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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026


बुनकरों का सम्मान, परंपराओं का नवीनीकरण, क्षितिज का विस्तार

प्रविष्टि तिथि: 06 AUG 2026 1:49PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रति वर्ष  7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस बुनाई की विरासत का उत्सव मनाता है और 35.22 लाख बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों को मान्यता देता है, जिनमें से 72% से अधिक महिलाएं हैं। वर्ष  2026 में यह अवसर क्षेत्रीय ज्ञान में निहित हथकरघा उद्योग की विविधता को दर्शाता है। डिजाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजारों के माध्यम से हथकरघा को भी नई अभिव्यक्ति मिल रही है। सरकारी सहायता, पुरस्कार, बाजार पहुंच और प्रामाणिकता सुरक्षा उपाय इन परंपराओं को ग्रामीण समुदायों से व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं।

 

बदलते वस्त्र परिदृश्य में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026

भारत की हथकरघा परंपरा की जड़ें  इतिहास में दूर तक फैली हैं, जिसके प्राचीन निशान सिंधु घाटी सभ्यता तक मिलते हैं। कताई और बुनाई का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण और महाभारत में मिलता है। इन ग्रंथों में और  कौटिल्य के साहित्य में भारतीय कपास और रेशम की उत्तम गुणवत्ता का वर्णन मिलता है।

सदियों से बुनाई की कला और तकनीक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती रही है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट प्रथाओं के माध्यम से इन परंपराओं का विकास हुआ है। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की स्थापना ने इस दीर्घकालिक विरासत को समर्पित राष्ट्रीय मंच प्रदान किया।

 

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया। यह अवसर भारत की बुनाई परंपराओं का उत्सव मनाता है और हथकरघा श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देता है।

वर्ष 2026 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस इस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह समकालीन उपभोक्ताओं के बीच हथकरघा की बढ़ती प्रासंगिकता और वैश्विक बाजारों में इसकी बढ़ती दृश्यता को दर्शाता है।

 

हथकरघा बुनाई आज भी पारंपरिक शिल्प और घरेलू उद्यम है। इसकी पहचान बुनकर, इस क्षेत्र और प्रत्येक वस्त्र के निर्माण में निहित ज्ञान से गहराई से जुड़ी हुई है। इसके साथ ही, हथकरघा बुनाई के आसपास का परिदृश्य लगातार विकसित हो रहा है। समकालीन डिजाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ भारतीय बुनाई को नए उपभोक्ताओं से जोड़ रही हैं और इसकी पहुंच का विस्तार कर रही हैं।

 

भारत के हथकरघा उद्योग से जुड़े लोग

हथकरघा उद्योग की व्यापक आधिकारिक जनगणना, चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवारों को दर्ज किया गया। इसमें देशभर में 35.22 लाख हथकरघा बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों की गणना भी की गई। इनमें से 8.48 लाख संबद्ध श्रमिक बुनाई से पहले और बुनाई के बाद की गतिविधियों जैसे कि वाइंडिंग, वार्पिंग, डाइंग औरकैलेंडरिंग में लगे हुए थे। इसके अलावा, सामाजिक और भौगोलिक प्रारूप दर्शाते हैं कि हथकरघा ग्रामीण आजीविका से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।

 

हथकरघा जनगणना

  • भारत में अब तक चार जनगणनाएं हो चुकी हैं: 1987-88, 1995-96, 2009-10 और 2019-20
  • ये जनगणना औसतन 8-12 वर्षों के अंतराल पर की जाती हैं।

 

हथकरघा कामगारों को मान्यता देना और उनका पंजीकरण करना

जनगणना के माध्यम से सूचीबद्ध श्रमिकों को पहचान/ई-पहचान कार्ड प्रदान किए गए हैं। इस दायरे को और बढ़ाने के लिए, जनवरी 2025 में ई-पहचान पोर्टल लॉन्च किया गया। यह नए और पहले छूट गए श्रमिकों को पंजीकरण करने की सुविधा देता है, जबकि पहले से दर्ज श्रमिक अपने विवरण को अपडेट कर सकते हैं और अपने कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

