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संसदीय प्रश्न: परमाणु ऊर्जा मिशन एवं भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 3:33PM by PIB Delhi

वित्त वर्ष 2025–26 के केंद्रीय बजट में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के अभिकल्पन, विकास एवं तैनाती के लिए कुल 20,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इस आवंटन का उद्देश्य वर्ष 2033 तक कम-से-कम पांच स्वदेशी एसएमआर का विकास एवं संचालन सुनिश्चित करने के भारत के लक्ष्य को समर्थन प्रदान करना है।

इस संबंध में परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की एक घटक इकाई भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) ने एसएमआर की प्रदर्शन इकाइयों के अभिकल्पन एवं विकास का कार्य प्रारंभ किया है। इनमें विद्युत उत्पादन हेतु 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200), 55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर-55) तथा प्रक्रिया ऊष्मा उत्पादन के लिए 5 मेगावाट तापीय क्षमता तक का उच्च तापमान गैस शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर) शामिल है, जिसे हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त ताप-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ा जा सकता है। प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद इन एसएमआर की स्थापना में 60 से 72 माह का समय लगेगा।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) ने 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200), 55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर-55) तथा हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 5 मेगावाट तापीय क्षमता तक के उच्च तापमान गैस शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर) के अभिकल्पन एवं विकास का कार्य प्रारंभ किया है।

 

  1. भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर-200 (बीएसएमआर-200) एक स्वदेशी दाबित जल रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) आधारित विद्युत रिएक्टर है। बीएसएमआर-200 की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है:
      1. बीएसएमआर-200 की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक (इन-प्रिंसिपल) स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
      2. प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है तथा सशक्त प्रौद्योगिकी समूह (ईटीजी) की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।
      3. परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) ने बीएसएमआर-200 के लिए महाराष्ट्र के तारापुर को स्थल के रूप में अनुमोदित किया है।
    1. एसएमआर-55 दाबित जल रिएक्टर (प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर) डिज़ाइन पर आधारित है। एसएमआर-55 की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है:
      1. एसएमआर-55 की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक (इन-प्रिंसिपल) स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
      2. परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) ने एसएमआर-55 के लिए महाराष्ट्र के तारापुर को स्थल के रूप में अनुमोदित किया है।
    2. 5 मेगावाट तापीय क्षमता तक के एचटीजीसीआर (उच्च तापमान गैस शीतित रिएक्टर) को परमाणु ऊष्मा स्रोत के रूप में बार्क द्वारा अभिकल्पित एवं विकसित किया जा रहा है तथा हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इसे कॉपर-क्लोरीन चक्र जैसे उपयुक्त ताप-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ा जाना है। एचटीजीसीआर की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है:
      1. एचटीजीसीआर की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक (इन-प्रिंसिपल) स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
      2. रिएक्टर के लिए प्रस्तावित स्थल बार्क, विशाखापत्तनम है। स्थल चयन (साइटिंग) की सहमति प्राप्त हो चुकी है।
      3. पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए संदर्भ शर्तें (टीओआर) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्राप्त हो चुकी हैं।

हाल ही में अधिनियमित शांति अधिनियम, 2025 (भारत में परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन एवं विकास अधिनियम) का उद्देश्य विधायी सुधारों को सक्षम बनाना है, जिससे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी स्वामित्व वाली तथा निजी संस्थाओं की भागीदारी को व्यापक बनाया जा सके और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। ये सुधार शांति अधिनियम को लागू करने के लिए अधिसूचित किए जाने के बाद प्रभावी होंगे।

स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) के विकास, विनिर्माण एवं निर्माण में भारतीय उद्योगों की विशेषज्ञता का उपयोग एसएमआर के विकास एवं तैनाती के लिए किया गया है। एसएमआर के विकास एवं तैनाती के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी देश में उपलब्ध है तथा अधिकांश उपकरण भारतीय उद्योगों की विनिर्माण क्षमता के अंतर्गत आते हैं, जिसमें बार्क द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। बीएसएमआर-200 और एसएमआर-55 के रिएक्टर प्रेशर वेसल्‍स के लिए विशेष सामग्री उन्नत शुद्ध रिएक्टर वेसल एलॉय (एपीयूआरवीए) तथा फोर्जिंग की प्रौद्योगिकी भारतीय उद्योगों के सहयोग से स्वदेशी तौर पर विकसित की गई है। क्रियाशीलता (रिएक्टिविटी) नियंत्रण ड्राइव तंत्र जैसे महत्वपूर्ण घटकों का विकास पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के विकास का कार्य घरेलू उद्योग के साथ प्रारंभ किया गया है।

यह जानकारी केंद्रीय प्रधानमंत्री कार्यालय तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

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