विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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क्षेत्रीय कार्यशाला सह रिफॉर्म उत्सव - सुधारों के 12 वर्षों का उत्सव


केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने न्याय तक पहुंच को एक संवैधानिक प्रतिबद्धता कहा; उन लोगों तक पहुंचने में टेली-लॉ एवं न्याय बंधु की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिन लोगों को अभी भी न्याय तक पहुंच नहीं मिली है

‘रिफॉर्म उत्सव’ में देश में न्याय प्रदान करने वाले तंत्र को मजबूत बनाने वाले पिछले 12 वर्षों के ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी न्यायिक सुधारों का प्रदर्शन

न्याय प्रबोध – न्याय के प्रति जागरूकता : कानूनी जागरूकता, नागरिक सशक्तिकरण एवं सभी लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

प्रविष्टि तिथि: 15 JUN 2026 9:34PM by PIB Delhi

विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के न्याय विभाग ने 15 जून, 2026 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज ऑडिटोरियम में दिशा योजना के टेली-लॉ प्रोग्राम और रिफॉर्म उत्सव’: सुधारों के 12 साल का जश्न' के अंतर्गत एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कानूनी सशक्तिकरण, न्याय तक पहुंच, कानूनी जागरूकता एवं न्याय क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों पर चर्चा करने के लिए मुख्य हितधारकों को एक मंच पर लाया गया।

क्षेत्रीय कार्यशाला, प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मज़बूत करने के लिए विभाग की चल रही कोशिशों का एक हिस्सा था। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रिफॉर्म उत्सव’: सुधारों के 12 वर्षों का जश्न' था, जिसमें पिछले 12 वर्षों में न्याय विभाग की मुख्य उपलब्धियों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें न्यायिक संरचना में सुधार, अदालतों का डिजिटलीकरण, कानूनी सहायता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम, न्यायिक क्षमता निर्माण और अन्य नागरिक-केंद्रित पहलें शामिल थीं, जिनका उद्देश्य न्याय को और ज्यादा सुलभ, कुशल एवं समावेशी बनाना था।

इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता और केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए।

न्याय विभाग के सचिव ने क्षेत्रीय कार्यशाला एवं रिफॉर्म उत्सव’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये आयोजन न्याय तक पहुंच को मजबूत करने, संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने एवं नागरिकों के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि "न्याय प्रबोध – न्याय के प्रति जागरूकता" अभियान कानूनी जानकारी एवं नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, उन्होंने अनुच्छेद 39-ए के अंतर्गत समान न्याय एवं मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित करने की संवैधानिक प्रतिबद्धता को भी दोहराया। 'प्रो बोनो प्रतिज्ञा' के महत्व की बात करते हुए उन्होंने कानून विश्वविद्यालयों, कानूनी संस्थानों एवं न्याय क्षेत्र के हितधारकों के योगदान को स्वीकार किया।

उन्होंने इस कार्यक्रम को न्याय के क्षेत्र में क्रांतिकारी प्रगति का उत्सव बताया और पिछले 12 वर्षों में न्यायिक अवसंरचना, डिजिटल न्याय प्रणाली, कानूनी सहायता एवं नागरिकों पर केंद्रित सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में किए गए अहम सुधारों का उल्लेख किया। अपने संबोधन को समाप्त करते हुए सचिव ने इस बात पर बल दिया कि 'विकसित भारत@2047' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सुलभ, समावेशी एवं तकनीक-सक्षम न्याय व्यवस्था आवश्यक है।

इस कार्यक्रम में “न्याय प्रबोध – न्याय के प्रति जागरूकता” नामक एक वर्ष तक चलने वाले कानूनी जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों की बेहतर समझ प्रदान करना है। इस अभियान का उद्देश्य कानूनी साक्षरता को मजबूत करने एवं न्याय दिलाने की व्यवस्था में लोगों की ज़्यादा से ज्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिश करना है।

न्याय प्रबोध पहल के अंतर्गत, नागरिकों पर केंद्रित कई गतिविधियां शुरू की गईं, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • '90 सेकंड में अपने अधिकारों को जानें' - यह कानूनी जागरूकता वाली एक पहल है, जिसे नागरिकों के बीच कानूनी अधिकारों एवं उपायों की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।
  • न्याय क्विज़, एक संवादात्मक प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों, कानूनी संस्थाओं एवं नागरिकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, विशेषकर युवाओं एवं छात्रों के बीच; और
  • 'प्रो बोनो प्रतिज्ञा' वकीलों, विधि के छात्रों एवं कानूनी पेशेवरों को समाज के वंचित एवं कमज़ोर वर्गों के फ़ायदे के लिए अपनी जानकारी एवं विशेषज्ञता का स्वेच्छा से योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचपीएनएलयू) की प्रो बोनो (मुफ़्त कानूनी सेवा) पहलों पर भी एक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें सामुदायिक विधिक सेवा से जुड़े फैकल्टी सदस्यों एवं छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए।