जुलाई 2026 तक, लगभग 84,000 अतिरिक्त श्रमिकों को -पहचान कार्ड के लिए मंजूरी मिल चुकी थी।

 

महिलाओं द्वारा संचालित क्षेत्र

भारत में हथकरघा उद्योग में काम करने वालों में अधिकांश महिलाएं हैं। बुनाई और उससे संबंधित गतिविधियों में लगे कुल कामगारों में से 25.46 लाख महिलाएं हैं, जो कुल कामगारों का 72% से अधिक है।

 

विविध समुदायों का समर्थन करने वाला क्षेत्र

हथकरघा उद्योग में 4.84 लाख अनुसूचित जाति के श्रमिक, 6.28 लाख अनुसूचित जनजाति के श्रमिक और अन्य पिछड़ा वर्ग के 12.67 लाख श्रमिक शामिल थे।

इसके अलावा, जनगणना में देशभर में 28.20 लाख करघे दर्ज किए गए। इनमें से 25.30 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में और 2.90 लाख शहरी क्षेत्रों में स्थित थे। इस प्रकार, भारत में लगभग दस में से नौ करघे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

 

हथकरघा बुनकरों के लिए समर्थन का पारिस्थितिकी तंत्र

राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और कच्चा माल आपूर्ति योजना इस क्षेत्र के लिए मुख्य परिचालन सहायता प्रणाली का निर्माण करते हैं।


I. राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी)

एनएचडीपी को 2021-22 से 2025-26 तक कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया था। यह हथकरघा क्षेत्र के एकीकृत विकास के लिए आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण का अनुसरण करता है, जिसमें हथकरघा बुनकरों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

एनएचडीपी के घटकों को सरकारी हथकरघा संगठनों के साथ-साथ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय हथकरघा निगमों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। कार्यान्वयन एजेंसियों में बुनकर सहकारी समितियां, संघ, हथकरघा उत्पादक कंपनियां और प्रतिभागी बैंक आदि भी शामिल हैं।

 

हथकरघा उत्पादक कंपनियां बुनकरों को पेशेवर रूप से प्रबंधित, सदस्य-स्वामित्व वाले उद्यमों में संगठित करती हैं। एनएचडीपी के अंतर्गत, 2020-21 से 2026-27 के दौरान 200 हथकरघा उत्पादक कंपनियां गठित की गईं।

 

यह कार्यक्रम निम्नलिखित प्रमुख घटकों के माध्यम से अपना व्यापक समर्थन प्रदान करता है:

a) लघु समूह विकास कार्यक्रम (एससीडीपी)

एस.सी.डी.पी. छोटे हथकरघा समूहों को उनकी विशिष्ट विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2 करोड़ रुपये तक की धनराशि प्रदान करके सहायता करता है। इस सहायता में बेहतर करघे, प्रकाश व्यवस्था और कार्यशालाओं के साथ-साथ डिजाइन, उत्पाद विकास और विपणन भी शामिल हैं।

  • 2021-22 से 2026-27 तक (जून तक), इस कार्यक्रम के तहत 357 क्लस्टर स्वीकृत किए गए।
  • इसके अतिरिक्त, 2025-26 के दौरान, वर्कशेड, करघे और सहायक उपकरण, तथा इलेक्ट्रॉनिक जैक्वार्ड जैसे प्रमुख हस्तक्षेपों के लिए 94 करोड़ जारी किए गए।

एससीडीपी का प्रभाव

वर्कशेड का निर्माण: इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्कशेड निर्माण हथकरघा उद्योग के लाभार्थियों को बेहतर कार्यस्थल अवसंरचना उपलब्ध कराता है। बुनकरों को इन कार्यशालाओं के निर्माण के लिए 100% तक की सब्सिडी मिलती है। इस पहल से निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए हैं:

  • दैनिक औसत उत्पादन में 53% की वृद्धि हुई।
  • औसत कार्य घंटों में 60% की वृद्धि हुई, जबकि मासिक कार्य दिवसों में 28% की वृद्धि हुई।
  • औसत दैनिक आय में 42% की वृद्धि हुई, जो ₹328 से बढ़कर ₹465 हो गई।

