सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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“जब समान अवसर मिलते हैं तो प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती”: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘दिव्य कला मेला’ को आत्मनिर्भरता एवं समावेशी राष्ट्र-निर्माण का एक अभियान करार दिया

प्रविष्टि तिथि: 14 JUL 2026 8:40PM by PIB Delhi

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा, जब समान अवसर मिलते हैं तो प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने अपने इस सशक्त संदेश के साथ, आज कोलकाता के रविंद्र सदन में 31वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन किया और इसे केवल एक प्रदर्शनी नहीं  बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन करार दिया, जो दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को क्षमता में, रचनात्मकता को आजीविका में तथा आकांक्षा को आत्मनिर्भरता में परिवर्तित करता है। उन्होंने कहा कि यह मेला प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दिव्यांगजन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में समान भागीदार बनें।

वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि 14–22 जुलाई 2026 तक कोलकाता में आयोजित हो रहा 31वां दिव्य कला मेला एक ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि इसका आयोजन पहली बार भारत सरकार एवं पश्चिम बंगाल सरकार के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है। इस पहल की शुरुआत दिसंबर 2022 में हुई थी और यह पहल अब पूरे देश में फैल चुकी है, श्रीनगर से तिरुवनंतपुरम, कोच्चि से गुवाहाटी और अहमदाबाद से पटना तक और यह दिव्यांग कारीगरों एवं उद्यमियों को एक समर्पित राष्ट्रीय मंच प्रदान करती है। लगभग 40 स्टालों वाले इस आठ-दिवसीय मेले में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के कारीगर शामिल हैं। यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को भारत एवं विदेशी बाज़ारों तक पहुंच प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है, साथ ही उनमें आत्मविश्वास, सम्मान एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता की भावना को भी बढ़ावा देता है।

मंत्री ने दोहराया कि दिव्यांगजनों के प्रति सरकार का दृष्टिकोण कल्याण-आधारित मॉडल से अधिकार-आधारित सशक्तिकरण मॉडल की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव से गुज़र रहा है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक स्वरोज़गार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगभग 1.82 लाख दिव्यांग लाभार्थियों को लगभग 1,462 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना का भी उल्लेख किया, जिसके अंतर्गत प्रति वर्ष 20 दिव्यांग छात्रों का चयन विदेश में उच्च शिक्षा के लिए किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान सहायक उपकरणों के वितरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये केवल सहायक साधन नहीं हैं बल्कि गरिमा एवं आत्मनिर्भरता के उपकरण हैं।

उन्होंने नमस्ते योजना के महत्व पर भी बल दिया, जो मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देती है, स्वच्छता कर्मियों को पीपीई किट, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य बीमा एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है तथा समाजसेवी लोगों के लिए गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है।

इस अवसर पर, पश्चिम बंगाल सरकार में शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की प्रभारी मंत्री श्रीमती अग्निमित्रा पॉल ने दिव्य कला मेला को केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि गरिमा, सृजनात्मकता, आत्मसम्मान एवं समावेशी विकास के उत्सव के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि यह पहल दिव्यांग कारीगरों, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने तथा अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। पश्चिम बंगाल सरकार की इस प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हुए कि कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं छुटना चाहिए, उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, सहायक उपकरणों, दिव्यांग-अनुकूल अवसंरचना एवं दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के क्षेत्र में राज्य की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया और आशा व्यक्त किया कि केंद्र-राज्य के बीच ज्यादा सुदृढ़ सहयोग समावेशी विकास को और मजबूत करेगा।

स्वच्छता कर्मियों का दिल से शुक्रिया अदा करते हुए, श्रीमती पॉल ने उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य का सच्चा संरक्षक बताया और उनकी गरिमा, सुरक्षा, कौशल विकास तथा सामाजिक-आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करने में नमस्ते कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने "डॉ. कवच" सुरक्षा किट के वितरण की घोषणा की, जिसमें रेनकोट, टोपी, दस्ताने, जूते एवं सुरक्षात्मक मास्क शामिल हैं और समाज से अपील किया कि वह दिव्यांगजनों का मूल्यांकन उनकी सीमाओं के बजाय उनकी क्षमताओं और योगदान के आधार पर करे। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दान के पात्र नहीं हैं बल्कि राज्य और राष्ट्र की प्रगति में समान भागीदार हैं।

पश्चिम बंगाल की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती मालती रावा रॉय ने दिव्य कला मेला को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक प्रमुख पहल बताया, जो दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण एवं सामाजिक समावेशन के लिए एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि यह मेला दिव्यांग कारीगरों एवं उद्यमियों को अपने हस्तशिल्प, कलाकृतियों तथा अन्य उत्पादों का प्रदर्शन एवं विपणन करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी आजीविका, आत्मविश्वास एवं गरिमा में वृद्धि होती है। उन्होंने आगे कहा कि दिव्यांग कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम इस संदेश को सुदृढ़ करते हैं कि शारीरिक सीमाएं कभी भी प्रतिभा, रचनात्मकता या उत्कृष्टता को सीमित नहीं कर सकती है और समाज को अधिक समावेशी, सहानुभूतिपूर्ण एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

अपने स्वागत भाषण में, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा ने कहा कि 31वां दिव्य कला मेला दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार एवं पश्चिम बंगाल सरकार की पहली संयुक्त पहल है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. संदीप राठौर ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया।

दिव्य कला मेला दिव्यांग कलाकारों की असाधारण कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए निरंतर एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है।

इस कार्यक्रम में नमस्ते (नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज़्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम) योजना की उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। पूरे देश में 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा 2,81,117 कचरा बीनने वालों की पहचान की गई है। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए 87,037 पीपीई किट तथा कचरा बीनने वालों के लिए 1,84,118 पीपीई किट प्रदान की गई हैं। इसके अलावा, 76,845 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा 1,04,729 कचरा बीनने वालों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं जबकि 753 आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान, स्वच्छता कर्मियों के बीच पीपीई किट एवं आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए, जिससे उनकी सुरक्षा, गरिमा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि हुई। साथ ही, यंत्रीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देने तथा समावेशी, सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों एवं कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ किया गया।

31वें दिव्य कला मेले में उपस्थित गणमान्य लोगों में श्री रामदास अठावले, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री उमेश राय, शहरी विकास एवं नगर मामलों के राज्य मंत्री, पश्चिम बंगाल, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव आदि शामिल थे।

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पीके/केसी/एके


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