शिक्षा मंत्रालय
स्कूली बच्चों में स्वच्छता की आदतें एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता
प्रविष्टि तिथि:
05 AUG 2026 5:52PM by PIB Delhi
शिक्षा भारत के संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और अधिकांश स्कूल संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रदेश(यूटी) प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं। हालांकि, शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी), 2020 लागू किया गया है, जो स्कूलों में स्वास्थ्य, आरोग्य तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता से संबंधित पहलुओं को मजबूत करने सहित शिक्षार्थियों के समग्र विकास पर जोर देती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी), 2020 के अनुरूप, शिक्षा मंत्रालय(एमओई) स्कूली बच्चों में स्वास्थ्य शिक्षा, स्वच्छता संबंधी आदतों तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए समग्र शिक्षा, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण(पीएम पोषण), स्कूल स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम(एसएचडब्ल्यूपी), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) तथा मिशन लाइफ(LiFE) के लिए ईको क्लब जैसी विभिन्न योजनाओं एवं पहलों को उच्च प्राथमिकता प्रदान करता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) ने स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, वायु प्रदूषण तथा पर्यावरणीय सततता से संबंधित विषयों को बच्चों को उम्र के अनुकूल तरीके से स्कूली पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री में विभिन्न स्तरों पर समाहित किया है।
केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण(पीएम पोषण) योजना, जो राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से संचालित प्रमुख अधिकार-आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं में से एक है, के अंतर्गत बाल वाटिका तथा कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत लगभग 10.23 करोड़ छात्रों को देशभर के लगभग 10.33 लाख सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हरेक स्कूली कार्यदिवस पर पौष्टिक, संतुलित एवं गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत स्वस्थ एवं संतुलित आहार के महत्व, जंक फूड के प्रति जागरूकता, पोषण संवर्धन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की आदतों, जैसे हाथ धोने की आदत, तथा स्कूल पोषण वाटिकाओं(एसएनजी) के महत्व को भी बढ़ावा दिया जाता है।
केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा योजना के तहत, शिक्षा मंत्रालय(एमओई) सभी स्कूलों में मिशन लाइफ(LiFE) के लिए ईको क्लब स्थापित करने हेतु राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सहयोग प्रदान करता है। इसका उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उनमें पर्यावरण-अनुकूल विजन एवं व्यवहार विकसित करना है। मिशन लाइफ के लिए ईको क्लब के अंतर्गत छात्र वृक्षारोपण, प्रकृति भ्रमण, स्वच्छता अभियान आदि जैसी पर्यावरण से संबंधित व्यावहारिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
शिक्षा मंत्रालय(एमओई) राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी), 2020 के अनुरूप विभिन्न नीतिगत एवं कार्यक्रमगत पहलों के माध्यम से स्कूलों में खेल एवं शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। यह नीति खेल-एकीकृत शिक्षण पर बल देती है तथा छात्रों के समग्र विकास के लिए खेलों को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग मानती है। इसका उद्देश्य शारीरिक फिटनेस, टीम भावना तथा आजीवन स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को प्रोत्साहित करना है। इन उद्देश्यों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा(एनसीएफ) में खेल-आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर खेल एवं शारीरिक शिक्षा को समाहित किया गया है। इस रूपरेखा में स्कूलों में योग को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके अलावा, समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत खेल एवं शारीरिक शिक्षा के लिए एक समर्पित घटक शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में खेल गतिविधियों, फिटनेस कार्यक्रमों तथा योग को बढ़ावा देना है। इस घटक का एक प्रमुख उद्देश्य छात्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है, जिससे वे शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ एवं सशक्त बन सकें।