इलेक्ट्रॉनिक जैक्वार्ड: इलेक्ट्रॉनिक जैक्वार्ड में डिजिटल नियंत्रणों का उपयोग करके ताने के धागों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे बुनाई तेज, अधिक लचीली और पेचीदा हो जाती है। इनके आने से हथकरघा बुनकरों की उत्पादकता और आय में सुधार हुआ है।

  • औसत दैनिक उत्पादन में 55% की वृद्धि हुई।
  • लाभार्थियों में से 96% ने उत्पादकता में वृद्धि की सूचना दी।
  • औसत दैनिक मजदूरी में 56% की वृद्धि हुई, जो ₹360 से बढ़कर ₹560 हो गई।
  • औसत मासिक आय ₹9,600 से बढ़कर ₹15,000 हो गई।

 

 

b) हथकरघा विपणन सहायता (एचएमए)

हथकरघा विपणन सहायता बुनकरों और हथकरघा संगठनों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए सीधा मंच प्रदान करती है। यह घरेलू और निर्यात संवर्धन, शहरी हाटों की स्थापना और विपणन प्रोत्साहनों का समर्थन करती है। विभिन्न घटकों के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • 2021-22 से 2026-27 (जून तक) के बीच, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हथकरघा उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए 960 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें राष्ट्रीय, राज्य और जिला हथकरघा प्रदर्शनियां, शिल्प मेले और अन्य विपणन कार्यक्रम शामिल थे।
  • एचएमए के अंतर्गत, दो राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार, संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार, हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हैं। पुरस्कार वितरण का नवीनतम चक्र 2024 के पुरस्कारों को शामिल करता है, जो राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2025 को प्रदान किए गए। कुल 24 बुनकरों को सम्मानित किया गया, जिनमें 5 संत कबीर और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता शामिल थे। पुरस्कार विजेताओं में छह महिलाएं और एक दिव्यांग बुनकर शामिल थीं।

 

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार उन उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित करता है जिन्होंने बुनाई की परंपराओं, सामुदायिक कल्याण और क्षेत्र के विकास में असाधारण कौशल और योगदान दिया है। इस पुरस्कार में 3.5 लाख रुपये की राशि, जड़ा हुआ सोने का सिक्का, ताम्रपात्र, शॉल और प्रमाण पत्र शामिल हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शिल्प कौशल, समर्पण और नवाचार को सम्मानित करता है और इसमें 2 लाख रुपये, एक ताम्रपात्र, शॉल और प्रमाण पत्र शामिल हैं।

 

c) रियायती ऋण/बुनकर मुद्रा योजना

इस योजना के अंतर्गत हथकरघा क्षेत्र के लिए रियायती 6% ब्याज दर पर तीन साल के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। सरकार की ओर से 7% तक की ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है। इसके अलावा, इसमें मार्जिन मनी सहायता और क्रेडिट गारंटी शुल्क का भुगतान भी शामिल है। हथकरघा बुनकर मुद्रा पोर्टल वित्तीय सहायता के समय पर हस्तांतरण में सहायक है।

  • 2021-22 से 2026-27 (जून तक) के बीच, कुल मिलाकर 40,000 से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि ₹280 करोड़ से अधिक थी।
  • वर्ष 2026-27 तक कुल 967 ऋण स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि ₹7.45 करोड़ थी।

 

d) हथकरघा बुनकरों का कल्याण (सामाजिक सुरक्षा उपाय)

बुनकरों के कल्याणकारी उपायों के अंतर्गत हथकरघा बुनकरों और श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाती है, इसके साथ ही उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्तियां भी दी जाती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): PMJJBY हथकरघा बुनकरों और 18-50 वर्ष की आयु के श्रमिकों को वार्षिक रूप से नवीकरणीय जीवन बीमा प्रदान करती है। किसी भी कारण से मृत्यु होने पर यह ₹2 लाख का लाभ प्रदान करती है।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): PMSBY हथकरघा बुनकरों और 18-70 वर्ष की आयु के श्रमिकों को वार्षिक रूप से नवीकरणीय दुर्घटना बीमा प्रदान करती है। यह आकस्मिक मृत्यु या स्थायी पूर्ण दिव्यांगता के लिए ₹2 लाख और स्थायी आंशिक दिव्यांगता के लिए ₹1 लाख का मुआवजा देती है।

