पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि के तहत भारत में समुद्री कार्यबल को मजबूत करने के साथ ही आईएमयू समुद्री शिक्षा के क्षेत्र में  वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है: सर्बानंद सोनोवाल


2014 से आईएमयू-सीईटी पंजीकरण में पांच गुना वृद्धि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की समुद्री शिक्षा में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है: सर्बानंद सोनोवाल

समुद्री भारत में नारी शक्ति की 18 गुना वृद्धि मोदी सरकार की समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है: सर्बानंद सोनोवाल

आईएमयू ने 2021 से 60 उद्योग और शैक्षणिक साझेदारियों के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है

आईएमयू ने आधुनिक मुंबई और कोलकाता परिसरों, उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) और वैश्विक अनुसंधान साझेदारियों के साथ भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त किया है

प्रविष्टि तिथि: 06 JUL 2026 8:32PM by PIB Delhi

पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री शिक्षा तंत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) विश्व के अग्रणी समुद्री विश्वविद्यालयों में से एक बनकर उभरा है, साथ ही इसने देश की दीर्घकालिक समुद्री महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप उद्योग साझेदारी, अनुसंधान, नवाचार और कार्यबल विकास को भी महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। आज यहां केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रगति की समीक्षा की गई।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, आईएमयू एक मुख्य रूप से कक्षा-आधारित संस्थान से विकसित होकर एक आधुनिक समुद्री विश्वविद्यालय बन गया है, जो अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग पर विशेष बल देता है। समुद्री उद्योग के साथ घनिष्ठ जुड़ाव ने शैक्षणिक कार्यक्रमों को बदलती क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढलने में मदद की है, साथ ही पाठ्यक्रम को अधिक उद्योग-उन्मुख और भविष्य के लिए तैयार किया है। आईएमयू ने आधुनिक पुस्तकालयों, उन्नत सिमुलेटरों और बेहतर मनोरंजन सुविधाओं के माध्यम से अपनी शैक्षणिक अवसंरचना को काफी मजबूत किया है। नवाचार परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, पेटेंटों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) विश्व के शीर्ष 10 समुद्री विश्वविद्यालयों में से एक और भारत का सर्वोच्च रैंक वाला समुद्री विश्वविद्यालय बनकर उभरा है, जो समुद्री शिक्षा को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थान बनाने पर मोदी सरकार के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय का कक्षा-केंद्रित संस्थान से अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में विकसित होना, भविष्य के लिए तैयार समुद्री कार्यबल बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। यह भी उल्लेख किया कि आईएमयू ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला है और साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को अपने पाठ्यक्रम में एकीकृत किया है।

बैठक के दौरान मांग-आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राज्य समुद्री बोर्डों और निजी उद्योग भागीदारों के साथ विश्वविद्यालय की बढ़ती भागीदारी पर भी प्रकाश डाला गया। सोनोवाल ने रेखांकित किया कि मोदी सरकार द्वारा किए गए निरंतर निवेश से आधुनिक पुस्तकालयों, उन्नत सिमुलेटरों और बेहतर छात्र सुविधाओं के माध्यम से आईएमयू की अवसंरचना को मजबूती मिली है, साथ ही नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा मिला है, जो पेटेंट की संख्या में एक से सात की वृद्धि में परिलक्षित होता है। समुद्री शिक्षा की बढ़ती लोकप्रियता की ओर इशारा करते हुए, सोनोवाल ने आईएमयू कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (आईएमयू-सीईटी) के लिए पंजीकरण की सराहना की, जो 2014 में 14,751 से बढ़कर 73,395 हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने महिला कैडेटों के नामांकन में 18 गुना वृद्धि का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने समुद्री क्षेत्र को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि पिछले एक दशक में उद्योग जगत के साथ जुड़ाव में काफी विस्तार हुआ है। आईएमयू के प्रमुख संकाय द्वारा किए गए तकनीकी परामर्श कार्य 2014 में 63.94 लाख रुपये की तीन परियोजनाओं से बढ़कर 10.78 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं तक पहुंच गए हैं। 2021 से, विश्वविद्यालय ने 22 घरेलू और चार अंतरराष्ट्रीय उद्योग साझेदारियां की हैं, साथ ही 20 घरेलू और 14 अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग भी स्थापित किए हैं, जिससे विश्वविद्यालय का वैश्विक शैक्षणिक और उद्योग नेटवर्क काफी मजबूत हुआ है।

सोनोवाल ने आगे कहा "मानव पूंजी भारत के समुद्री भविष्य की नींव है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, हम एक मजबूत ईकोसिस्टम  का निर्माण कर रहे हैं जहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शिपयार्ड, शिक्षा जगत और उद्योग एक साथ मिलकर विश्व स्तरीय कार्यबल तैयार करेंगे जो भारत की जहाज निर्माण महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाएगा और समुद्री अमृत काल विजन 2047 को साकार करेगा,"

भारत को वैश्विक जहाज निर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करने में कुशल मानव संसाधन को आधारशिला बताते हुए सोनोवाल ने कहा कि समुद्री शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग-उन्मुख कौशल विकास में निरंतर निवेश देश के दीर्घकालिक समुद्री लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में करियर के अवसरों के बारे में युवाओं में जागरूकता पैदा करने और भारत की बढ़ती नीली अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिभाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी समुद्री कौशल मेले के आयोजन का भी प्रस्ताव रखा।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “आईएमयू के विकास का अगला चरण विश्वस्तरीय अवसंरचना, अत्याधुनिक अनुसंधान और भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास पर आधारित होगा। हम अपने मुंबई पोर्ट और कोलकाता पोर्ट परिसरों का आधुनिकीकरण करेंगे, जहाज निर्माण और समुद्री कौशल में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेंगे, उद्योग और अग्रणी वैश्विक संस्थानों के साथ अनुसंधान साझेदारी को मजबूत करेंगे और उभरती प्रौद्योगिकियों में विशेष प्रशिक्षण शुरू करेंगे। समुद्री अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप ये पहल समुद्री शिक्षा, नवाचार और उच्च कुशल कार्यबल के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगी

सोनोवाल ने सभी हितधारकों से भारत के समुद्री और जहाज निर्माण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नए सिरे से तत्परता से काम करने का आग्रह किया और कहा कि वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार के लिए सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के समन्वित प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बैठक में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के सचिव विजय कुमार, आईएएस, भारतीय आइएमयू की अध्यक्ष मालिनी वी शंकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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पीके/केसी/जेएस


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