मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
जलाशयों एवं अमृत सरोवरों का विकास
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2026 3:58PM by PIB Delhi
(क): भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में छत्तीसगढ़ के बस्तर संसदीय क्षेत्र सहित, देशभर में 500 जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास के माध्यम से मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि के विकास की घोषणा की है। यह पहल जलाशयों एवं अमृत सरोवरों में उपलब्ध अप्रयुक्त मत्स्य क्षमता का दोहन करने के सरकार के उद्देश्य को सुदृढ़ करती है, जिससे जलाशयों में मछुआरों की आजीविका सशक्त होगी तथा महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की जलाशयों एवं अमृत सरोवरों में मत्स्य विकास हेतु सहभागिता बढ़ेगी। इस पहल के प्रमुख घटकों में हैचरी की स्थापना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन को सुदृढ़ करना, जलाशयों में पिंजरा एवं पेन संस्कृति को बढ़ावा देना, जलाशय मत्स्यजीवियों को नौकाएँ एवं जाल उपलब्ध कराना, अमृत सरोवरों में सम्मिश्र मत्स्य पालन एवं एकीकृत मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देना, तथा मत्स्य अवसंरचना जैसे मत्स्य आहार मिल, शीत भंडार, बर्फ संयंत्र, मत्स्य कियोस्क एवं खुदरा मत्स्य बाजार, मत्स्य परिवहन वाहन तथा मत्स्य मूल्य संवर्धन इकाइयों की स्थापना करना।
(ख) से (घ): भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) द्वारा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श कर जलाशयों एवं अमृत सरोवरों का चयन किया गया है। यह चयन चिन्हित जलाशयों एवं अमृत सरोवरों में बारहमासी जल उपलब्धता तथा मत्स्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। तदनुसार, बिहार से 12 जलाशयों एवं 5 अमृत सरोवरों तथा छत्तीसगढ़ से 27 जलाशयों एवं 5 अमृत सरोवरों का चयन किया गया है, जिनमें बस्तर संसदीय क्षेत्र का कोसरडेडा जलाशय भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के परामर्श से चयनित जलाशयों का जिला-वार विवरण अनुबंध-III में दिया गया है।
(ङ) देश में मछुआरों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) द्वारा जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास के अंतर्गत मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ), महिला-नेतृत्व वाले समूहों तथा मत्स्य सहकारी समितियों की सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत चयनित जलाशयों एवं अमृत सरोवरों में मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ), महिला-नेतृत्व वाले समूहों तथा मत्स्य सहकारी समितियों का गठन तथा पहले से कार्यरत ऐसे संगठनों को सहायता प्रदान करना शामिल है।
(च) जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास के कार्यान्वयन पर निवेश, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदनों (डीपीआर) के आधार पर किया जाएगा। इकाई लागत तथा वित्तपोषण का स्वरूप प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार होगा।
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अनुबंध-I
जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के विकास संबंधी विवरण: एकीकृत विकास के लिए चिन्हित जलाशयों का राज्यवार विवरण
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क्रम संख्या
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राज्य का नाम
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जलाशयों की कुल संख्या
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1
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12
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2
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12
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3
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27
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4
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3
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6
|
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12
|
|
7
|
|
5
|
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8
|
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4
|
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9
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41
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10
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11
|
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11
|
|
28
|
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12
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22
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13
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34
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14
|
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4
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15
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3
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16
|
|
3
|
|
17
|
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1
|
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18
|
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25
|
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19
|
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7
|
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20
|
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15
|
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21
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10
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22
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|
27
|
|
23
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1
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24
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6
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25
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19
|
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26
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13
|
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27
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6
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योग
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351
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अनुबंध-II
जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के विकास संबंधी विवरण: एकीकृत विकास के लिए चिन्हित अमृत सरोवरों का राज्य-वार विवरण
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क्रम संख्या
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राज्य का नाम
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अमृत सरोवरों की संख्या
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1
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5
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2
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4
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3
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5
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|
4
|
|
3
|
|
5
|
|
5
|
|
6
|
|
5
|
|
7
|
|
4
|
|
8
|
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2
|
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9
|
|
4
|
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10
|
|
3
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11
|
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6
|
|
12
|
|
12
|
|
13
|
|
6
|
|
14
|
|
5
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15
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|
5
|
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16
|
|
5
|
|
17
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|
5
|
|
18
|
|
5
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19
|
|
3
|
|
20
|
|
6
|
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21
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2
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|
योग
|
100
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अनुबंध-III
जलाशयों एवं अमृत सरोवरों का विकास: छत्तीसगढ़ में चयनित जलाशयों का जिला-वार विवरण।
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क्रम सं.
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जलाशय का नाम
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जिले का नाम
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1
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2
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3
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4
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5
|
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|
6
|
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7
|
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|
|
8
|
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9
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|
10
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11
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12
|
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13
|
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14
|
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15
|
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16
|
|
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|
17
|
|
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|
18
|
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19
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20
|
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21
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22
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23
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24
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25
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26
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27
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यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2290727)
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