आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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स्वच्छ भारत मिशन - शहरी 2.0 के साथ सतत विकास की मजबूत नींव

प्रविष्टि तिथि: 23 JUN 2026 4:07PM by PIB Delhi

भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, अब स्वच्छता, सतत विकास और सर्कुलर इकॉनमी की मिसाल के रूप में एक और नई पहचान गढ़ रहा है। सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा, जिसमें संसाधनों का अधिकतम उपयोग, रीसाइकल और रीयूज़ शामिल है, अब शहरों के विकास का केंद्र बनती जा रही है। इसी सोच को अपनाते हुए भोपाल कचरे को समस्या नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देख रहा है। साथ ही, शहर में बढ़ती विज़िबल क्लीनलीनेस नागरिकों के जीवन स्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

इसी परिवर्तनकारी सोच और सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा के साथ भोपाल में एक अत्याधुनिक परियोजना विकसित की जा रही है—NTPC Dry Waste to Torrefied Charcoal Plant Bhopal। यह परियोजना आदमपुर क्षेत्र में लगभग 15 एकड़ भूमि पर स्थापित हुई है और इसकी क्षमता प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस करने की है। यह पहल न केवल शहर की स्वच्छता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि ऊर्जा उत्पादन और सर्कुलर इकॉनमी का एक नया अध्याय भी जुड़ रहा है। इस प्लांट की सबसे खास बात इसकी उन्नत टॉरिफिकेशन तकनीक है। इस तकनीक के माध्यम से सूखे कचरे को उच्च-ऊर्जा वाले टॉरिफाइड चारकोल में बदला जाता है, जो ईंधन के रूप में उपयोगी होता है। इस प्रकार, जो कचरा पहले लैंडफिल में जाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता था, वही अब ऊर्जा का स्रोत बन रहा है।

यह मॉडल “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को साकार करता है। परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसमें भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भोपाल नगर निगम की है, जबकि तकनीकी और निवेश का दायित्व NTPC Limited द्वारा निभाया जा रहा है।

इस परियोजना के कई दूरगामी लाभ हैं। सबसे पहले, यह लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को काफी हद तक कम करेगा, जिससे भूमि और पर्यावरण पर दबाव घटेगा। इसके अलावा, लैंडफिल से निकलने वाली मीथेन गैस, जो एक खतरनाक ग्रीन हाउस गैस है, उसके उत्सर्जन में भी कमी आएगी। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह खुले में कचरा जलाने की समस्या को समाप्त करने में मदद करेगी। आर्थिक रूप से भी यह परियोजना फायदेमंद है। अनुमान है कि इससे भोपाल नगर निगम को हर साल लगभग ₹4.86 करोड़ की बचत होगी, जो पहले कचरे के प्रबंधन पर खर्च होती थी। साथ ही, यह प्लांट स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।  

15 मार्च 2026 को इस प्लांट का ट्रायल रन शुरू, एक ऐतिहासिक क्षण था। शुरुआती तीन दिनों में ही लगभग 1800 टन सूखा कचरा प्लांट तक पहुंचा, जो शहर वासियों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता का प्रमाण है। यह ट्रायल चरण न केवल तकनीकी परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शहर इस बदलाव को अपनाने के लिए तैयार है। भोपाल की यह पहल केवल एक शहर की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। यह दिखाती है कि सही नीतियों, आधुनिक तकनीक और नागरिकों की भागीदारी से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रयासरत है, भोपाल का यह कदम एक उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करता है। NTPC Limited और स्थानीय प्रशासन की साझेदारी यह साबित करती है कि विकास पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता साथ-साथ चल सकते हैं। यह परियोजना न केवल कचरे की समस्या का समाधान है, बल्कि यह एक स्वच्छ और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता हुआ सशक्त कदम है।

 

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SK


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