आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने भलस्वा डंपसाइट के सुधारात्मक कार्य की प्रगति की समीक्षा की
लगभग 70 एकड़ के कुल डंपसाइट क्षेत्र में से लगभग 43 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त कर किया
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न और स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप, पुराने कचरे के सुधारात्मक निस्तारण हेतु वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जा रहा है
लैंडफिल के सुधारात्मक निस्तारण के उपरांत पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग जनहित एवं सामुदायिक कल्याण के लिए विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए : श्री मनोहर लाल
प्रविष्टि तिथि:
28 MAY 2026 1:50PM by PIB Delhi
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री, श्री मनोहर लाल ने आज भलस्वा डंपसाइट का दौरा कर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा किए जा रहे वर्षों पुराने अनुपचारित कचरे (पुराने कचरे) के सुधारात्मक निस्तारण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। सुधारात्मक कार्यों के संबंध में स्थल पर जाकर किया गया यह उनका दूसरा प्रत्यक्ष निरीक्षण एवं समीक्षा दौरा था।
भलस्वा डंपसाइट को केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा डंपसाइट रेमेडिएशन एंड एक्शन प्लान (डीआरएपी) पहल के अंतर्गत अपनाया गया है। यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-यू 2.0 के तहत देशभर की प्रमुख पुरानी डंपसाइटों के सुधारात्मक निस्तारण हेतु प्रारंभ किया गया राष्ट्रव्यापी मिशन मोड कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक सुधारात्मक निस्तारण, पर्यावरणीय पुनर्स्थापन तथा मूल्यवान शहरी भूमि के पुनः उपयोग के माध्यम से “लक्ष्य शून्य डंपसाइट” प्राप्त करना है। श्री मनोहर लाल ने 15 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भलस्वा डंपसाइट को अपनाने की औपचारिक घोषणा की थी, जिसके पश्चात 17 सितंबर 2025 को “स्वच्छता ही सेवा 2025” अभियान के अंतर्गत स्थल पर औपचारिक शुभारंभ एवं निरीक्षण किया गया। इस अभियान के तहत भलस्वा डंपसाइट को त्वरित सुधारात्मक निस्तारण एवं रूपांतरण के लिए चुना गया।
आज के दौरे के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को भलस्वा डंपसाइट पर बायोमाइनिंग एवं भूमि पुनः प्राप्ति गतिविधियों की प्रगति से अवगत कराया। जून 2022 में इस स्थल पर लगभग 73 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा मौजूद था तथा जुलाई 2022 से मिशन मोड में निरंतर बायोमाइनिंग कार्य संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 15 हजार मीट्रिक टन अपशिष्ट का प्रसंस्करण किया जा रहा है। 26 मई 2026 की स्थिति के अनुसार, इन सतत् बायोमाइनिंग एवं सुधारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप, पुराने एवं नए कचरे सहित, शेष कचरे की मात्रा घटकर लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन रह गई है, जिसका अभी प्रसंस्करण किया जाना शेष है। निरंतर बायोमाइनिंग एवं सुधारात्मक कार्यों के कारण लगभग 70 एकड़ के कुल डंपसाइट क्षेत्र में से लगभग 43 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त कर लिया गया है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न और स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप, पुराने कचरे के सुधारात्मक निस्तारण हेतु वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जा रहा है, साथ ही आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिए समानांतर प्रयास भी किए जा रहे हैं।


भलस्वा लैंडफिल स्थल के दौरे के दौरान माननीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने चल रहे बायोमाइनिंग कार्यों, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों, अग्नि निवारण प्रबंधों, लीचेट प्रबंधन प्रणालियों तथा डंपसाइट के पूर्ण सुधारात्मक निस्तारण की भावी कार्ययोजना की व्यापक समीक्षा की। आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय परिस्थितियों में सुधार तथा जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु परियोजना को शीघ्र पूर्ण किए जाने के महत्व पर बल देते हुए माननीय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को भलस्वा लैंडफिल स्थल का पूर्ण सुधारात्मक निस्तारण सितंबर तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने आगे निर्देश दिया कि प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले नए कचरे का तत्काल प्रसंस्करण किया जाए जिससे आगे अपशिष्ट का संचय न हो तथा इस बात पर बल दिया कि फिर से पुराना कचरा जमा नहीं होना चाहिए।
माननीय मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि लैंडफिल के सुधारात्मक निस्तारण के उपरांत पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग जनहित एवं सामुदायिक कल्याण के लिए विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए।
इस दौरे में एमसीडी के आयुक्त श्री संजीव खिरवार; एमसीडी के अभियंता-प्रमुख श्री पी. सी. मीणा; एमसीडी के मुख्य अभियंता श्री के. के. शर्मा; एमसीडी के उपायुक्त श्री साशी सहित एमसीडी के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
*************
पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2266237)
आगंतुक पटल : 87