शिक्षा मंत्रालय
भारत इनोवेट्स 2026 की नीस में शुरूआत, भारत-यूरोप डीप-टेक साझेदारियों को मिली नई गति
कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, नवप्रवर्तकों और शिक्षाविदों की भागीदारी
नवाचार-केंद्रित समझौता ज्ञापनों और संयुक्त घोषणाओं सहित 30 से अधिक साझेदारियों पर हस्ताक्षर किए गए
उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की मूल्य-आधारित संस्थापकों और प्रौद्योगिकी नेतृत्व को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है : श्री एनआर नारायण मूर्ति
प्रविष्टि तिथि:
15 JUN 2026 4:45PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉ ने कल फ्रांस के ‘पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स डी नीस’ में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ के पहले संस्करण का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। भारत सरकार की एक पहल और शिक्षा मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित यह दूरगामी प्रभाव वाला कार्यक्रम भारत के डीप-टेक नवोन्मेषकों और वैश्विक हितधारकों के बीच नवाचार-आधारित साझेदारियों को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है।

भारत इनोवेट्स 2026 भारत के तेजी से बढ़ते नवाचार इकोसिस्टम को प्रदर्शित करता है। इसमें 120 भारतीय इनोवेशकों, 15 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) और वैश्विक सीईओ, उद्योग जगत के दिग्गजों और प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्मों सहित 500 से अधिक वैश्विक हितधारकों को शामिल हैं। यह कार्यक्रम 13 प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति पर प्रकाश डालता है, जिनमें उन्नत कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण शामिल हैं।

भारत इनोवेट्स 2026 के पहले दिन का कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय नवाचार गलियारों और डीप-टेक साझेदारियों को मजबूत करने पर केंद्रित मुख्य भाषणों, रणनीतिक संवादों और वैश्विक उद्योग चर्चाओं से समृद्ध रहा। दोपहर के सत्र की शुरूआत इंफोसिस के संस्थापक श्री एन.आर. नारायण मूर्ति के उद्घाटन भाषण से हुई। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकी उद्यमों के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मात्र 250 अमेरिकी डॉलर से शुरू हुई इंफोसिस की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दीर्घकालिक और सफल संस्थानों का निर्माण पूरक प्रतिभाओं, साझा मूल्यों, अनुशासित नवाचार, पारदर्शी गवर्नेंस और विश्वास के आधार पर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मूल्य-आधारित संस्थापकों और प्रौद्योगिकी नेतृत्व को तैयार करें, जो ज्ञान को नवाचार में, नवाचार को उद्यम में और उद्यम को दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव में परिवर्तित कर सकें।

इस कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में 30 से अधिक साझेदारियों पर हस्ताक्षर करना शामिल रहे, जिनमें नवाचार-केंद्रित समझौता ज्ञापन (एमओयू) और संयुक्त घोषणाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारतीय और वैश्विक नवाचार इकोसिस्टम के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना है। इनमें भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों/इनक्यूबेटरों और फ्रांसीसी/वैश्विक इनक्यूबेटरों के बीच नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान सहयोग और स्टार्टअप समर्थन को बढ़ावा देने के लिए 12 समझौते तथा भारतीय नवोन्मेषकों के लिए प्रौद्योगिकी विकास, व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए अग्रणी वैश्विक निगमों के साथ 16 समझौते शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 13 फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों ने छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, नवाचार सहयोग, अकादमिक सहयोग और प्रतिभा विकास में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के साथ साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही, अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग और ला फाउंडेशन डसॉल्ट सिस्टम्स द्वारा स्थापित भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज के माध्यम से भारत की अटल टिंकरिंग लैब ढांचे को फ्रांस तक विस्तारित किया जाएगा। इसके अंतर्गत फ्रांस में पहली स्कूल इनोवेशन लैब स्थापित की जाएगी तथा दोनों देशों के युवा नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
"वैश्विक भलाई हेतु एआई: विश्वसनीय, समावेशी और स्केलेबल एआई के लिए एक गलियारा बनाना" विषय पर एक पैनल चर्चा में उद्योग, निवेश और अनुसंधान संस्थानों के प्रमुख व्यक्तियों को एक साथ लाया गया, ताकि जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संप्रभु प्रौद्योगिकी विकास के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोणों का पता लगाया जा सके।

इसके बाद "भारत और यूरोप: सीमा-रहित डीप टेक" और "वैश्विक डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर" विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सीमा-पार नवाचार इकोसिस्टम, उद्यम वित्तपोषण, व्यावसायीकरण के रास्ते और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारत इनोवेट्स 2026 के "वैश्विक भलाई के लिए एआई" विषय पर आयोजित पूर्ण सत्र में भारत और फ्रांस के उद्योग और नीति निर्माताओं ने एक विश्वसनीय, समावेशी और विस्तार योग्य एआई कॉरिडोर के निर्माण का आह्वान किया। चर्चा के दौरान किफायती और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप एआई समाधानों की क्षमता, संप्रभु एआई क्षमताओं के बढ़ते महत्व और प्रौद्योगिकी एकाधिकारों के बजाय ओपन-सोर्स सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने एक सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एआई इकोसिस्टम के निर्माण के लिए संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, निवेश साझेदारी और एक विस्तारित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन पर जोर दिया।
उच्च स्तरीय भागीदारी, रणनीतिक संवादों और सहयोग के नए अवसरों के साथ भारत इनोवेट्स 2026 के पहले दिन ने नवाचार इकोसिस्टम में गहरे वैश्विक जुड़ाव का मंच तैयार कर दिया।
इस पहल और इसमें भाग लेने वाले स्टार्टअप्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए www.bharatinnovates.in पर जाएं।
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पीके/केसी/आईएम/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2273161)
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