीकृत करने में मदद करेगा। एफटीए, नॉर्डिक देशों के साथ एक मजबूत गठबंधन के साथ, रोजगार सृजन, नवाचार और सतत विकास का समर्थन करेगा।

 

परिणाम 3: जलवायु कार्रवाई में पहल

जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में पहल, शमन पर केंद्रित है। इस क्षेत्र में सहयोग से केवल जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिलेगी बल्कि हरित रोजगार के अवसर सृजित होंगे, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा और अधिक निवेश आकर्षित होगा। परिणामस्वरूप, यह अधिक टिकाऊ अर्थव्यवस्था के निर्माण में योगदान देगा और दीर्घकालिक आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।

 

परिणाम 4: आर्कटिक में भारत-नॉर्डिक सहयोग

सहकारी पहल भारत की आर्कटिक नीति का हिस्सा है। ध्रुवीय अनुसंधान में सहयोग का जलवायु प्रणालियों, पर्यावरण संरक्षण, स्थिरता और द्वीपों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। जलवायु परिवर्तन से निपटना और एक स्थिर आर्कटिक सुनिश्चित करना भारत के मानसून पैटर्न, पर्यावरण संतुलन, स्थिरता और सबसे महत्वपूर्ण, कृषि उत्पादकता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

परिणाम 5: एसटीईएम क्षेत्रों में अनुसंधान सहयोग

अनुसंधान पहल रोजगार के नए अवसरों के सृजन, अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) के विस्तार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने और अकादमिक सहयोग और अनुसंधान गुणवत्ता को मजबूत करने में योगदान देगी। 6जी सहित अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने से डिजिटल अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिलेगा तथा देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे में वृद्धि होगी।

 

परिणाम 6: सामुद्रिक अर्थव्यवस्था में सहयोग

 

मजबूत सामुद्रिक अर्थव्यवस्था में सहयोग स्थिरता सुनिश्चित करते हुए, रोजगार सृजित करते हुए, व्यापार को बढ़ाते हुए और दीर्घकालिक पर्यावरण तथा जलवायु गतिशीलता में सहायता करते हुए आर्थिक विकास को मजबूत करता है। सामुद्रिक अर्थव्यवस्था महासागर और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है। सामुद्रिक अर्थव्यवस्था में सहयोग समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देकर, समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करके और भागीदार देशों के बीच क्षेत्रीय सामुद्रिक सुरक्षा को बढ़ाकर एक स्थिर और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में भी योगदान देता है।

 

परिणाम 7: प्रतिभा की गतिशीलता:

अनुसंधान और शिक्षा में सहयोग भारतीय छात्रों, शिक्षाविदों, छात्रों और शोधकर्ताओं को नए दृष्टिकोण और वैश्विक शिक्षण वातावरण के लिए अधिक से अधिक अनुभव प्रदान करेगा। अनुसंधान में सहयोग बढ़ने से अनुसंधान आउटपुट की गुणवत्ता और मात्रा में भी वृद्धि होगी। यह कौशल बढ़ाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, नवाचार और व्यवसायों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने में भी मदद करेगा।

 

परिणाम 8 रक्षा उत्पादन में सहयोग

भारतीय रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देकर रक्षा औद्योगिक सहयोग विकसित करने से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान और नवाचार में मदद मिलेगी, घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, अधिक रोजगार सृजित होगा, निर्यात और रक्षा उत्पादन की दक्षता में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त यह रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने में मदद करेगा।

 

एक मजबूत भारत-नॉर्डिक साझेदारी की ओर

भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंध लगातार विकसित और सुदृढ़ हो रहे हैं। हाल के वर्षों में कई द्विपक्षीय पहलों के माध्यम से इसे मजबूत किया गया है। शिखर सम्मेलन के परिणामों का उद्देश्य इस साझेदारी को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी में और आगे बढ़ाना है। शिखर सम्मेलन ने दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी, जलवायु परिवर्तन शमन, व्यापार और निवेश संबंधों, डिजिटल नवाचार, सामुद्रिक अर्थव्यवस्था, समुद्री सहयोग, एसटीईएम सहयोग और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन प्रदान किया है। इस बढ़ते जुड़ाव को भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) द्वारा और मजबूत किया गया है। इससे भारत और नॉर्डिक क्षेत्र के बीच दो-तरफा आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की उम्मीद है और साथ ही सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की पहल के अतिरिक्त, सॉफ्ट पावर दृष्टिकोण ने संबंधों को गहरा और मजबूत करने में मदद की है।

 

संदर्भ:

  1. विदेश मंत्रालय

 

  1. पत्र सूचना कार्यालय

 

  1. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

 

  1. डीडी न्यूज

 

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