पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: मौसम-आधारित कृषि-सलाह सेवाएं

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 1:56PM by PIB Delhi

सरकार ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के जरिए देश की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसने हाई-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एनडब्ल्यूपी) मॉडल को समर्थन देने के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) सुविधाओं, आधुनिक अवलोकन नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित मौसम पूर्वानुमान टूल जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया है। इन सुधारों ने पूरे देश में मौसम की निगरानी, ​​पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी सेवाओं की सटीकता और विश्वसनीयता को काफी बेहतर बनाया है। वर्तमान में, मंत्रालय के पास मौसम अवलोकन नेटवर्क है जिसमें मैनुअल ऑब्जर्वेटरी, स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस), ऑटोमेटेड रेन गेज (एआरजी), एग्रो-एडब्ल्यूएस, डॉपलर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर), ऊपरी-हवा की ऑब्ज़र्वेटरी और मौसम की निगरानी करने वाले उपग्रह शामिल हैं।

'मिशन मौसम' के तहत, किसानों सहित सभी के लिए कम, मध्यम और लंबी अवधि के सटीक पूर्वानुमान देने के लिए कई वैश्विक और क्षेत्रीय एनडब्ल्यपी मॉडलिंग सिस्टम लागू और चालू किए गए हैं। 6 किमी के स्पेशल रिजॉल्यूशन वाला 'भारत फोरकास्टिंग सिस्टम' (भारतएफएस ), पंचायत-स्तर के क्लस्टर पर पूर्वानुमान तैयार करता है, जिससे स्थानीय मौसम की स्थितियों को समझने और मौसम के पूर्वानुमान की सटीकता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने, पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के सहयोग से, भारत में लगभग सभी ग्राम पंचायतों को कवर करते हुए पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान शुरू किया है। ये पूर्वानुमान ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in), मेरी पंचायत ऐप, एमओपीआर के ई-मानचित्र और आईएमडी, एमओईएस (https://mausamgram.imd.gov.in) के मौसमग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से उपलब्ध हैं। वर्तमान में, तीन एआई-आधारित वैश्विक मॉडल (जैसे, पंगु वेदर, फोरकास्टनेट, ग्राफकास्ट) गंभीर मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए पूर्वानुमानकर्ता को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए चालू हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) एप्लीकेशंस और टूल्स को निगरानी और अवलोकन प्रसंस्करण के विभिन्न पहलुओं, जैसे नाउकास्टिंग टूल और डाउनस्केल शहरी पूर्वानुमान के लिए एमओईएस संस्थानों के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।

आईएमडी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य संस्थानों सहित 55 मेजबान संस्थानों के सहयोग से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) को लागू करता है। इसके तहत, 127 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को कवर करने वाली 130 कृषि मौसम विज्ञान क्षेत्र इकाइयां (एएमएफयू) आईएमडी के मध्यम अवधि के मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर, सप्ताह में दो बार (मंगलवार और शुक्रवार) जिला-आधारित कृषि-मौसम संबंधी सलाह जारी करती हैं और किसानों से संवाद करती हैं। जीकेएमएस योजना के तहत, किसानों को सीधे वास्तविक समय के मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम संबंधी सलाह और प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सहित देश भर के सभी कृषि महत्वपूर्ण जिलों को कवर किया गया है। इसके अलावा, आईएमडी उत्तर प्रदेश सहित अपने संबंधित राज्यों के लिए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों और मौसम विज्ञान केंद्रों के माध्यम से 7 दिनों तक वैध जिला-स्तरीय प्रभाव-आधारित मौसम पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनी जारी करता है। ये चेतावनियां खराब मौसम की स्थिति में अधिक बार जारी की जाती हैं। केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के समन्वय से मोबाइल एप्लिकेशन, एपीआई, वेब पोर्टल, एसएमएस, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया सहित कई संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से मौसम के पूर्वानुमान और चेतावनियों का प्रसार किया जाता है।

आईएमडी ने मौसम से जुड़ी चेतावनियां देने के लिए एक आम लोगों के अनुकूल वेबसाइट (https://mausam.imd.gov.in/) और मोबाइल ऐप बनाए हैं। इनमें मौसम का पूर्वानुमान और चेतावनी के लिए मौसम (MAUSAM) ऐप, खेती-बाड़ी से जुड़ी मौसम सेवाओं के लिए मेघदूत (MEGHDOOT) ऐप, बिजली गिरने की चेतावनी के लिए दामिनी (DAMINI) ऐप, और पूरे देश (जिसमें बागपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं) में मौसम के पूर्वानुमान और चेतावनी के लिए उमंग (UMANG) ऐप शामिल हैं। इसके अलावा, आईएमडी किसानों के लिए खेती-बाड़ी से जुड़ी सलाह और आम जनता के लिए तुरंत मौसम की जानकारी (नाउकास्ट) जैसी सेवाओं की उपयोगिता का पता लगाने के लिए नियमित रूप से सर्वे करता है। सर्वे के नतीजों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करके जारी की गई है। यह रिपोर्ट इन लिंक - https://mausam.imd.gov.in/imd_latest/contents/agromet/kalp/voices.pdf

और https://mausam.imd.gov.in/imd_latest/contents/agromet/states/States.pdf पर सबके लिए उपलब्ध है।

यह जानकारी आज लोकसभा में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक लिखित जवाब में दी।

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पीके / केसी/ एमपी 


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