पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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संसद प्रश्न: एआई डेटा सेंटरों में जल का प्रभावी उपयोग

प्रविष्टि तिथि: 06 AUG 2026 6:59PM by PIB Delhi

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) डेटा सेंटरों के लिए वास्तव में पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 (संशोधित) के अंतर्गत पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, एआई डेटा सेंटर जो पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 की अनुसूची के मद 8(क) के अंतर्गत "भवन और निर्माण परियोजना" (अर्थात 20,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र) या मद 8(ख) के अंतर्गत "आवासीय और क्षेत्र विकास परियोजना" (अर्थात 50 हेक्टेयर और/या 1,50,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र) के हिस्से के रूप में प्रस्तावित हैं, उनके लिए पूर्व पर्यावरण मंजूरी आवश्यक है। ऐसी भवन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) द्वारा प्रदान की जाती है।

पर्यावरण मंजूरी प्रदान करने हेतु ऐसी भवन परियोजनाओं के मूल्यांकन के दौरान, स्वच्छ जल की उपलब्धता, विशेष रूप से जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में, जल संतुलन रिपोर्ट, अपशिष्ट जल का सृजन, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग जैसे विभिन्न पहलुओं पर विधिवत विचार किया जाता है और उचित पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय निर्धारित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, एआई डेटा सेंटरों के निर्माण और परिसंचालन के दौरान जल और अपशिष्ट जल के उपयोग और निर्वहन को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत विनियमित किया जाता है। जल उपयोग और अपशिष्ट जल निर्वहन के लिए निर्धारित मानकों सहित इन अधिनियमों के प्रावधानों का अनुपालन, संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) या प्रदूषण नियंत्रण समिति (पीसीसी) द्वारा, जैसा भी लागू हो, निगरानी की जाती है।

इसके अतिरिक्त, अवसंरचना/वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए भूजल निष्कर्षण जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अधिसूचना एसओ 3289(ई) दिनांक 24 सितंबर, 2020 के माध्यम से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार विनियमित किया जाता है, जिसे अधिसूचना दिनांक 29 मार्च, 2023 द्वारा संशोधित किया गया है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने जिला शीतलन दिशानिर्देश, 2023 जारी किए हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा, जहां भी संभव हो, शीतलन टावरों में उपचारित जल का उपयोग करने की सिफारिश की गई है, ताकि स्वच्छ जल के संसाधनों पर निर्भरता कम हो और टिकाऊ जल प्रबंधन को बढ़ावा मिले। दिशानिर्देशों में ऊर्जा-कुशल शीतलन प्रौद्योगिकियों को अपनाने, शीतलन प्रणाली के प्रदर्शन को अनुकूलित करने, वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग करने और जल संरक्षण उपायों को लागू करने पर भी जोर दिया गया है। ये उपाय विशेष रूप से डेटा सेंटरों सहित बड़े शीतलन-गहन संयंत्रों के लिए प्रासंगिक हैं और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, जल की खपत कम करने और शीतलन अवसंरचना के टिकाऊ संचालन में सहायक हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, डिजिटल और एआई बुनियादी ढांचे में ऊर्जा दक्षता, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय लचीलेपन की जांच करने के लिए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के 'लचीलापन, नवाचार और दक्षता' कार्य समूह का गठन किया गया है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एसके
 


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