जनजातीय कार्य मंत्रालय
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए योजनाएं
प्रविष्टि तिथि:
06 AUG 2026 12:37PM by PIB Delhi
जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले सहित, देशभर में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है:
- अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति: यह योजना कक्षा IX-X में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लागू है। माता-पिता की आय सभी स्रोतों को मिलाकर 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। स्कूली छात्रों को 225 रुपये प्रति माह और छात्रावास में रहने वालों को 525 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति वर्ष में 10 महीने की अवधि के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के माध्यम से संवितरित की जाती है। पूर्वोत्तर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू और कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्र जहाँ यह अनुपात 90:10 है, को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। विधायिका रहित संघ राज्यक्षेत्रों के लिए साझाकरण पद्धति 100 प्रतिशत केंद्रीय हिस्सा है।
- अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति: इस योजना का उद्देश्य मैट्रिकोत्तर या माध्यमिकोत्तर स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। माता-पिता की आय सभी स्रोतों को मिलाकर 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले अनिवार्य शुल्क की प्रतिपूर्ति संबंधित राज्य शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित सीमा के अधीन की जाती है और 230 रुपये से 1200 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति राशि का भुगतान किया जाता है, जो अध्ययन के पाठ्यक्रम पर निर्भर है। योजना राज्य सरकारों और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों द्वारा कार्यान्वित की जाती है। पूर्वोत्तर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू तथा कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्र जहां यह अनुपात 90:10 है को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। बिना विधायिका वाले संघ राज्यक्षेत्रों के लिए साझाकरण पद्धति (पैटर्न) 100 प्रतिशत केंद्रीय हिस्सा है।
- अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति एवं छात्रवृत्ति: यह जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इस योजना के अंतर्गत दो उप-योजनाएं हैं, अर्थात्:
(क)अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (पूर्व में शीर्ष श्रेणी छात्रवृत्ति योजना के नाम से विदित): इस योजना के अंतर्गत, प्रबंधन, चिकित्सा, अभियांत्रिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, विधि (कानून) आदि जैसे पेशेवर (व्यावसायिक) क्षेत्रों में चयनित उत्कृष्ट श्रेणी के सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों में स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने हेतु छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। मंत्रालय द्वारा अधिसूचित 265 संस्थानों में अध्ययनरत तथा जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 6.0 लाख रुपये से अधिक न हो, ऐसे सभी अनुसूचित जनजाति के छात्र छात्रवृत्ति प्राप्त करने के पात्र हैं। यह योजना वर्ष 2007-08 से प्रारंभ की गई है।
(ख) अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (फेलोशिप) योजना: स्नातकोत्तर उपाधि (मास्टर डिग्री) पूर्ण करने के पश्चात भारत में पीएच.डी. करने वाले मेधावी अनुसूचित जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए यह जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। यह योजना वर्ष 2005-06 से प्रारंभ की गई है। प्रतिवर्ष पीएच.डी. हेतु नई अध्येतावृत्तियों की कुल संख्या 750 होगी। स्नातकोत्तर उपाधि में न्यूनतम 55% अंक वाले तथा 36 वर्ष की आयु तक के अनुसूचित जनजाति के छात्र इस योजना के अंतर्गत अध्येतावृत्ति हेतु आवेदन करने के पात्र हैं। अध्येतावृत्ति की राशि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की दरों के समकक्ष है।
- अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति: यह जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके अंतर्गत मेधावी अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों को विदेश में शीर्ष 1000 रैंक (नवीनतम क्यूएस विश्व रैंकिंग के अनुसार) वाले संस्थानों/विश्वविद्यालयों में उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने हेतु छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। यह योजना वर्ष 1954-55 से प्रारंभ की गई है। यह योजना विदेश में स्थित भारतीय दूतावासों/मिशनों, विदेश मंत्रालय के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। प्रति वर्ष बीस छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। जिन अनुसूचित जनजाति के छात्रों की परिवारिक आय 6.0 लाख रुपये से अधिक नहीं है, वे इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति हेतु आवेदन करने के पात्र हैं।
- धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 उपाय शामिल हैं और इसका उद्देश्य पाँच वर्षों में 63,843 गाँवों में बुनियादी ढांचे के अंतरों को संतृप्त करना, छात्रावासों, आंगनवाड़ी सुविधाओं और सचल चिकित्सा इकाईयों जैसी सामाजिक अवसंरचना प्रदान करना और 30 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक जनजातियों को लाभान्वित करते हुए आजीविका के अवसर प्रदान करने हेतु वन धन विकास केंद्रों की स्थापना करना है। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय 79,156 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा: 56,333 करोड़ रूपये और राज्य हिस्सा: 22,823 करोड़ रूपये) है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के अंतर्गत कवर किया गया है।
- प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन): सरकार ने 18 राज्यों और 1 संघ राज्यक्षेत्र में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य तीन वर्षों में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार सम्पर्क, गैर-विद्युतीकृत आवासों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन उद्देश्यों को छात्रावास और सचल चिकित्सा इकाइयां (एमएमयू) सहित, 9 मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 उपायों के माध्यम से पूरा करने की योजना है। पीएम जनमन का कुल बजटीय परिव्यय 24,104 करोड़ रुपये (केंद्र का हिस्सा: 15336 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा: 8768 करोड़ रुपए) है। अलीपुरद्वार जिले को पीएम जनमन के अंतर्गत भी कवर किया गया है।
- संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान के अंतर्गत, अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को बेहतर बनाने और जनजातीय लोगों के कल्याण हेतु अनुसूचित जनजाति आबादी वाले राज्यों को अनुदान जारी किए जाते हैं। यह एक क्षेत्र विशेष कार्यक्रम है और राज्यों को 100 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की गतिविधियों में अंतर को पाटने के लिए अनुसूचित जनजाति आबादी की महसूस की गई आवश्यकताओं के आधार पर राज्य सरकारों को निधियां जारी की जाती हैं। .
- अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान: अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान योजना के अंतर्गत, मंत्रालय आवासीय विद्यालय, गैर-आवासीय विद्यालय, छात्रावास, सचल औषधालय, दस या अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, आजीविका आदि को कवर करने वाली शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): यह योजना, दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं के समकक्ष गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। ये विद्यालय, जनजातीय छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु सुविधाओं सहित आधुनिक शैक्षणिक अवसंरचना उपलब्ध कराते हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय, अपने ही परिवेश में जनजातीय बालक एवं बालिका विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) की केंद्रीय क्षेत्र योजना कार्यान्वित कर रहा है; ईएमआरएस को नवोदय विद्यालयों के समकक्ष किया जाना है, जिसमें स्थानीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु विशेष सुविधाओं के साथ-साथ खेलकूद एवं कौशल विकास में प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
- प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): यह मिशन, लघु वनोपज तथा अन्य जनजातीय उत्पादों पर आधारित मूल्य श्रृंखलाओं पर विशेष बल देते हुए मूल्यसंवर्धन, उद्यमिता विकास, विपणन सहायता तथा जनजातीय उत्पादक संगठनों को सुदृढ़ बनाने के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों की सतत आजीविका को बढ़ावा देता है।
- वनधन विकास केंद्र (वीडीवीके): वनधन विकास केंद्र, लघु वनोपज संग्राहकों को मूल्य संवर्धन एवं आजीविका सहायता प्रदान करने हेतु, लघु वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत स्थापित किए गए हैं, जिनको ट्राइफेड के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
- जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार एवं कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई): यह योजना जनजातीय संस्कृति के अनुसंधान, प्रलेखन, क्षमता निर्माण, संरक्षण एवं संवर्धन, जागरूकता सृजन, सूचना प्रसार तथा साक्ष्य-आधारित नीति सहायता के लिए जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता प्रदान करती है।
- निगरानी, मूल्यांकन, सर्वेक्षण एवं सामाजिक आकलन (लेखा-परीक्षा) (मेस्सा): यह योजना, साक्ष्य-आधारित योजना, नीति निर्धारण तथा जनजातीय विकास पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने हेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित कार्यक्रमों की निगरानी, मूल्यांकन, प्रभाव आकलन, सर्वेक्षण तथा सामाजिक आकलन (लेखा-परीक्षा) में सहायता करती है।
- अनुसूचित जनजातियों हेतु उद्यम पूंजी निधि (वीसीएफ-एसटी): यह योजना, आय-सृजनकारी उद्यमों की स्थापना एवं विस्तार हेतु अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को रियायती उद्यम पूंजी सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है।
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी): जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत यह एक शीर्ष संगठन है, जिसकी स्थापना विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास हेतु की गई है और यह आजीविका सृजन के लिए विभिन्न योजनाओं को कार्यान्वित करता है। एनएसटीएफडीसी पात्र अनुसूचित जनजाति समुदायों को रियायती ऋण प्रदान करता है।
उपर्युक्त योजनाओं में से कुछ केन्द्र प्रायोजित हो सकती हैं और अन्य केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाएं हो सकती हैं।
(ख) शिक्षा, आजीविका, कौशल विकास एवं छात्रवृत्ति योजनाओं इत्यादि के अंतर्गत कवर किए गए लाभार्थियों का ब्यौरा निम्नानुसार है:
आज की तिथि तक, पश्चिम बंगाल राज्य सहित देशभर में 508 ईएमआरएस कार्यरत हैं। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (एनईएसटीएस), जो एक स्वायत्त संगठन है, की स्थापना राज्य ईएमआरएस सोसायटियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए ईएमआरएस योजना के प्रबंधन एवं कार्यान्वयन हेतु की गई है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल राज्य में 9 ईएमआरएस स्वीकृत किए हैं, तथा सभी 9 ईएमआरएस कार्यरत हैं। वर्तमान में अलीपुरद्वार जिले में कोई ईएमआरएस स्थित नहीं है; पश्चिम बंगाल में विद्यमान ईएमआरएस बांकुड़ा, बीरभूम, दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, झाड़ग्राम, कालिम्पोंग, पश्चिम बर्धमान एवं पुरुलिया (2 विद्यालय) जिलों में स्थित हैं। पश्चिम बंगाल में ईएमआरएस का जिला-वार ब्यौरा निम्नानुसार है:
|
क्र.सं.
