ग्रामीण विकास मंत्रालय
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वीबी-जी राम-जी योजना के तहत रोज़गार सृजन

प्रविष्टि तिथि: 24 JUL 2026 5:41PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) कार्यक्रम के कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा करती है और इसके कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाती है। महात्मा गांधी नरेगा के तहत, कानून के प्रावधानों के अनुसार काम की मांग करने वाले सभी ग्रामीण परिवारों को रोज़गार दिया गया। ग्रामीण परिवारों द्वारा दर्ज की गई रोज़गार की मांग के आधार पर, अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और वित्तीय वर्षों में उत्पन्न हुए काम के दिनों की संख्या अलग-अलग रही।

पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान महात्मा गांधी नरेगा के तहत सृजित मानव-दिवसों का वर्ष-वार और राज्य/केंद्र-शासित प्रदेश-वार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम दिनांक 01.07.2026 से प्रभावी हुआ और इसके लिए एक व्यापक ऑनलाइन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) लागू किया गया है ताकि कार्यान्वयन की रियल टाइम निगरानी की जा सके और अगर कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियों को कोई समस्या होती है तो उसका समाधान किया जा सके। इसके अलावा, मंत्रालय ने कई अधिकारियों को राज्यों में भेजा है ताकि वे इसके कार्यान्वयन की समीक्षा कर सकें और राज्यों को सहायता प्रदान कर सकें।

समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (एनईएफएमएस) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) लागू किया है, जिसके तहत मजदूरी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। मंत्रालय ने मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया समय पर पूरा करने के लिए विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों एवं समयसीमा निर्धारित करते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी किया है। इसके अलावा, तकनीकी आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) का उपयोग मज़दूरी के भुगतान और अलग-अलग चरणों में लंबित मामलों की रियल-टाइम निगरानी एवं समीक्षा के लिए किया जाता है। साथ ही, समस्याओं का समय पर समाधान करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित समीक्षा भी की जाती है। इसके अलावा, मंत्रालय कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए, ज़मीनी स्तर पर वास्तविक मांग और कानूनी एवं वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित रूप से धनराशि जारी करता है।

सरकार ने विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम 2025' को लागू किया है, जो कि 01 जुलाई, 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रभावी हो गया है। यह अधिनियम एक वित्तीय वर्ष में प्रति ग्रामीण परिवार रोज़गार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करके ग्रामीण रोज़गार गारंटी संरचना को मज़बूत करता है।

सरकार ने इस कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, इस योजना के तहत केंद्र का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो ग्रामीण रोज़गार के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान है। राज्यों के अनुमानित हिस्से को मिलाकर, कार्यक्रम का कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा होने की उम्मीद है।

मज़दूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (एनईएफएमएस) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) लागू किया है और मज़दूरी भुगतान की रियल-टाइम निगरानी एवं समीक्षा के लिए तकनीकी-आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस)  स्थापित किया है।

यह अधिनियम आजीविका से जुड़ी अवसंरचना को अपने मुख्य क्षेत्रों में से एक मानते हुए बहुत प्राथमिकता देता है और खेती, उससे जुड़े क्षेत्रों और दूसरे सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित कर 'पूरा-सरकार' वाला दृष्टिकोण अपनाता है। यह ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण की अनुमति देता है, जैसे कि कौशल विकास केंद्र, ग्रामीण लाइब्रेरी, डिजिटल लर्निंग केंद्र और दूसरी सामुदायिक संसाधन, जो कौशल विकास, सीखने एवं सतत आजीविका को बढ़ावा देते हैं।

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एके


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