विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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उत्प्रेरक जो रूपांतरित होकर प्रदर्शन करता हो

प्रविष्टि तिथि: 04 JUN 2026 3:38PM by PIB Delhi

वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले उत्प्रेरक की संरचना किस प्रकार स्वयं को रूपांतरित करती है, जिससे जल के विद्युत अपघटन से हरित हाइड्रोजन का उत्पादन होता है।

यह कुशल, कम लागत वाले हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रभावी, अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रोकैटलिस्ट्स के डिज़ाइन को तैयार करने में सहायक हो सकता है।

भविष्य के स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उत्पादन करने के सबसे सरल उपायों में से एक है कि पानी को बिजली की मदद से विखंडित किया जाए लेकिन यह प्रक्रिया केवल तब सही प्रकार से काम कर सकती है जब हमारे पास अच्छे उत्प्रेरक हों जो प्रतिक्रिया को तेज और कुशल बना सकें।

सामान्य अवधारण यह ह कि उत्प्रेरक स्थिर एवं अपरिवर्तनीय होते हैं जो बिना किसी बदलाव के अपना काम करते हैं लेकिन वास्तव में उपयोग के दौरान कई उत्प्रेरक बहुत अलग तरह का व्यवहार करते हैं। अभिक्रिया के दौरान उनकी संरचना में परिवर्तन हो सकता है और वे इस परिवर्तन से अपनी कार्य क्षमता में बहुत प्रभावित भी हो सकते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु की डॉ. नीना एस. जॉन और पीएचडी स्कॉलर पलाश ज्योति गोगोई के नेतृत्व में एक शोध दल ने जर्मनी के कील विश्वविद्यालय के डॉ. चंद्रराज एलेक्स और भारत-कोरिया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईकेएसटी), बेंगलुरु के डॉ. सतदीप भट्टाचार्जी और डॉ. श्वेतरेखा राम के सहयोग से व्यापक रूप से अध्ययन कर पृथ्वी में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले उत्प्रेरक, मोलिब्डेनम कार्बाइड (एमओ2सी) के व्यवहार में नई अंतर्दृष्टि प्रदान की है जिससे  यह पता चला है कि हाइड्रोजन विकास प्रतिक्रिया (एचआर) के दौरान इसकी संरचना किस प्रकार से विकसित होती है।

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हेरोइन्फ्रारेड हाइड्रोक्लोराइड के दौरान इन सीटू XAS का उपयोग करके Mo2C में उत्प्रेरक पुनर्निर्माण को ट्रैक करने का योजनाबद्ध निरूपण

उन्नत प्रायोगिक तकनीकों के संयोजन के माध्यम से, जिसमें इन सिटु एक्स-रे अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (XAS) और इन सिटु रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी शामिल हैं, साथ ही सैद्धांतिक गणनाएँ भी, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया कि हाइड्रोजन उत्पन्न प्रतिक्रिया (HER) के दौरान Mo2C कैसे बदलता है।

इस अध्ययन से पता चलता है कि हाइड्रोजन अभिक्रिया (HER) के दौरान Mo2C की संरचनात्मक स्थिरता बनी नहीं रहती, बल्कि इसमें गतिशील पुनर्निर्माण होता है, जिससे ऑक्सीजन-रहित मोलिब्डेनम ऑक्साइड (MoOx) डोमेन बनते हैं। ये पुनर्निर्मित प्रजातियाँ MoO2 के समान स्थानीय समन्वय वातावरण प्रदर्शित करती हैं और हाइड्रोजन उत्पादन को सुगम बनाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिवर्तन हानिकारक नहीं बल्कि लाभकारी है, जिससे गतिविधि और स्थिरता में सुधार होता है। इसके विपरीत, Mo/Mo2C हेटरोस्ट्रक्चर में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया तेज़ होती है, जिसके परिणामस्वरूप घुलनशील मोलिब्डेट स्पीशीज़ का निर्माण होता है और उत्प्रेरक गतिविधि में कमी आती है। यह तुलना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि Mo2C में नियंत्रित पुनर्निर्माण उत्प्रेरक दक्षता को बढ़ावा देता है, जबकि Mo/Mo2C में अनियंत्रित ऑक्सीकरण से गिरावट आती है।

इन अवलोकनों के अलावा, यह शोध कार्य स्थानीय परमाणु संरचना, गतिशील रेडॉक्स विकास एवं विद्युत उत्प्रेरक प्रदर्शन के बीच एक मूलभूत संबंध स्थापित करता है, जिससे वास्तविक परिचालन स्थितियों में उत्प्रेरकों के कार्य करने के तरीके के बारे में नई अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। इससे पता चलता है कि वास्तविक सक्रिय अवस्था मूल पदार्थ के बजाय उसी स्थान पर निर्मित होती है, जिससे गतिशील पुनर्निर्माण को उत्प्रेरक गतिविधि को नियंत्रित करने वाले एक प्रमुख कारक के रूप में पहचाना जा सकता है और कुशल, अगली पीढ़ी के विद्युत उत्प्रेरकों के डिजाइन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

मटेरियल होराइजन्स में प्रकाशित इस शोध से पता चलता है कि गतिशील पुनर्निर्माण का उपयोग करके Mo2C उत्प्रेरकों की पूरी क्षमता को किस प्रकार से उजागर किया जा सकता है, जिससे कुशल, सतत एवंर लागत प्रभावी हाइड्रोजन उत्पादन प्रणालियों का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1039/D5MH02010G

पीके/केसी/एके


(रिलीज़ आईडी: 2269171) आगंतुक पटल : 78
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