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जीवन रक्षक दवाओं की बढ़ती कीमतें

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 3:28PM by PIB Delhi

दवाओं की कीमतें फिलहालराष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण नीति’ 2012 के आधार पर औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013' (डीपीसीओ, 2013) के नियमों के अनुसार तय की जाती हैं। डीपीसीओ, 2013 के वर्तमान नियमों के अंतर्गत, 'राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण' (एनपीपीए) उन दवाओं की अधिकतम कीमत (सीलिंग प्राइस) तय करता है जो डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I में शामिल हैं। यह सूची 'आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची' पर आधारित होती है। इसके साथ, एनपीपीए नई दवाओं की खुदरा कीमत भी तय करता है, जैसा कि डीपीसीओ, 2013 के पैरा 2(1)(u) में बताया गया है। इस अनुसूची में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमतों में हर साल 'थोक मूल्य सूचकांक' के आधार पर परिवर्तन किया जाता है। इसके अलावा, जो दवाएं अनुसूची में शामिल नहीं हैंउनके मामले में निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे पिछले 12 महीनों में उस दवा की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) में 10% से अधिक बढ़ोतरी करें। साथ ही, एनपीपीए विशेष स्थिति और जनहित में डीपीसीओ, 2013 के पैरा 19 के अंतर्गत भी दवाओं की कीमतें तय करता है। तय कीमत से ज़्यादा पैसे वसूलने के मामलों से डीपीसीओ, 2013 के नियमों के अनुसार निपटा जाता है। एनपीपीए द्वारा तय या बदली गई कीमतों की जानकारी एनपीपीए की वेबसाइट (www.nppa.gov.in) पर उपलब्ध है।

एनपीपीए देश में दवाओं की उपलब्धता पर नज़र रखता है और जब भी किसी दवा की कमी का मामला उसके ध्यान में आता है, तो वह उसे ठीक करने के लिए ज़रूरी कदम उठाती है। भले ही वह जानकारी 'राज्य औषधि नियंत्रकों' (एसडीसी), 'फार्मा जन समाधान पोर्टल', एनपीपीए हेल्पलाइन, जन शिकायत पोर्टलों या आम लोगों से मिली हो। इसके अलावा, सरकार ने आम लोगों तक किफायती दरों पर ज़रूरी दवाएं पहुंचाने के लिए और भी कई कदम उठाए हैं, जिनमें ये शामिल हैं:

i. सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना' शुरू की है। इसके तहत 20,000 से ज़्यादा जनऔषधि केंद्रों पर अच्छी गुणवत्ता की जेनेरिक दवाएं मिलती हैं। इनकी कीमत ब्रांडेड दवाओं की तुलना में आम तौर पर 50% से 80% कम होती है।

ii. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB-PMJAY) के अंतर्गत, प्रत्येक परिवार को हर साल ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा/बीमा सुरक्षा मिलती है। इसमें द्वितीय या तृतीय श्रेणी (सेकेंडरी या टर्शियरी केयर के लिए) के अस्पताल में भर्ती होने और दवाओं का खर्च भी शामिल है।

iii. ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन' की निःशुल्क औषधि सेवा पहल' के अंतर्गत ' भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों' (आईपीएचएस) में बताई गई ज़रूरी दवाएं देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) से लेकर ज़िला अस्पतालों तक, सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ़्त में उपलब्ध कराई जाती हैं।

iv. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की 'अमृत' (इलाज के लिए सस्ती दवाएं और भरोसेमंद इम्प्लांट) पहल के तहत, कैंसर, दिल की बीमारियों और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए सस्ती दवाएं, इम्प्लांट, सर्जिकल डिस्पोजेबल और अन्य ज़रूरी चीज़ें उपलब्ध कराई जाती हैं। ये चीज़ें कई अस्पतालों और हेल्थकेयर संस्थानों में बने 'अमृत' फ़ार्मेसी स्टोर पर बाज़ार की कीमतों से औसतन 50% तक की छूट पर मिलती हैं।

v. 'राष्ट्रीय आरोग्य निधि' और 'स्वास्थ्य मंत्री के विवेकाधीन अनुदान' जैसी योजनाओं के तहत, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के उन गरीब मरीज़ों को आर्थिक मदद दी जाती है जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हैं।

रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 

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पीके/केसी/पीके


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