 

 

पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई का प्रदर्शन

  • वर्ष 2021-22 में हथकरघा बुनकरों और श्रमिकों का नामांकन 1,11,957 से बढ़कर 2026-27 (मई तक) में 2,02,393 हो गया, जो 80.8% की वृद्धि दर्शाता है।
  • इस अवधि के दौरान, जारी की गई धनराशि ₹204.83 लाख से बढ़कर ₹335 लाख हो गई, जो 63.6% की वृद्धि है।

 

  • छात्रवृत्ति: हथकरघा पर काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के दो बच्चों को मान्यता प्राप्त वस्त्र डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने के लिए प्रतिवर्ष 2 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। स्थापना के बाद से जून 2026 तक 531 आवेदनों को मंजूरी दी गई थी।

 

e) मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम

मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रत्येक मेगा हथकरघा क्लस्टर में कम से कम 10,000 हथकरघा/क्लस्टर शामिल होते हैं और पांच वर्षों में 30 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

  • आठ मेगा क्लस्टर पूरे हो चुके हैं और कार्यरत हैं, जबकि चार मेगा क्लस्टर कार्यान्वयन के अधीन हैं।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत ₹370.72 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की गई, जिससे कुल 1,62,682 हथकरघा बुनकरों को लाभ हुआ।

 

f) आवश्यकता आधारित विशेष अवसंरचना परियोजनाएं

इस कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पाद विकास, उत्पादकता, गुणवत्ता सुधार, मूल्यवर्धन और विपणन के लिए 12 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है

  • छह हस्तशिल्प हथकरघा गांव चालू हैं और तीन परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

 

II. कच्चा माल आपूर्ति योजना (RMSS)

यह योजना सभी प्रकार के धागों पर माल ढुलाई शुल्क की प्रतिपूर्ति करके धागे तक पहुंच को बढ़ावा देती है और साथ ही निर्धारित मात्रा सीमा के अधीन, निर्दिष्ट धागों  पर 15% मूल्य सब्सिडी भी प्रदान करती है।

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एनएचडीपी और आरएमएसएस का कार्यान्वयन 2026-27 में भी जारी रहेगा, जिसके लिए क्रमशः 205 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है।

 

III. हथकरघा और पारंपरिक शिल्पकला के लिए जीएसटी में छूट

सितंबर 2025 में 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में अनुशंसित अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों में हथकरघा क्षेत्र को समर्थन देने वाले उपाय शामिल थे।

  • जीएसटी युक्तिकरण के अंतर्गत, 36 हस्तशिल्प वस्तुओं पर कर की दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई।
  • सूती हथकरघा गलीचों और हाथ से बुने हुए कालीनों को भी 5% जीएसटी दर के दायरे में लाया गया।
  • घरेलू और औद्योगिक सिलाई मशीनों पर ब्याज दर भी 12% से घटाकर 5% कर दी गई, जिससे सिलाई इकाइयों की लागत कम हुई और घरेलू विनिर्माण को समर्थन मिला।

 

IV. केंद्रीय बजट 2026-27: भारत के हथकरघा उद्योग के लिए नई नीतिगत पहल

केंद्रीय बजट 2026-27 में कई नए उपायों के माध्यम से वस्त्र उद्योग पर विशेष जोर दिया गया है:

  • राष्ट्रीय फाइबर योजना का उद्देश्य वस्त्र उद्योग के कच्चे माल के आधार को मजबूत करना है। यह प्राकृतिक, मानव निर्मित और आधुनिक फाइबर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है।
  • वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना के अंतर्गत पारंपरिक क्लस्टरों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। यह योजना मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण और प्रमाणन केंद्रों के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करती है।
  • राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और सुदृढ़ करेगा।इससे दोनों क्षेत्रों को लक्षित समर्थन सुनिश्चित होगा।
  • महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करेगी, इसके साथ ही यह बुनकरों, ग्राम उद्योगों, ग्रामीण युवाओं और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल को लाभ पहुंचाएगी। यह वैश्विक बाजार संबंधों, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण, कौशल विकास और उत्पादन प्रक्रियाओं एवं गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।

