आयुष
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आयुष दवाओं का निर्माण

प्रविष्टि तिथि: 07 AUG 2026 6:03PM by PIB Delhi

आयुष मंत्रालय 2018 से आयुष दवाओं के लिए 'फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम' (दवाओं की सुरक्षा की निगरानी का कार्यक्रम) चला रहा है। इसका मकसद निगरानी, ​​रिपोर्टिंग और दवाओं से होने वाले संभावित बुरे असर (एडवर्स ड्रग रिएक्शन) का आकलन करके आयुष दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके सुरक्षित व सही इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम आयुष दवाओं से जुड़े गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर भी नज़र रखता है ताकि झूठे और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को रोका जा सके और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके। 2021 में इस कार्यक्रम को 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' (AOGUSY) के तहत शामिल किया गया था। पिछले तीन वर्षों में आयुष दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम के तहत गुमराह करने वाले विज्ञापनों के बारे में मंत्रालय को मिली शिकायतों की कुल संख्या 'एनेक्शर-1' (Annexure-1) में दी गई है।

इसके अलावा, आयुष मंत्रालय ने 2025 में एक IT-आधारित ऑनलाइन पोर्टल "आयुष सुरक्षा" शुरू किया है, ताकि रिपोर्ट किए गए गुमराह करने वाले विज्ञापनों (MLAs)/आपत्तिजनक विज्ञापनों (OAs) और दवाओं से होने वाले बुरे असर (ADRs) को ट्रैक किया जा सके। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, "आयुष सुरक्षा" पोर्टल की शुरुआत के बाद से रिपोर्ट किए गए गुमराह करने वाले विज्ञापनों और उन पर की गई कार्रवाई का विवरण 'एनेक्शर-2' (Annexure-2) में दिया गया है।

'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइज़मेंट्स) एक्ट, 1954' की धारा 8 के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस कानून और इसके नियमों को लागू करने के लिए अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। इसमें आयुष दवाओं सहित दवाओं और औषधीय पदार्थों के गुमराह करने वाले विज्ञापनों और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर रोक लगाने के प्रावधान शामिल हैं, जो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखाई देते हैं। आयुष मंत्रालय ने इस कानून के प्रावधानों के अनुसार इसे लागू करने और नियंत्रित करने के लिए राज्यों के संबंधित अधिकारियों (SLAs) को सलाह और निर्देश जारी किए हैं।

 

इसके अलावा, गुमराह करने वाले या आपत्तिजनक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए रेगुलेटरी/सलाहकार ढांचे को मजबूत करने के मकसद से मंत्रालय ने ये कदम उठाए हैं-

  1. 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' (AOGUSY) के तहत आयुष दवाओं के लिए 'फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम' एक तीन-स्तरीय नेटवर्क के जरिए काम कर रहा है। इसमें देश भर में स्थापित एक नेशनल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (NPvCC), पांच इंटरमीडियरी फार्माकोविजिलेंस सेंटर (IPvCs) और 97 पेरिफेरल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (PPvCs) शामिल हैं। आयुष दवाओं और उनसे जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए, फार्माकोविजिलेंस सेंटर्स ने आयुष प्रोफेशनल्स और आम जनता के लिए कुल 4,165 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनसे 3,71,477 लोगों को फायदा हुआ है।
  2. आयुष मंत्रालय ने गुमराह करने वाले विज्ञापनों (MLAs)/आपत्तिजनक विज्ञापनों (OAs) और दवाओं के बुरे असर (ADRs) की रिपोर्ट को ट्रैक करने के लिए 2025 में "आयुष सुरक्षा" नाम का एक IT-बेस्ड ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है।
  3. आयुष मंत्रालय ने 08.10.2024 और 24.08.2025 को एक पब्लिक नोटिस जारी किया। इसमें आम जनता को आयुष दवाओं के बारे में सही जानकारी दी गई और उनसे गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करने की अपील की गई। यह नोटिस भारत भर के 100 प्रमुख अखबारों में हिंदी, अंग्रेजी और कई क्षेत्रीय भाषाओं में छापा गया था।
  4. इसके अलावा, केंद्र सरकार ने 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइज़मेंट्स) एक्ट, 1954', 'नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन एक्ट, 2020' और 'नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी एक्ट, 2020' के तहत, 'ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद, नई दिल्ली' के 'नेशनल फार्माकोविजिलेंस कोऑर्डिनेशन सेंटर' के कोऑर्डिनेटर को नोडल ऑफिसर के तौर पर नोटिफाई किया है। यह नोडल ऑफिसर उन इंटरमीडियरीज़ (मध्यस्थों) को नोटिस जारी करेगा जिनके कंट्रोल वाले कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करके कोई गैर-कानूनी काम किया जा रहा है (जैसे कि गलत जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक का इस्तेमाल)।
  5. होम्योपैथी के बारे में गलत, गुमराह करने वाली या बिना सबूत वाली जानकारी के प्रसार को रोकने के मकसद से, 'नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी' के 'बोर्ड ऑफ़ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन फॉर होम्योपैथी (BERH)' ने सर्कुलर और एडवाइज़री जारी की हैं।

अनुलग्नक-1

क्रमांक

वर्ष

भ्रामक विज्ञापनों की संख्या

1.

2023

7771

2.

2024

10161

3.

2025

16129

 

Total

34061

अनुलग्नक-2

 

S. No.

राज्य/कें.शासित

आयुष सुरक्षा पोर्टल से प्रप्त भ्रामक विज्ञापन

कार्रवाई

1

मध्य प्रदेश

1115

661

2

ओडिशा

447

447

3

केरल

152

152

4

त्रिपुरा

70

68

5

दिल्ली

459

459

6

तमिलनाडु

3,079

3,079

7

उत्तराखंड

300

300

8

उत्तर प्रदेश

44

44

9

मेघालय

Nil

-

10

गोवा

Nil

-

11

हरियाणा

Nil

-

12

मणिपुर

Nil

-

 

यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

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पीके/केसी/एनएम


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