महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने इंदौर स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की।


केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि यह संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा

प्रविष्टि तिथि: 15 JUN 2026 6:24PM by PIB Delhi

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में तथा राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर की उपस्थिति में आज इंदौर स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (एसपीएनआईडब्‍ल्‍यूसीडी) की गतिविधियों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अपर  सचिव और संस्‍थान के निदेशक श्री वलेटी प्रेमचंद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा इंदौर क्षेत्रीय केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

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इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा प्रेरित "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम से हुई। पंचवटी की अवधारणा के अनुसार, केंद्रीय मंत्री और विशिष्ट अतिथियों द्वारा संस्थान परिसर में पांच पौधे - बरगद, पीपल, बेल, अशोक और आंवला - लगाए गए।

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केंद्रीय मंत्री ने केंद्र द्वारा संचालित गतिविधियों और उसके आगामी कार्यक्रम कैलेंडर की विस्तृत समीक्षा की। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अपर सचिव और संस्‍थान के निदेशक, श्री वलेटी प्रेमचंद ने नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध अध्ययनों तथा बाल मार्गदर्शन केंद्र (सीजीसी) की गतिविधियों और प्रगति पर एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्‍वविद्यालय के सहयोग से चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (एडीसीजीसी) में एडवांस्ड डिप्लोमा कार्यक्रम जुलाई, 2026 से शुरू होगा। इस पाठ्यक्रम को भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।

केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं—सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य—महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, संरक्षण तथा समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने सलाह दी कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभिन्न राज्यों और जिलों से भाग लेने वाले प्रतिभागियों से नियमित रूप से फीडबैक प्राप्त किया जाना चाहिए। ऐसे फीडबैक से जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक पहुंच, प्रभावशीलता तथा उन्हें वास्तव में प्राप्त होने वाले लाभों का आकलन करने में सहायता मिलेगी। इससे कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों तथा सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं से प्राप्त फीडबैक का प्रभावी उपयोग करके सरकारी नीतियों तथा मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।

चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग में एडवांस्‍ड डिप्लोमा (एडीसीजीसी) पाठ्यक्रम के संबंध में, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय और समुदाय में मनोसामाजिक (साइकोसोशल) परामर्श सेवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं का एक समूह तैयार करने में सहायता करेगा, जो बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि संस्थान के बाल मार्गदर्शन केंद्र (सीजीसी) द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें और इस केंद्र की पहुंच को और अधिक बढ़ाया जा सके।

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केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने अपने दौरे के दौरान  महाराष्ट्र के पोषण भी, पढ़ाई भी राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स (एसएलएमटी) राउंड-II प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ बातचीत की। केंद्रीय मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे चैंपियन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्य की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सखी वन स्टॉप सेंटरों के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों से संबंधित मुद्दों तथा केंद्रों के माध्यम से प्रदान की जा रही विभिन्न सहायता सेवाओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण के माध्यम से अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभावी रूप से मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि इनके लाभ अधिकतम पात्र महिलाओं और बच्चों तक पहुंच सकें।

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केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के समर्पण, प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट कार्य की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

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पीके/केसी/एमके/एसएस


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