शिक्षा मंत्रालय
भारत में बढ़ती भवन अग्नि दुर्घटनाओं के बीच IIT Jodhpur विकसित कर रहा है भविष्य की Fire Safety Technologies
शोधकर्ताओं ने Fire Resilience, Construction Quality Management, Sustainability Assessment तथा Buildings एवं Infrastructure के Intelligent Lifecycle Management के लिए उन्नत Computational Technologies और Open-Source Digital Platforms विकसित किए।
प्रविष्टि तिथि:
07 JUL 2026 5:33PM by PIB Jaipur
देशभर में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों, ऊँची आवासीय इमारतों तथा औद्योगिक इकाइयों में लगातार हो रही भीषण आग की घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। हर वर्ष ऐसी दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान चली जाती है और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो जाती है। आमतौर पर जांच केवल आग लगने के कारणों तक सीमित रहती है, जबकि आग के बाद भवन कितना सुरक्षित है, यह एक ऐसा महत्वपूर्ण प्रश्न है जिस पर अपेक्षाकृत बहुत कम ध्यान दिया जाता है। क्या आग बुझने के बाद भी इमारत सुरक्षित रहती है? क्या किसी भवन के ढहने की आशंका का पहले से वैज्ञानिक अनुमान लगाया जा सकता है? क्या ऐसी तकनीक विकसित की जा सकती है जिससे भवन निर्माण के समय ही उन्हें Fire Resilient बनाया जा सके?
इन्हीं महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर खोजने की दिशा में Indian Institute of Technology Jodhpur (IIT Jodhpur) के शोधकर्ता अत्याधुनिक अनुसंधान कर रहे हैं।
Department of Civil and Infrastructure Engineering के Assistant Professor डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ऐसी उन्नत Computational Technologies विकसित कर रही है, जो भविष्य में भवनों की डिजाइन, सुरक्षा मूल्यांकन तथा Fire Protection के तरीके को पूरी तरह बदल सकती हैं।
यह अनुसंधान Performance-Based Structural Fire Engineering पर आधारित है। यह आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति पारंपरिक Fire Safety Guidelines से आगे बढ़कर यह समझने का प्रयास करती है कि भीषण आग के दौरान पूरी इमारत किस प्रकार व्यवहार करती है। इसके माध्यम से Engineers पहले से Structural Damage का अनुमान लगा सकते हैं, कमजोर हिस्सों की पहचान कर सकते हैं, बेहतर Structural Design तैयार कर सकते हैं तथा किसी भी संभावित आपदा से पहले भवन की Fire Resilience को बढ़ा सकते हैं।
सिर्फ आग बुझाना ही नहीं, बल्कि यह समझना भी जरूरी कि आग के दौरान भवन कैसे व्यवहार करता है
पारंपरिक Fire Safety Systems मुख्य रूप से आग का पता लगाने और उसे नियंत्रित करने पर केंद्रित होते हैं। लेकिन वास्तविक खतरा अक्सर लंबे समय तक आग के प्रभाव के कारण भवन की संरचना को होने वाली क्षति से उत्पन्न होता है। कई बार आग बुझ जाने के बाद भी इमारत के ढहने का जोखिम बना रहता है।
IIT Jodhpur की टीम ने ऐसे उन्नत Computational Models विकसित किए हैं, जो भवन के भीतर आग फैलने की प्रक्रिया का Simulation कर सकते हैं, विभिन्न Fire Scenarios में Structural Components के व्यवहार का विश्लेषण कर सकते हैं तथा आग के बाद भवन को हुई वास्तविक क्षति का वैज्ञानिक आकलन कर सकते हैं।
शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी बताता है कि कई गंभीर Structural Failures आग बुझने के बाद Cooling Phase के दौरान भी हो सकते हैं। यह वह चरण है जिसे सामान्यतः Post-Fire Inspection के दौरान नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
शोधकर्ताओं ने AI-Based Solutions भी विकसित किए हैं, जो सीमित Sensor Data की सहायता से भवन की Fire Response का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन्हें Early Warning System के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे Fire Rescue Management को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह तकनीक Disaster Management Agencies, Structural Engineers, Insurance Agencies, Urban Planners तथा Emergency Response Teams के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
Buildings के Intelligent Lifecycle Management के लिए Digital Solutions
Structural Fire Engineering के अतिरिक्त IIT Jodhpur के शोधकर्ता Building Information Modeling (BIM), Digital Twins, Internet of Things (IoT) तथा Geographic Information Systems (GIS) जैसी अत्याधुनिक Digital Technologies का उपयोग करते हुए Intelligent Building Design एवं Management Solutions विकसित कर रहे हैं।
इन तकनीकों की सहायता से भवन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी, Sustainability Assessment, Lifecycle Performance का विश्लेषण, Predictive Maintenance तथा Disaster Preparedness को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने Automated BIM-Based Platforms भी विकसित किए हैं, जो Structural Design, Sustainability Assessment, Construction Quality Management तथा Lifecycle Asset Management को एक ही Digital Platform पर एकीकृत करते हैं। इससे Architects, Engineers, Contractors, Building Owners, Facility Managers तथा Regulatory Authorities के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है और अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, टिकाऊ तथा Resilient Infrastructure के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।
डॉ. पी. रवि प्रकाश ने कहा,
**"हर बड़ी आग की घटना हमें यह याद दिलाती है कि केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है। मानव जीवन की सुरक्षा के लिए यह समझना आवश्यक है कि आग लगने से पहले, आग के दौरान और आग बुझने के बाद भवन किस प्रकार व्यवहार करता है। हमारा शोध Engineers, Policymakers तथा Disaster Management Agencies को ऐसे Advanced Computational Tools उपलब्ध कराने का प्रयास है, जिनकी सहायता से Structural Failures का पूर्वानुमान लगाया जा सके, Fire-Damaged Buildings का तेजी से वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके तथा भवन निर्माण की प्रारंभिक अवस्था से ही Fire Resilience को डिजाइन का हिस्सा बनाया जा सके।
हमारा मानना है कि भविष्य के भवन केवल Digital तरीके से डिजाइन नहीं किए जाएंगे, बल्कि पूरे Lifecycle के दौरान Intelligent तरीके से संचालित और प्रबंधित भी होंगे। BIM, AI, Digital Twins तथा Advanced Computational Methods का एकीकरण Construction Quality Management, Sustainability Assessment, Disaster Resilience और Lifecycle Asset Management के लिए नई संभावनाएँ खोल रहा है। इन तकनीकों से सभी Stakeholders के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और भविष्य में अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, टिकाऊ तथा Resilient शहरों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।"**
IIT Jodhpur में किया जा रहा यह अनुसंधान Built Environment के लिए अगली पीढ़ी की Digital Engineering को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Advanced Computational Science, Digital Twins, BIM, Artificial Intelligence तथा Open-Source Engineering Solutions के समन्वय से यह शोध भविष्य में भवनों एवं Infrastructure की Design, Construction, Monitoring तथा Lifecycle Management की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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(रिलीज़ आईडी: 2282104)
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