सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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नए भारत के अवसंरचनात्मक रूपांतरण के आधार स्तंभ: अद्भुत पुल

प्रविष्टि तिथि: 16 JUN 2026 6:53PM by PIB Delhi

पिछले बारह वर्षों के दौरान, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के गतिशील मार्गदर्शन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अनेक अद्भुत पुल परियोजनाएँ पूर्ण की हैं, जिन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को रूपांतरित किया है। ये अभियांत्रिकी की उत्कृष्ट कृतियाँ केवल भौतिक संरचनाएँ नहीं हैं—ये सरकार की अवसंरचना-आधारित विकास, राष्ट्रीय एकीकरण, आर्थिक प्रगति और समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की सशक्त प्रतीक हैं। पहले दुर्गम रहे क्षेत्रों को जोड़कर, यात्रा समय को कम करके और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाकर इन पुलों ने क्षेत्रीय विकास को सुदृढ़ करने तथा गतिशीलता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पुल: आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ

भारत अनेक नदियों से समृद्ध है, जो लोगों के जीवन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत ने इन विशाल नदियों पर अनेक भव्य और अद्भुत पुलों का निर्माण भी किया है। पुल हमारे दैनिक जीवन को उन तरीकों से आकार देते हैं जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते। ये उन दूरियों को कम कर देते हैं जिन्हें पार करने में कभी कई दिन लगा करते थे, दूरस्थ समुदायों तक पहुँच को संभव बनाते हैं और प्रकृति की सबसे कठिन परिस्थितियों का सामना भी करते हैं।

देशभर में फैले विशाल नेटवर्क का निर्माण करने वाले असंख्य पुलों में से कुछ प्रमुख पुल देश में हो रहे अवसंरचनात्मक विकास के पैमाने और विज़न का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक पुल अपने विशिष्ट डिजाइन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार करने के मानवीय संकल्प को दर्शाता है। आर्च ब्रिज से लेकर एक्स्ट्राडोज़्ड और केबल-स्टेड ब्रिज तक, देश को ऐसे सुपर-स्ट्रक्चर्स के निर्माण पर गर्व है जो उत्कृष्ट वास्तुकला और अभियांत्रिकीय कौशल का प्रदर्शन करते हैं।

गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना पुल

विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित 1.49 किलोमीटर लंबा ‘नया’ सरायघाट पुल असम राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क सेतु के रूप में कार्य करता है और पुराने ऐतिहासिक सरायघाट पुल के समानांतर स्थित है। इसके निर्माण से यातायात अवरोध में उल्लेखनीय कमी आई है और प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित हुआ है। यह पुल उत्तर और दक्षिण गुवाहाटी के बीच यात्रा को सुगम बनाता है, साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर पूर्व–पश्चिम कॉरिडोर के तहत आवागमन को भी सुदृढ़ करता है।

 

कोटा में चंबल नदी पर बना पुल

भारत की प्रतिष्ठित अभियांत्रिकीय उपलब्धियों में से एक राजस्थान के कोटा में चंबल नदी पर बना 6-लेन एकल तल केबल-स्टेड पुल है। 1.4 किलोमीटर लंबाई वाला यह पुल राजस्थान का पहला झूलता हुआ (हैंगिंग) पुल है और इसे अगस्त 2017 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

पुल 30 मीटर चौड़ा है तथा दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े पैदल मार्ग हैं। स्टे केबल्स अलग-अलग आवरण से ढके हुए तारों के समूह से बनी हैं, जिनमें त्रिस्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई है। बाहरी केबल नलिकाएँ वर्षा और हवा से उत्पन्न होने वाले कंपन को समाप्त करने में सक्षम हैं, जिससे संरचना में मजबूती और आयु में वृद्धि होती है।

पुल की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका पर्यावरण एवं वन्यजीव-अनुकूल डिजाइन है। छह-लेन पुल के लगभग 300 मीटर हिस्से को केबल्स के सहारे लटकाया गया है, जिससे नदी तल में किसी भी पियर (पुल स्तंभ) का निर्माण नहीं किया गया है। यह राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य की सुरक्षा के लिए किया गया है, जो संकटग्रस्त घड़ियाल, रेड-क्राउन्‍ड रूफ़ टर्टल और गेंजिस रिवर डॉल्फ़िन का प्राकृतिक आवास है।

भरूच में नर्मदा नदी पर बना पुल

नर्मदा नदी पर निर्मित, 1.34 किलोमीटर लंबा यह पुल गुजरात के भरूच में राष्ट्रीय राजमार्ग-8 (एनएच-8) पर है। यह एक एक्स्ट्राडोज़्ड पुल है, जिसके स्पैन (दो स्‍तंभों के बीच का खुला हिस्‍सा) देश के सबसे लंबे स्पैन में से एक हैं। इसे मार्च 2017 में यातायात के लिए खोला गया था तथा इसका निर्माण 34 महीनों में पूरा किया गया। यह पुल 20.8 मीटर चौड़ा है तथा संरचना के दोनों ओर 3-3 मीटर चौड़े पैदल मार्ग हैं। यह पुल गुजरात के भरूच जिले में एनएच-8 के अहमदाबाद–मुंबई खंड का हिस्सा है और इसने क्षेत्र की गति, सुरक्षा तथा आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण गति प्रदान की है।

बिहार में गंगा नदी पर बना पुल

बिहार राज्य में विशाल गंगा नदी पर बना 1.8 किलोमीटर लंबा छह-लेन पुल राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के औंटा–सिमरिया खंड पर स्थित है। इस परियोजना में भारत के सबसे चौड़े एक्स्ट्राडोज़्ड पुलों में से एक शामिल है, जिसे एकल सेगमेंटल संरचना के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें नदी के ऊपर 34 मीटर चौड़ा डेक है। इसके स्पैन की लंबाई 57 मीटर से 115 मीटर तक है तथा 70 मीटर लंबे कैंटिलीवर आर्म्स हैं, जो इस संरचना को अभियांत्रिकीय उत्कृष्टता का उदाहरण बनाते हैं।

यह पुल पुराने राजेंद्र सेतु के समानांतर बनाया गया है, जो लगभग सात दशक पहले निर्मित एक दो-लेन रेल-सह-सड़क पुल है। आयु और व्यापक मरम्मत के कारण यह भारी वाहनों के लिए उपयुक्‍त नहीं रह गया था, जिससे उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। गंगा नदी पर बना यह नया छह-लेन एक्स्ट्राडोज़्ड पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सीधा संपर्क प्रदान करता है और इसका उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा अगस्त 2025 में किया गया था।

ढोला–सादिया पुल

भूपेन हजारिका सेतु के नाम से भी जाना  जाने वाला 9.15 किलोमीटर लंबा ढोला–सादिया पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जो उत्तरी असम और पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के बीच पहली स्थायी सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करता है। बीम ब्रिज के रूप में निर्मित यह पुल लोहित नदी पर फैला हुआ है, जो ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है, और तिनसुकिया जिले के ढोला को उत्तरी सादिया से जोड़ता है। यह पुल 60 टन क्षमता वाले सैन्य टैंकों, जिनमें भारतीय सेना के अर्जुन और टी-72 मॉडल शामिल हैं, के भार को सहन करने के लिए निर्मित है। यह क्षमता इस संरचना को महत्वपूर्ण सामरिक महत्व प्रदान करती है।

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पीके/केसी/पीके

 


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