नीति आयोग
नीति आयोग ने 2035 तक भारत को एक प्रमुख बायो-इकोनॉमी पावर हाउस बनाने के लिए दस साल का रोडमैप लॉन्च किया
नीति आयोग का यह रोडमैप 2047 तक भारत को 2.6 ट्रिलियन डॉलर की बायो-इकोनॉमी बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है
प्रविष्टि तिथि:
16 JUL 2026 6:30PM by PIB Delhi
नीति आयोग ने नई दिल्ली के नैशनल मीडिया सेंटर में '2035 तक भारत को एक अग्रणी बायो-इकोनॉमी पावरहाउस बनाने का रोडमैप' लॉन्च किया। जैव प्रौद्योगिकी विभाग, एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (एबीएलई), उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के परामर्श से नीति फ्रंटियर टेक हब द्वारा तैयार किया गया यह रोडमैप 2035 तक भारत को एक अग्रणी वैश्विक जैव अर्थव्यवस्था पावरहाउस के रूप में स्थापित करने के लिए एक मिशन-मोड रणनीति निर्धारित करता है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस रोडमैप का शुभारंभ किया। इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास, नीति आयोग की सीईओ श्रीमती निधि छिब्बर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री राजेश एस. गोखले, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष और एबीएलई के अध्यक्ष श्री जी. एस. कृष्णन भी मौजूद थे।
बायोटेक्नोलॉजी भारत की विकास की अगली कड़ी के सबसे महत्वपूर्ण साधन में से एक के रूप में उभर रही है। जिस तरह डिजिटल टेक्नोलॉजी ने सूचना के स्वरूप को बदल दिया, उसी तरह बायोटेक्नोलॉजी अब दुनिया में दवाइयों, भोजन, ईंधन, केमिकल, मटीरियल और जलवायु-अनुकूल समाधानों के उत्पादन के तरीके को बदलने लगी है। भारत के पास किफायती हेल्थकेयर उत्पादों के भरोसेमंद ग्लोबल सप्लायर से एक प्रमुख ग्लोबल बायो-इकोनॉमी पावरहाउस बनने का एक निश्चित समयबद्ध वाला अवसर है।
भारत इस दशक में मजबूत नींव के साथ प्रवेश कर रहा है। देश की बायो-इकोनॉमी 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 195.3 बिलियन डॉलर हो गई है, जो राष्ट्रीय जीडीपी में 4.8% का योगदान देती है। यह रोडमैप 2035 तक इसे 691 बिलियन डॉलर और 2047 तक 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने की रणनीति तैयार करता है, जबकि 30 मिलियन से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियों का सृजन करता है और भारत को दुनिया की अग्रणी जैव प्रौद्योगिकी शक्तियों में स्थान देता है।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की बायो-इकोनॉमी 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर आज 195 अरब डॉलर से अधिक हो गई है, जो हमारे वैज्ञानिकों, उद्यमियों और बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की मजबूती को दिखाता है। इस यात्रा का अगला चरण उच्च प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण, मजबूत उद्योग संबंधों और स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु समाधान और स्थायी विनिर्माण में नए अवसरों के माध्यम से नवाचार को बड़े पैमाने पर प्रभाव में बदलने के बारे में होना चाहिए। यह रोडमैप बायोई3 नीति के दृष्टिकोण पर निर्माण करने और वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी और जैव निर्माण केंद्र के रूप में भारत के उदय को मजबूत करने के लिए एक सामयिक मार्ग प्रदान करता है।
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोवर्धन दास ने कहा कि आने वाला दशक यह तय करेगा कि क्या भारत ग्लोबल बायो-इकोनॉमी को नया रूप देगा या खुद इससे प्रभावित होगा। विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक प्रतिभा, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और एक साहसी राष्ट्रीय रोडमैप के साथ भारत 'बायोलॉजिकल सेंचुरी' (जैविक सदी) का नेतृत्व करने के लिए एक खास स्थिति में है। इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सरकार, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और निवेशकों के बीच एक मजबूत साझेदारी की आवश्यकता होगी ताकि नवाचार को वैश्विक प्रभाव में बदला जा सके।