 

 

ओडीओपी पहल जिले के अनूठे उत्पादों, संतुलित क्षेत्रीय विकास और स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के लिए व्यापक बाजार पहुंच को बढ़ावा देती है।

और पढ़ें: एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी):  स्थानीय गलियों से वैश्विक दुकानों तक का सफर

 

डिजाइन और नवाचार के माध्यम से हथकरघा को नया रूप देना

भारत की हथकरघा परंपराएं क्षेत्रीय रेशों, तकनीकों, रूपांकनों और पीढ़ियों से चली आ रही बुनाई की जानकारी में निहित हैं। इसके साथ ही, इन वस्त्रों को प्रदर्शित करने वाले मंचों का विस्तार भी हो रहा है। सरकारी संस्थानों और योजनाओं के समर्थन से, क्षेत्रीय बुनाई परंपराएं नए मंचों तक पहुंच रही हैं।

हाल के प्रदर्शनों से यह स्पष्ट होता है कि पारंपरिक वस्त्रों को समकालीन डिजाइन और व्यापक सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से किस प्रकार प्रस्तुत किया जा रहा है।

डीसी हैंडलूम्स और एनआईएफटी ने अप्रैल 2026 में 61वें फेमिना मिस इंडिया में विश्व सूत्र का अनावरण किया। भुवनेश्वर में प्रस्तुत इस संग्रह में भारत भर के 30 हथकरघा बुनाई शैलियों को एक साथ लाया गया। प्रत्येक शैली को 30 देशों से प्रेरणा लेकर नया रूप दिया गया, जिसमें वस्त्रों को अंतरराष्ट्रीय शैली और प्रभावों के साथ संयोजित किया गया। इन संयोजनों ने भारतीय हथकरघा को वैश्विक डिजाइन परिदृश्य में स्थापित किया, इसके साथ ही इसकी प्रामाणिकता और क्षेत्रीय पहचान को भी बरकरार रखा।

भारत टेक्स 2025 में ब्रीदिंग थ्रेड्स ने हथकरघा को समकालीन फैशन में शामिल किया। इसने पांच राज्यों में बुने गए कपड़ों का उपयोग करके 30 लुक प्रस्तुत किए। ये कपड़े पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान से आए थे। चंदेरी, महेश्वर, जामदानी, खुन, बनारसी, कोटा डोरिया और मुर्शिदाबाद की बुनाई को बनावट और डोरी के माध्यम से समकालीन अभिव्यक्ति मिली।

गोवा में आयोजित IFFI 2025 में, DC हैंडलूम्स ने "हैंडलूम सारीज इन मोशन: 70MM ऑन रनवे" नामक प्रदर्शनी के माध्यम से फैशन, संस्कृति और सिनेमा को एक साथ प्रस्तुत किया। इस शो में भारतीय सिनेमा की बदलती शैलियों को दर्शाया गया, जिसमें 1940 के दशक की सुरुचिपूर्ण साड़ियों से लेकर 2020 के दशक के प्रयोगात्मक सिल्हूट तक शामिल थी। 40 से अधिक साड़ियों ने तुसार, इकत पश्मीना, बनारसी, चंदेरी, वेंकटगिरी और कुथमपल्ली सहित क्षेत्रीय बुनाई परंपराओं का प्रतिनिधित्व किया। इनमें से कई को पुरस्कार विजेता कलाकारों द्वारा पिछवाल, पट्टचित्र, वॉर्ली, कलमकारी, मधुबनी, गोंड और भील कला का उपयोग करके हाथ से चित्रित किया गया था।

 

इन प्रदर्शनों के साथ-साथ, सहयोगी मंच हथकरघा क्षेत्र में प्रयोग के लिए नए स्थान बना रहे हैं।

 