इस कार्यक्रम के दौरान एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें ज़मीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं के प्रभाव का प्रदर्शन किया गया जिसमें 'टेली-लॉ' पहल से लाभ उठाने वालों की प्रेरणादायक कहानियां शामिल थीं। कार्यक्रम में 'टेली-लॉ' के लाभार्थियों के साथ सीधी बातचीत भी की गई, जिन्होंने इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समय पर कानूनी सलाह एवं मदद पाने के अपने अनुभवों को साझा किया। इससे नागरिकों एवं न्याय प्रणाली के बीच की दूरी को कम करने में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका को प्रदर्शित किया गया।

न्याय के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव मनाते हुए, इस कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था को मज़बूत करने एवं नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए बड़े कदमों पर प्रकाश डाला गया। प्रस्तुति में मुख्य उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें न्यायिक अवसंरचना का विस्तार, न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में बढ़ोतरी, यौन अपराधों से जुड़े मामलों की तीव्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना और अदालती प्रक्रियाओं को डिजिटल एवं आधुनिक बनाने के लिए ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना को लागू करना शामिल है। इन सुधारों के माध्यम से न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता एवं पहुंच में बहुत सुधार हुआ है; इसके अंतर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 4.10 करोड़ से ज़्यादा सुनवाई हुई हैं, करोड़ों मामले ई-फ़ाइल किए गए हैं, अदालती रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण हुआ है और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के माध्यम से 32 करोड़ से ज़्यादा केस रिकॉर्ड आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग ने दिशा योजना के प्रभाव को भी उजागर किया, जिसके माध्यम से 1.12 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को मुकदमे से पहले कानूनी सलाह एवं सहायता प्राप्त हुई है, खासकर महिलाओं, ग्रामीण समुदायों एवं वंचित समूहों को इससे फायदा हुआ है। प्रस्तुति में सरकार की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया जिसके अंतर्गत प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग, विधिक सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने तथा पूरे देश में ज्यादा पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित एवं सुलभ न्याय वितरण प्रणाली विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में टेली-लॉ, ई-कोर्ट, न्यायिक अवसंरचना विकास एवं विधिक सहायता कार्यक्रमों जैसी पहलों ने न्याय तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि की है और सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार किया है।

अपने संबोधन में, केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय तक पहुंच एक संवैधानिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने ज़रूरतमंद समुदायों तक पहुंचने में दिशा योजना (जिसमें टेली-लॉ एवं न्याय बंधु शामिल हैं) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री ने अनुच्छेद 39ए का उल्लेख करते हुए कानूनी जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला ताकि ज़्यादा से ज़्यादा नागरिकों को इन पहलों से लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने सरकार के कानूनी सुधारों का भी उल्लेख किया जिनमें 1,725 ​​से ज़्यादा कानूनों में संशोधन या उन्हें रद्द करना शामिल है। उन्होंने न्याय को ज़्यादा सुलभ, सस्ती एवं नागरिक-केंद्रित बनाने में प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने देशबंधु चित्तरंजन दास के ऐतिहासिक उदाहरण का उल्लेख किया जिन्होंने अलीपुर बम केस में श्री अरबिंदो घोष का निस्वार्थ भाव से बचाव किया था और 'प्रो बोनो' वकीलों को न्याय का रक्षक करार दिया और 'न्याय बंधु' अभियान में ज़्यादा से ज्यादा भागीदारी करने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने लाभार्थियों से बातचीत की और ज़मीनी स्तर पर न्याय तक पहुंच को मज़बूत करने में विभाग की पहलों के सकारात्मक असर की सराहना भी की।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने अपने संबोधन में न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया, खासकर दूर-दराज़ एवं भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों में। "न्याय प्रबोध – न्याय के प्रति जागरूकता" अभियान की शुरुआत का स्वागत करते हुए, उन्होंने कानूनी जागरूकता को न्याय तक पहुंचने की दिशा में पहला कदम बताया और ज़रूरतमंद समुदायों तक पहुंचने में प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सहयोग की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में न्याय क्षेत्र में किए गए सुधारों की सराहना की और एक ऐसी न्याय प्रणाली के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया जो ज्यादा सुलभ, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित हो। साथ ही उन्होंने युवाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया।

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पीके/केसी/एके


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