एनईपी 2020 तथा एनसीएफ-एसई 2023 की अनुशंसाओं के अनुरूप, एनसीईआरटी ने स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए खेल एवं शारीरिक शिक्षा पर विशेष पाठ्यपुस्तकें विकसित की हैं, जिनमें योग पर विशेष बल दिया गया है। इनमें प्रारंभिक स्तर(कक्षा III से V) के लिए 'खेल-योग', मध्य स्तर(कक्षा VI से VIII) के लिए 'खेल यात्रा' तथा माध्यमिक स्तर(कक्षा IX) के लिए 'खेल-प्रवीण' शामिल हैं। इन पाठ्यपुस्तकों में छात्रों को उनकी आयु के अनुरूप शारीरिक शिक्षा की अवधारणाओं, दैनिक जीवन के लिए योग तथा योग साधना की मूलभूत जानकारी प्रदान की जाती है। ये पाठ्यपुस्तकें वर्तमान में स्कूलों में उपयोग की जा रही हैं तथा छात्रों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक-भावनात्मक कल्याण सहित समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
स्कूली बच्चों में खेल, शारीरिक शिक्षा एवं फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए इस विभाग द्वारा कई राष्ट्रीय पहलें की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, राष्ट्रीय योग ओलंपियाड, फिट इंडिया आंदोलन, खेलो इंडिया के अंतर्गत आयोजित खेल प्रतियोगिताएं तथा राष्ट्रीय खेल दिवस जैसे व्यापक जन-भागीदारी वाले कार्यक्रम विद्यालयों में सक्रिय एवं स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करते हैं। इसके अलावा, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) के स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा(एचपीई) कार्यक्रम के अंतर्गत सभी कक्षाओं के लिए खेलों को अनिवार्य बनाया गया है। इससे स्कूली पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में योग सहित खेल गतिविधियों में नियमित एवं संरचित शारीरिक भागीदारी सुनिश्चित होती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय(एमओएचएफडब्ल्यू) ने जानकारी दी है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय(ओमओई) वर्ष 2020 से संयुक्त रूप से स्कूल स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत हरेक स्कूल से दो शिक्षकों को स्वास्थ्य एवं आरोग्य राजदूत(एचडब्ल्यूए) के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। ये शिक्षक पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, स्वस्थ तरीके से बढ़ना एवं विकसित होना तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना सहित 11 विषयों पर नियमित सत्र आयोजित करते हैं।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वह पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम(ईईपी) का संचालन करता है, जो पर्यावरण शिक्षा, जागरूकता, अनुसंधान एवं कौशल विकास(ईईएआरएसडी) नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना का एक घटक है। इसका उद्देश्य अनौपचारिक पर्यावरण शिक्षा प्रदान करने हेतु विभिन्न शिक्षण-पद्धतियों के माध्यम से शिक्षा मंत्रालय के औपचारिक शिक्षा संबंधी प्रयासों को मजबूती प्रदान करना है। ईईपी का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा कार्यशालाओं, परियोजनाओं, प्रदर्शनियों, जागरूकता अभियानों, प्रतियोगिताओं, प्रकृति शिविरों एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश कार्यक्रमों जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से उन्हें सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह कार्यक्रम कक्षा में प्राप्त ज्ञान को प्राकृतिक परिवेश के अनुभव तथा व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से और अधिक समृद्ध बनाता है। ईईपी के अंतर्गत संचालित गतिविधियां मिशन लाइफ(LiFE) के सात प्रमुख विषयों के अनुरूप हैं, जिनमें "सतत खाद्य प्रणाली अपनाना" तथा "स्वस्थ जीवनशैली अपनाना" जैसे विषय शामिल हैं। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की नामित कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा स्कूलों एवं कॉलेजों में गठित ईको क्लबों के माध्यम से बच्चों और युवाओं के लिए किया जाता है। इसमें व्यावहारिक तथा अनुभवात्मक अधिगम पर विशेष जोर दिया जाता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित प्रमुख पहलों में सतत जीवनशैली कार्यशालाएं, शून्य अपशिष्ट पहल, एकल-उपयोग प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देना, मोटे अनाज(मिलेट) खाद्य उत्सव, स्वच्छता एवं समुद्र तट सफाई अभियान, रसोई, औषधीय एवं हर्बल उद्यानों का विकास, सूखे एवं गीले कचरे का पृथक्करण, वर्मी कम्पोस्टिंग, योग तथा प्रकृति शिविरों के दौरान प्रकृति भ्रमण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न पर्यावरण दिवसों के अवसर पर विषय-आधारित जागरूकता अभियान भी आयोजित किए जाते हैं।
यह जानकारी केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
***
पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2295297)
आगंतुक पटल : 43