मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
केन्द्री य पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव ने मथुरा स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान का दौरा किया सचिव ने पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर जोर दिया
प्रविष्टि तिथि:
18 JUN 2026 7:50AM by PIB Delhi
केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने 17 जून, 2026 को मथुरा स्थित उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (डीयूवीएएसयू) का दौरा किया।
सचिव श्री गंगवार ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक और पशुधन विकास गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), लाइवस्टॉक फार्म कॉम्प्लेक्स (एलएफसी), विभिन्न उन्नत प्रयोगशालाओं और शिक्षण सुविधाओं सहित प्रमुख सुविधाओं का निरीक्षण किया। सचिव ने विश्वविद्यालय की विशेष बकरी इकाई का भी दौरा किया, जहां उन्होंने उन्नत प्रजनन और प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में गहरी रुचि दिखाई।
सचिव ने बकरी इकाई के भीतर स्थित अग्रणी बकरी वीर्य फ्रीजिंग सुविधा केन्द्र का भी दौरा किया। विश्वविद्यालय द्वारा श्रेष्ठ बकरी जर्मप्लाज्म के आनुवंशिक सुधार, संरक्षण और प्रसार में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए श्री गंगवार ने छोटे पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में ऐसी प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सचिव ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत परिसर में वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया। यह पहल कृषि विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक संरक्षण के प्रति साझा समर्पण दर्शाती है।
श्री गंगवार ने दीनदयाल उपाध्याय सभागार में संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के साथ एक संवादात्मक सत्र की अध्यक्षता भी की। इस सत्र में पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, उद्यमिता और इस क्षेत्र में भविष्य के विकास के अवसरों की रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा की गई।
श्री गंगवार ने अपने संबोधन में देश भर में पशु चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक नैदानिक सुविधाओं, निदान प्रयोगशालाओं, उन्नत प्रजनन प्रणालियों और प्रौद्योगिकी-आधारित पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने का आग्रह किया। उन्होंने पशुधन उत्पादकता, रोग नियंत्रण, ग्रामीण समृद्धि और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में पशु चिकित्सा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने छात्र एवं शोधकर्ता समुदाय से जमीनी स्तर के किसानों और पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाले व्यावहारिक, क्षेत्र-उन्मुख समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने अनुसंधान और कौशल विकास में विश्वविद्यालय के योगदान का उल्लेख किया। इस दौरे से संस्थागत अनुसंधान को राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों के अनुरूप विश्वविद्यालय तथा पशुपालन और डेयरी विभाग के बीच सहयोग को मजबूती मिली।
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पीके/केसी/बीयू/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2274422)
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