डिज़ाइन के अर्थ का विस्तार

  • 'वीव द फ्यूचर 4.0: अपसाइक्लिंग एडिशन' का आयोजन 12 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के दिल्ली हाट में हुआ। इस प्रदर्शनी में चक्रीय डिजाइन के क्षेत्र में काम करने वाले 100 से अधिक ब्रांड, कारीगर, पुनर्चक्रणकर्ता और नवप्रवर्तक एक साथ आए। इसने अपसाइक्लिंग, मरम्मत, टिकाऊ उत्पादन और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा दिया।
  • हैंडलूम हैकाथॉन 2026: वस्त्र मंत्रालय ने राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस 2026 के अवसर पर 'बुनाई नवाचार' नामक हैंडलूम हैकाथॉन 2026 का शुभारंभ किया है। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों, बुनकरों, कारीगरों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और पेशेवरों को इस क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके विषय डिजाइन, स्थिरता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, बाजार पहुंच, ब्रांडिंग, उत्पादकता और उद्यमिता को समाहित करते हैं।

 

इन आयोजनों से भारतीय हथकरघा की बढ़ती लोकप्रियता का पता चलता है। फैशन शो, सौंदर्य प्रतियोगिताओं, सिनेमा, वस्त्र प्रदर्शनियों और सहयोगात्मक डिजाइन मंचों के माध्यम से, क्षेत्रीय बुनाई व्यापक सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है। यह बढ़ती लोकप्रियता एक व्यापक कहानी का हिस्सा है जिसमें बाजार तक पहुंच और भारत की हथकरघा निर्यात उपस्थिति भी शामिल है।

 

बाजार पहुंच और खरीदार विश्वास को मजबूत करना

आकर्षक डिजाइन, छोटे पैमाने पर उत्पादन और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रियाओं ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हथकरघा उत्पादों की मजबूत मांग पैदा की है।

भारत का हैंडियॉम निर्यात 2025-26 में लगभग ₹1,330.96 करोड़ रहा। इस अवधि के दौरान निर्यात के प्रमुख गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन थे।

जैसे-जैसे हस्तशिल्प उत्पाद व्यापक और विविध बाजारों तक पहुँच रहे हैं, उनकी प्रामाणिकता, गुणवत्ता और उत्पत्ति स्थापित करना और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सरकार समर्थित चिह्न, ब्रांडिंग प्रणाली, जीएल पंजीकरण और कानूनी सुरक्षा उपाय वास्तविक हस्तशिल्प उत्पादों को अलग करने और मान्यता प्राप्त बुनाई परंपराओं की रक्षा करने में सहायक हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बाजार तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं।

  • सरकारी खरीदारों को आपूर्ति करने के लिए लगभग 1.50 लाख बुनकर और हथकरघा संस्थाएं GeM से जुड़ गई हैं।
  • इंडियाहैंडमेड प्लेटफॉर्म सत्यापित बुनकरों और उत्पादक समूहों को जीएल टैग वाले उत्पादों सहित प्रामाणिक उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं को बेचने में सक्षम बनाता है। इस प्लेटफॉर्म ने 2023-24 से जून 2026 के बीच 4,186 बुनकरों और कारीगरों को अपने साथ जोड़ा है।

 

हैंडलूम मार्क: यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद हाथ से बुना हुआ है

2006 में शुरू की गई हथकरघा चिह्न योजना हथकरघा उत्पादों को सामूहिक पहचान प्रदान करती है। यह हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा देती है और खरीदारों को आश्वस्त करती है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं वह वास्तव में हस्तनिर्मित है, इसके साथ ही यह उत्पाद या उसके निर्माता की पहचान को आसान बनाने में भी मदद करती है।

  • 30 जून 2026 तक, 29,402 हथकरघा चिह्न पंजीकरण जारी किए जा चुके हैं और
  • कुल 815 खुदरा दुकानों पर इस लेबल वाले उत्पाद बेचे जा रहे थे।

 

भारत का हथकरघा ब्रांड: गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा देना

इंडिया हैंडलूम ब्रांड को पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, 7 अगस्त 2015 को लॉन्च किया गया था। यह उच्च गुणवत्ता, प्रामाणिक पारंपरिक डिज़ाइन, दोषरहित और पर्यावरण पर शून्य प्रभाव वाले विशिष्ट हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देता है। इस प्रमाणन में प्राकृतिक रेशों से बने उत्पाद शामिल हैं जिनमें पक्के रंग, त्वचा के अनुकूल रंग और सामाजिक अनुपालन की गारंटी होती है।

