रक्षा मंत्रालय
बहादुर सैनिकों का सम्मान
प्रविष्टि तिथि:
27 JUN 2026 7:47PM by PIB Delhi
मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ मंचों पर यह भ्रामक दावा किया जा रहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों को हाल ही में सर्वप्रथम आधिकारिक मान्यता दी गई या उनके बलिदान को पहली बार सार्वजनिक किया गया। यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है। वास्तविकता यह है कि राष्ट्र ने इन शहीद वीरों को उन खबरों के सामने आने से बहुत पहले ही समय पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दी थी। 11 मई, 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स ने इन वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए स्पष्ट रूप से कहा था कि सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके बाद इन बहादुर सैनिकों को उनके अद्वितीय साहस और बलिदान के लिए वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसकी आधिकारिक जानकारी 14 अगस्त, 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सार्वजनिक की गई थी। यह सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनकी वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को औपचारिक तथा राष्ट्रीय स्तर पर दी गई मान्यता का प्रमाण है।
साथ ही, भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी देरी के इन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके सर्वोच्च बलिदान को सम्मानपूर्वक नमन किया।
इसके बाद भी देश इन वीर नायकों को निरंतर सम्मान देता रहा है। 15 जनवरी, 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान, सेना प्रमुख ने इनमें से तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। इसी प्रकार, 8 अक्टूबर, 2025 को आयोजित एक विशेष समारोह में वायु सेना प्रमुख ने भी संबंधित वीर सैनिकों के परिजनों को वीरता सम्मान प्रदान किया। यह देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के प्रति भारतीय सशस्त्र बलों की अटूट वचनबद्धता का एक और प्रमाण है।
राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने की प्रक्रिया एक व्यवस्थित और स्पष्ट प्रोटोकॉल के तहत की जाती है। भारतीय सशस्त्र बल इस निर्धारित प्रक्रिया का पूरी सावधानी, गरिमा और सम्मान के साथ पालन करते हैं, जो दिए जा रहे सम्मान की गंभीरता के अनुरूप है। इसलिए यह कहना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
यह खेदजनक है कि इस मुद्दे पर एक ऐसी बहस छिड़ गई है, जिसे आसानी से टाला जा सकता था और जिसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। इस तरह के दावे न केवल तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत करते हैं, बल्कि शोकाकुल परिवारों को अनावश्यक पीड़ा देने और देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने का जोखिम पैदा करते हैं। सभी संबंधित पक्षों से आग्रह है कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतें व अपुष्ट जानकारी के प्रसार से बचें।
भारतीय सशस्त्र बल देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रत्येक सैनिक के सम्मान के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता पर अडिग हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ये छह वीर सैनिक राष्ट्र के नायक हैं। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। उनकी स्मृति का सम्मान हमेशा उसी गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाएगा, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
***
पीके/केसी/एनके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2278491)
आगंतुक पटल : 398