|
जिला
|
ब्लॉक/तालुका
|
कुल नामांकन 2025-26
|
|
1
|
बांकुड़ा
|
खतरा
|
430
|
|
2
|
बीरभूम
|
बोलपुर श्रीनिकेतन
|
385
|
|
3
|
दक्षिण दिनाजपुर
|
बंसीहारी
|
441
|
|
4
|
जलपाईगुड़ी
|
नागराकाटा
|
479
|
|
5
|
झारग्राम
|
झारग्राम
|
464
|
|
6
|
कलिम्पोंग
|
कलिम्पोंग
|
125
|
|
7
|
पश्चिम बर्धमान
|
कांकसा
|
414
|
|
8
|
पुरुलिया
|
बंदवान
|
-
|
|
9
|
पुरुलिया
|
मनबाज़ार - II
|
414
|
पश्चिम बंगाल राज्य में, कुल 32 वीडीवीके स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 8,505 लाभार्थी (पीएमजेवीएम के अंतर्गत 8,227 तथा पीएम जनमन के अंतर्गत 278) कवर किए गए हैं। विशेष रूप से अलीपुरद्वार जिले में, 1,134 लाभार्थीयों को कवर करते हुए 7 (सात) वीडीवीके स्वीकृत किए गए हैं, तथा कुल स्वीकृत निधि 55.05 लाख रुपये है, जिसमें से 50.025 लाख रुपये राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए) को जारी किए जा चुके हैं।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले सहित देशभर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) विद्यार्थियों की माध्यमिक, उच्चतर एवं व्यावसायिक शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने हेतु पांच छात्रवृत्ति योजनाएं कार्यान्वित करता है। इनमें मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, उच्चतर शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी), उच्चतर शिक्षा हेतु राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (एनएफएसटी) एवं राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (एनओएस) शामिल हैं। विगत तीन वित्तीय वर्षों के दौरान, इन योजनाओं के अंतर्गत अलीपुरद्वार जिले से लाभार्थियों का ब्यौरा निम्नानुसार है:
|
छात्रवृत्ति योजना
|
2023-24
|
2024-25
|
2025-26
|
|
अजजा छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति
|
2,315
|
668
|
277
|
|
अजजा छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति
|
6,517
|
2,925
|
1,754
|
|
उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी)
|
13
|
18
|
19
|
|
उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (एनएफएसटी)
|
4
|
3
|
4
|
|
राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (एनओएस)
|
शून्य
|
शून्य
|
शून्य
|
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन/विभागों के माध्यम से पीएम जनमन के अंतर्गत कवर किए गए गांवों एवं बस्तियों में रहने वाली पीवीटीजी जनसंख्या को शामिल करने हेतु, पीवीटीजी जनसंख्या के आंकड़ों एवं अवसंरचनात्मक अंतरों (गैप्स) का आकलन करने के लिए, पीएम गतिशक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से बस्ती-स्तरीय डेटा (आंकड़ा) संग्रह करने का कार्य किया है। एकत्रित किए गए आंकड़ों के आधार पर, पश्चिम बंगाल राज्य में पीवीटीजी जनसंख्या का ब्यौरा निम्नानुसार सारणीबद्ध है:
|
राज्य का नाम
|
पीवीटीजी परिवार
|
पीवीटीजी जनसंख्या
|
|
पश्चिम बंगाल
|
19991
|
68720
|
अभियान के अंतर्गत कवर किए जाने वाले लाभार्थियों की वास्तविक संख्या, स्वीकृत मानदंडों के अनुसार संबंधित उपायों (हस्तक्षेपों) के विशिष्ट दिशा-निर्देशों की पात्रता मानदंडों (शर्तों) के अधीन है। 30.06.2026 तक, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत प्रदान किए गए लाभों का ब्यौरा मंत्रालय-वार निम्नानुसार है:
|
राज्य का नाम
|
पश्चिम बंगाल
|
|
ज़िले का नाम
|
अलीपुरद्वार
|
|
जल शक्ति मंत्रालय
|
स्वीकृत गाँव
|
1
|
|
संतृप्त गाँव
|
0
|
|
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
|
स्वीकृत और संचालित एमएमयू
|
2
|
|
विद्युत मंत्रालय
|
स्वीकृत आवास
|
11
|
|
विद्युतीकृत आवास
|
11
|
|
जनजातीय कार्य मंत्रालय (वीडीवीके)
|
स्वीकृत
|
4
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
सरकार, अलीपुरद्वार जिले में अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु, डीएजेजीयूए एवं पीएम जनमन सहित विभिन्न निरंतर जारी केंद्रीय क्षेत्र एवं केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत विकासात्मक उपाय (हस्तक्षेप) आवश्यकता-आधारित एवं अभिसरण दृष्टिकोण पर कार्यान्वित किए जाते हैं। तदनुसार, इन पहलों के अंतर्गत जिला निरंतर लाभ प्राप्त कर रहा है।
*****
पीके/केसी/एसएस/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2295447)
आगंतुक पटल : 58