  • जून 2026 तक, 184 श्रेणियों में 2,305 पंजीकरण जारी किए जा चुके थे।

 

जीआई टैग किसी विशिष्ट क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले उन सामानों की पहचान करता है जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताएं उस भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती हैं।

 

जीआई टैग: क्षेत्रीय बुनाई की पहचान की रक्षा करना

जीआई अधिनियम, 1999 पंजीकृत भौगोलिक क्षेत्रों की अनधिकृत इस्तेमाल से रक्षा करता है। पंजीकृत उपयोगकर्ता अवैध निर्माण या विपणन के खिलाफ पुलिस से संपर्क कर सकते हैं, जबकि राज्य के हथकरघा और वस्त्र विभागों को सुरक्षा को मजबूत करने की सलाह दी गई है।

  • अगस्त 2026 में दी गई रिपोर्ट के अनुसार, पंजीकरण में 106 हथकरघा उत्पाद, छह उत्पाद लोगो और 227 हस्तशिल्प उत्पाद शामिल थे।

 

आरक्षित हथकरघा उत्पादों के लिए कानूनी संरक्षण

हथकरघा अधिनियम, 1985 बुनकरों और भारत की सांस्कृतिक विरासत को बिजली के करघों और मिलों द्वारा अतिक्रमण से बचाता है। यह 11 निर्दिष्ट वस्त्रों को हथकरघा उत्पादन के लिए आरक्षित करता है।

सरकारी एजेंसियां पावरलूम इकाइयों का निरीक्षण करती हैं ताकि उन वस्तुओं का उत्पादन रोका जा सके जो केवल हथकरघों के लिए आरक्षित हैं।

 

भविष्य हस्तनिर्मित है

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026  परंपरा की निरंतरता से परे जाकर भविष्य की संभावनाओं की ओर देखने का अवसर प्रदान करता है।

भारतीय हथकरघा अपने भीतर स्थान, समुदाय और कौशल की स्मृति संजोए रखता है, फिर भी इसकी कहानी हर पीढ़ी के साथ नए रूप धारण करती रहती है। समकालीन जीवन में इसकी बढ़ती उपस्थिति दर्शाती है कि विरासत अपने मूल स्वरूप को खोए बिना कैसे प्रासंगिक बनी रह सकती है।

जैसे-जैसे दुनिया भारत की बुनाई के माध्यम से इसे और अधिक जान रही है, हथकरघा पारंपरिक ज्ञान को नई आकांक्षाओं से जोड़ना जारी रखे हुए है। यह बुनकर के हाथों से क्षेत्रीय पहचान को व्यापक दुनिया तक पहुंचाता है।

सन्दर्भ:

वस्त्र मंत्रालय:

https://handlooms.nic.in/assets/img/Statistics/3736.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2153746&reg=48&lang=2

https://sansad.in/getFile/annex/265/AS135_suGmAI.pdf?source=pqars

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2148300&reg=48&lang=2

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU4300_zg5b8v.pdf?source=pqals

https://handlooms.nic.in/assets/img/Statistics/Background_note_on_handloom_sector.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2146379&lang=2&reg=48

https://www.texmin.gov.in/static/uploads/2026/05/5c48e80d2180ca3194b9e9b01340696d.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2290320&reg=48&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286966&lang=1&reg=1

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU5220_ml9Xxl.pdf?source=pqals

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2253525&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2103763&reg=48&lang=2

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https://handlooms.nic.in/assets/img/Final%20Revised%20%20Guidelines%20NHDP%2012.04.2023.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2163905&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1812498&reg=48&lang=2

वित्त मंत्रालय :

https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe98.pdf

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय:

https://ipindia.gov.in/gi-introduction

सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय:

https://www.coek.in/events

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय:

https://www.psa.gov.in/livelihood/10117

हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (HEPC):

https://www.hepcindia.com/img/HS%20Code%20Wise%20Handloom%20Data%20from%202009-10%20to%202025-26.pdf

https://www.hepcindia.com/top_20_countries

PIB Archives:

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=154978&reg=48&lang=2

Others:

https://www.esquireindia.co.in/style/just-landed/fdci-khadi-samant-chauhan-shows-at-moscow-fashion-week

 

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