पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया गया, इसमें जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलता और स्थायी विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई

प्रविष्टि तिथि: 05 JUN 2026 10:00PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस 2026 को 'प्रकृति से प्रेरित - जलवायु के लिए - हमारे भविष्य के लिए' विषय के साथ मनाया। इस अवसर पर प्राधिकरण ने ‘भारतीय परिप्रेक्ष्य से डिजिटल अनुक्रम सूचना का अवलोकन’ शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक जारी किया, एनबीए की नई और बेहतर वेबसाइट की शुरुआत की गई और ‘स्वैच्छिक प्रमाणन योजना – पहुंच और लाभ साझाकरण के लिए प्रोत्साहन’ (वीसीएस-आई-एबीएस) का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य देश में जैव विविधता प्रबंधन प्रणाली के प्रति जागरूकता, पारदर्शिता, हितधारकों की भागीदारी और कार्यान्वयन को मजबूत करना है।

भारत सरकार की प्रमुख पहल 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से पौधे लगाने के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ।

देश भर में राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी)/केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी)  ने आर्द्रभूमि, जैव विविधता हॉटस्पॉट, नदी तट, शहरी हरित क्षेत्र और अन्य पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों सहित विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों में पौधरोपण अभियान चलाए, जिससे पारिस्थितिक बहाली और संरक्षण में सहायता मिली।

तमिलनाडु सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उन्नत वन्यजीव संरक्षण संस्थान के निदेशक श्री ए. उदयन (आईएफएस) ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने 'मितव्ययी समृद्धि' की अवधारणा पर बात की और एक ऐसी जीवनशैली की वकालत की जो कल्याण और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोच-समझकर उपभोग करने की आदतें अपनाकर ही सतत समृद्धि प्राप्त की जा सकती है और व्यक्तियों से आग्रह किया कि वे अपने पर्यावरणीय प्रभाव, विशेष रूप से ऊर्जा के उपयोग और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभाव पर विचार करें।

तमिलनाडु सरकार के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग के विशेष सचिव श्री अनुराग मिश्रा (आईएफएस) ने विशिष्ट अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। उन्होंने राज्य भर में वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाने में तमिलनाडु वन विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और पारंपरिक कपड़े के थैलों के उपयोग करने और प्लास्टिक पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई 'मींडम मंजपाई' पहल की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों सहित स्थायी कार्यप्रणाली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने में जैव विविधता संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया और हितधारकों को जिम्मेदार उपभोग, प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और जल एवं ऊर्जा के संरक्षण के माध्यम से स्थायी जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत सरकार के लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) मिशन पर भी प्रकाश डाला, जो संसाधनों के सचेत और योजनाबद्ध उपयोग की वकालत करता है और व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूक कार्यों को बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राज्य जैव विविधता बोर्डों/केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों के साथ मिलकर जैविक विविधता के संरक्षण, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग, उनके उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभ के समान वितरण और जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दूरदर्शिता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। वन, आर्द्रभूमि और तटीय क्षेत्रों जैसे पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करके ये संस्थान कार्बन को अवशोषित करने, जल चक्र को विनियमित करने और जलवायु संबंधी खतरों के प्रति समुदाय की सहनशीलता बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।

ये प्रयास कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के लक्ष्यों को विशेष रूप से पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता के सतत उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाने से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान देते हैं। उपरोक्त प्रयास जैव विविधता और जलवायु के पारस्परिक लाभों के माध्यम से पेरिस समझौते के उद्देश्यों को प्राप्त करने में योगदान देते हैं। वे जैव विविधता- जलवायु परिवर्तन से निपटने के माध्यम से पेरिस समझौते के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाते हैं और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति का समर्थन करते हैं, जिनमें एसडीजी 13 (जलवायु परिवर्तन), एसडीजी 15 (भूमि पर जीवन), एसडीजी 14 (जल के नीचे जीवन) और एसडीजी 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) शामिल हैं, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से स्थायी, जलवायु-अनुकूल और समावेशी विकास के लिए भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है।

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पीके/केसी/आरकेजे


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