वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

घरेलू विनिर्माण में मजबूत वृद्धि से भारत के खिलौना निर्यात में 89.1 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी


टॉय बिज़ इंटरनेशनल 2026 में 400 भारतीय ब्रांडों का प्रदर्शन, घरेलू बिक्री और निर्यात के अवसरों को बढ़ावा

सरकारी पहलों से भारत के खिलौना उद्योग की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि

प्रविष्टि तिथि: 28 JUL 2026 4:14PM by PIB Delhi

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा 17वीं टॉय बिज़ इंटरनेशनल बी2बी प्रदर्शनी का आयोजन 4 से 7 जुलाई, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य भारतीय खिलौनों को बढ़ावा देना, व्यावसायिक नेटवर्किंग को सुगम बनाना और घरेलू बिक्री और निर्यात में वृद्धि के अवसर सृजित करना था। इसमें 400 भारतीय खिलौना ब्रांडों, 40 देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और लगभग 30,000 व्यावसायिक आगंतुकों ने भाग लिया। प्रदर्शनी ने निर्माताओं को थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, वितरकों, संस्थागत खरीदारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने का मंच प्रदान किया।

वर्तमान में, भारत सरकार की ओर से खिलौनों के लिए कोई समर्पित नीति नहीं है।

2018-19 में भारत में 371.7 मिलियन डॉलर मूल्य के खिलौने आयात किए गए। इनमें से अधिकांश खिलौने असुरक्षित, निम्न गुणवत्ता, नकली और सस्ते थे। इसके अलावा, 2019 में किए गए एक मिस्ट्री शॉपिंग सर्वे से पता चला कि घरेलू बाजार में केवल 33 प्रतिशत खिलौने ही बीआईएस मानकों के अनुसार स्वीकार्य गुणवत्ता के थे।

देश में खिलौनों की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार लाने और भारतीय खिलौना उद्योग के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई पहलें की हैं। प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:

  • खिलौनों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीटी) का निर्माण, जिसमें 21 कार्य बिंदु शामिल हैं और जिसका समन्वय 14 मंत्रालयों और विभागों द्वारा किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारतीय मूल्यों, संस्कृति और इतिहास पर आधारित खिलौनों के डिजाइन और विकास को बढ़ावा देना; सीखने के संसाधनों के रूप में खिलौनों के उपयोग को प्रोत्साहित करना; खिलौनों के डिजाइन और निर्माण के लिए हैकथॉन, खिलौना मेले और बड़ी चुनौतियों का आयोजन करना; गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करना और निम्न गुणवत्ता एवं असुरक्षित खिलौनों के आयात को प्रतिबंधित करना; स्वदेशी खिलौना समूहों को बढ़ावा देना; और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • खिलौनों (एचएस कोड-9503) पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) फरवरी 2020 में 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया था, और बाद में 2023 में इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के पुर्जों (एचएस 95030091) पर बीसीडी को वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • खिलौनों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) 25.02.2020 को जारी किया गया था, जो 01.01.2021 से प्रभावी हुआ।
  • बीआईएस ने खिलौनों की सुरक्षा के लिए भारतीय मानकों के अनुरूप खिलौनों पर बीआईएस मानक चिह्न के उपयोग के लिए घरेलू खिलौना निर्माताओं को 1800 से अधिक लाइसेंस और विदेशी निर्माताओं को 50 से अधिक लाइसेंस प्रदान किए हैं।
  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 खेल और गतिविधि आधारित अध्ययन पर केंद्रित है। बच्चों के लिए अध्ययन प्रक्रिया को आनंददायक और मनोरंजक बनाने के उद्देश्य से एनसीईआरटी द्वारा 'खिलौना आधारित शिक्षण' पर एक पुस्तिका प्रकाशित की गई है। इसमें बच्चों में अनेक कौशल विकसित करने में सहायता हेतु विभिन्न चरणों में उपयोग किए जाने वाले खिलौनों, विशेष रूप से स्वदेशी खिलौनों और खेलों का सुझाव दिया गया है।
  • घरेलू खिलौना उद्योग की सहायता करने के लिए क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है। लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार हेतु निधि योजना (स्फूर्ति) के तहत 18 खिलौना क्लस्टरों को मंजूरी दी है और वस्त्र मंत्रालय 40 खिलौना क्लस्टरों को डिजाइन और उपकरण संबंधी सहायता प्रदान कर रहा है।
  • स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत डीपीआईआईटी द्वारा 700 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी गई है।
  • खिलौनों के निर्यात के लिए निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) योजना के तहत 2,200 से अधिक निर्यातकों को सहायता प्रदान की गई है।
  • भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए), भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते, भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते, भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते और भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क बाजार पहुंच।
  • स्वदेशी खिलौनों को बढ़ावा देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रचार पहल भी की गई हैं, जिनमें टॉयकैथॉन, खिलौना मेले आदि शामिल हैं।

इन पहलों के परिणामस्वरूप भारतीय खिलौना उद्योग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीआईएस द्वारा 2025 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, खिलौनों के 95 प्रतिशत नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत था। यह भारतीय बाजार में उपलब्ध खिलौनों की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार दर्शाता है।

इसके अलावा, भारतीय खिलौना उद्योग अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों को खिलौनों का निर्यात करके खिलौनों का शुद्ध निर्यातक बनकर उभरा है। भारत में खिलौनों का आयात 37.5 प्रतिशत कम हुआ है, जबकि खिलौनों का निर्यात 89.1 प्रतिशत बढ़ा है।

व्यापार

वित्तीय वर्ष 2018-19

वित्तीय वर्ष 2025-26

वृद्धि ( प्रतिशत)

भारत का विश्व से आयात (मिलियन डॉलर में)

371.7

232.3

-37.5 प्रतिशत

भारत का विश्व को निर्यात (मिलियन डॉलर में)

203.5

384.7

89.1 प्रतिशत

स्रोत: ट्रेडस्टेट वेबसाइट और एचएस 9503, एचएस 9504 और एचएस 9505 के लिए डेटा।

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी

***

पीके/केसी/एसकेजे/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2290608) आगंतुक पटल : 134
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Tamil , Telugu