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव श्री राजेश एस. गोखले ने इस बात पर जोर दिया कि बायो-इकोनॉमी में भारत की अगली बड़ी छलांग बढ़ती हुई इनोवेशन (नवाचार) से प्रेरित होनी चाहिए। असली मौका पूरी तरह से नई टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट और इंडस्ट्री बनाने में है और उन्हें खोज से लेकर बड़े पैमाने पर लागू करने तक ले जाने में है। एंटरप्रेन्योरशिप और एडवांस्ड बायो-मैन्युफैक्चरिंग को मिलाकर भारत दुनिया भर में मुकाबला करने वाली कंपनियां बना सकता है और बायोलॉजिकल युग के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकता है।
नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे समय की सबसे क्रांतिकारी और व्यापक प्रभाव वाली तकनीकों में से एक के रूप में उभरी है। इसके साथ ही एक और बदलाव आकार ले रहा है जो उतना ही और शायद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है और वह है प्रोग्रामेबल बायोलॉजी का उदय। हमारा मानना है कि 'बायो सेंचुरी' (जैव-युग) अगले दशक के सबसे अहम बदलावों में से एक होगी। भारत के पास अब एक ऐतिहासिक मौका है कि वह जल्द कदम उठाए और इस उभरते हुए जैविक युग के नियमों, बाजारों और मंचों को आकार देने में मदद करे।
एक मुख्य सुझाव यह है कि भारत में बायो-इकोनॉमी के विकास के अगले चरण के लिए खास तौर पर काम करने वाले मंच के तौर पर छह 'नैशनल बायो-मिशन' बनाए जाएं। जेनेइंडिया, एग्रीबायो 2.0, बायोएक्स फाउंड्री, वन हेल्थ ग्रिड, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और बायोफार्मा नेक्स्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे भारत की वैज्ञानिक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को स्वास्थ्य, कृषि, इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी, महामारी की तैयारी, ब्लू इकोनॉमी और अगली पीढ़ी के बायोफार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय क्षमताओं में बदल सकें। वे मिलकर किफायती सेल और जीन थेरेपी, जलवायु-अनुकूल फसलें और बायो-इनपुट, एआई-सक्षम बायोफाउंड्री, एकीकृत बीमारी निगरानी, समुद्री बायो-प्रोडक्ट और बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर, वैक्सीन और अगली पीढ़ी की चिकित्सा पद्धतियों की उन्नत बायो-मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।
एआई और बायोलॉजी का मेल एक अहम पहलू है। यह रोडमैप कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी, बायोफाउंड्रीज, डिजिटल ट्विन्स, बायोसेंसर नेटवर्क, रोबोटिक्स और एआई-संचालित डिजाइन-बिल्ड-टेस्ट-लर्न प्लैटफॉर्म की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है ताकि खोज में तेजी लाई जा सके, लागत को कम किया जा सके और भारत को अगली पीढ़ी की जैव प्रौद्योगिकी और जैव निर्माण में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया जा सके।
एक प्रमुख प्रस्ताव मौजूदा 1 लाख करोड़ रुपये के आरडीआई ढांचे के भीतर से 50,000 करोड़ रुपये के जैव अर्थव्यवस्था विकास कोष का निर्माण करना है। यह प्रस्तावित फंड स्केल-अप, व्यावसायीकरण, जैव निर्माण बुनियादी ढांचे, उन्नत चिकित्सा, किण्वन मंचों, जैव सामग्री, निदान और सिंथेटिक जीव विज्ञान का समर्थन करेगा।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि और जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य हितधारक शामिल हुए।
पूरा रोडमैप यहां देखा जा सकता है : https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-07/Roadmap-for-Building-India-as-a-Leading-Bioeconomy-Powerhouse.pdf
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2287527)
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