स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जूनोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना पर राष्ट्रीय बहु-हितधारक परामर्श का आयोजन किया


सरकार ने जूनोटिक रोगों की निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षण संसाधन पैकेज तथा ई-लर्निंग मॉड्यूल्‍स लॉन्‍च किए

प्रविष्टि तिथि: 06 JUL 2026 10:01PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ जूनोसिस: ए स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क विद वन हेल्थ एप्रोच विषय पर राष्ट्रीय बहु-हितधारक परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श में मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, वन्यजीव, पर्यावरण, शिक्षा-जगत तथा विकास क्षेत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया और जूनोटिक रोगों के प्रति भारत की तैयारी तथा प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि जूनोटिक रोग आज भी विश्व स्तर पर तथा भारत में जन स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार सुदृढ़ बहु-क्षेत्रीय समन्वय, आईएचआईपी 2.0 के माध्यम से एकीकृत निगरानी प्रणाली, सशक्त प्रयोगशाला नेटवर्क, कुशल मानव संसाधन, डिजिटल नवाचार तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि जूनोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्ययोजना सुशासन, निगरानी, प्रयोगशाला प्रणालियों, तैयारी एवं प्रतिक्रिया, जोखिम संचार, अनुसंधान एवं नवाचार, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा स्‍थायी वित्तपोषण को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक रणनीतिक रूपरेखा प्रदान करेगी। यह कार्ययोजना राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य कार्ययोजनाएँ तैयार करने में भी सहयोग प्रदान करेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं की अपर महानिदेशक डॉ. सुजाता चौधरी ने वन हेल्थ दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने तथा जूनोटिक रोगों के विरुद्ध भारत की तैयारी को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों एवं हितधारकों के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. (डॉ.) रंजन दास, निदेशक, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से जूनोटिक रोगों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया और एकीकृत रोग निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

उद्घाटन सत्र के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने जूनोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित दो प्रमुख तकनीकी संसाधनों—10 प्राथमिकता प्राप्त जूनोटिक रोगों पर आधारित शिक्षण संसाधन पैकेज तथा व्यापक ई-लर्निंग मॉड्यूल श्रृंखला—का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। शिक्षण संसाधन पैकेज में दस प्राथमिकता प्राप्त जूनोटिक रोगों, अर्थात् एन्थ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस, क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज, क्रीमियन-कॉन्‍गो रक्तस्रावी ज्वर, निपाह, एमपॉक्स, रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस तथा जीका को शामिल किया गया है। इन तकनीकी संसाधनों का विकास जूनोटिक रोगों की निगरानी, रोकथाम एवं नियंत्रण से जुड़े स्वास्थ्य-कर्मियों, पशु चिकित्सकों, जन स्वास्थ्य अधिकारियों तथा अन्य अग्रिम पंक्ति के हितधारकों के ज्ञान और दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।

परामर्श के दौरान विषयगत तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिनमें विशेषज्ञों ने जूनोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना के प्रारूप अध्यायों की समीक्षा की। सुशासन एवं संस्थागत तंत्र, निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली, प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण, रोकथाम एवं तैयारी, प्रकोप प्रतिक्रिया, अनुसंधान एवं नवाचार, जोखिम संचार, कार्यबल विकास, वित्तपोषण, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा कार्यान्वयन रणनीतियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयगत क्षेत्रों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

चर्चाओं के दौरान सेंटिनल निगरानी स्थलों के विस्तार के माध्यम से एकीकृत निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ करने, प्रयोगशाला नेटवर्क को मजबूत बनाने, एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) 2.0 के माध्यम से समयबद्ध डेटा साझाकरण को बढ़ावा देने तथा विभिन्न क्षेत्रों के अग्रिम पंक्ति के पेशेवरों की क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने रोग संबंधी जानकारी को सुदृढ़ करने, पूर्व चेतावनी प्रणालियों को सक्षम बनाने तथा प्रकोप की पूर्वानुमान एवं प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर भी विशेष बल दिया।

 

परामर्श से प्राप्त अनुशंसाओं का समेकन कर उन्हें जूनोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु अंतिम राष्ट्रीय कार्ययोजना में सम्मिलित किया जाएगा। यह कार्ययोजना समन्वित बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक रूपरेखा के रूप में कार्य करेगी तथा वन हेल्थ दृष्टिकोण के सिद्धांतों के अनुरूप स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित राज्य कार्ययोजनाएँ तैयार करने में राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का मार्गदर्शन करेगी।

यह परामर्श भारत के वन हेल्थ एजेंडा को आगे बढ़ाने तथा जूनोटिक रोगों के विरुद्ध देश की तैयारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, वन्यजीव तथा पर्यावरण क्षेत्रों के बीच निरंतर सहयोग को संस्थागत स्वरूप प्रदान करते हुए, राष्ट्रीय कार्ययोजना का उद्देश्य जूनोटिक खतरों की रोकथाम, पहचान तथा प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए एक सुदृढ़ एवं समन्वित रूपरेखा स्थापित करना है। इस पहल से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने, भविष्य की जन स्वास्थ्य आपात् स्थितियों के प्रति तैयारी में सुधार लाने तथा उभरते संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के वैश्विक प्रयासों में सार्थक योगदान मिलने की अपेक्षा है।

बैठक में डॉ. प्रज्ञा शर्मा, कार्यकारी निदेशक, एनएचएसआरसी; डॉ. संजय शुक्ला, सदस्य सचिव (सेवानिवृत्‍त), केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण; डॉ. नवीन गुप्ता, अपर निदेशक एवं प्रमुख, सीओएच; डॉ. सिम्मी तिवारी, संयुक्त निदेशक एवं प्रभारी अधिकारी, सीओएच; डॉ. अमर शाह; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा 5 राज्‍यों (राजस्थान, ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश) के स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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पीके/केसी/पीके


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