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आयुष
आयुष को बढ़ावा देने के लिए पहल
प्रविष्टि तिथि:
07 AUG 2026 5:57PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय ने आयुष दवाओं के उत्पादन, गुणवत्ता, रिसर्च, मार्केटिंग और वैश्विक स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। मुख्य पहलों में शामिल हैं:
- आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (AOGUSY): यह आयुष दवा क्षेत्र में गुणवत्ता आश्वासन, मानकीकरण, अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (GMP), परीक्षण बुनियादी ढांचे, फार्माकोपियल मानकों और क्षमता निर्माण में सहायता करती है।
- आयुर्ज्ञान (AYURGYAN) योजना: यह आयुष प्रणालियों में सबूत-आधारित रिसर्च, इनोवेशन, क्लिनिकल अध्ययन और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देती है।
- भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H): आयुष दवाओं के लिए फार्माकोपियल मानकों, फॉर्म्युलरी और गुणवत्ता मानकों का विकास और प्रकाशन।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना (IC योजना): यह आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय आयुष दवा निर्माताओं/आयुष सेवा प्रदाताओं का समर्थन करती है; आयुष चिकित्सा प्रणालियों के अंतर्राष्ट्रीय प्रचार, विकास और मान्यता को सुविधाजनक बनाती है; अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हितधारकों के बीच बातचीत और आयुष के बाजार विकास को बढ़ावा देती है; विदेशों में आयुष एकेडमिक चेयर की स्थापना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणालियों के बारे में जागरूकता और रुचि को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं/संगोष्ठियों के आयोजन के माध्यम से शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा देती है।
- आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (Ayushexcil): यह अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, सेमिनारों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और निर्माताओं व सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण के माध्यम से निर्यातकों का समर्थन करके आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को सुविधाजनक बनाती है।
आयुष मंत्रालय एक केंद्रीय योजना, 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' (AOGUSY) लागू कर रहा है। इसका मकसद आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को क्रमशः WHO गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (WHO-GMP) और नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) जैसे उच्च मानक हासिल करने में मदद करना है। इस योजना के मुख्य हिस्से इस प्रकार हैं: -
- उच्च मानक हासिल करने के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत और अपग्रेड करना।
- आयुष दवाओं की फार्माकोविजिलेंस (सुरक्षा निगरानी), जिसमें भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी भी शामिल है।
- आयुष दवाओं के लिए तकनीकी मानव संसाधन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों सहित केंद्रीय और राज्य नियामक ढांचे को मजबूत करना।
- ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS), क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) और अन्य संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों व औद्योगिक R&D केंद्रों के सहयोग से आयुष उत्पादों और सामग्रियों के लिए मानक विकसित करने और एक्रेडिटेशन/सर्टिफिकेशन में सहायता।
पिछले तीन वर्षों के दौरान MSME सहित आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को दी गई वित्तीय सहायता का विवरण (कर्नाटक सहित राज्य-वार) एनेक्शर-I में दिया गया है।
आयुष दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण, फार्माकोविजिलेंस और निर्यात को मजबूत करने के लिए मंत्रालय ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं-
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 में आयुष दवाओं के लिए खास नियम दिए गए हैं। मैन्युफैक्चरर्स के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और दवाओं के लाइसेंस के लिए तय ज़रूरतों को मानना ज़रूरी है। इनमें सुरक्षा और असर का सबूत देना, आयुर्वेदिक, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल T और शेड्यूल M-I के अनुसार 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज' (GMP) का पालन करना और संबंधित फार्माकोपिया में बताई गई दवाओं की क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को मानना शामिल है। आयुष दवाओं की पहचान, शुद्धता, क्वालिटी और क्षमता से जुड़े टेस्ट करने के लिए, आयुष मंत्रालय ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 160A से 160J के तहत ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज़ को मंज़ूरी देता है। अभी तक, ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियमों के अनुसार ऐसे टेस्ट करने के लिए मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 118 प्राइवेट ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज़ को मंज़ूरी दी है।
- ड्रग इंस्पेक्टर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों या रिटेल दुकानों से नियमित रूप से दवा के सैंपल इकट्ठा करते हैं और उन्हें क्वालिटी की जांच के लिए ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के तहत ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी में भेजते हैं। अगर कोई सैंपल 'स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं' पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की जाती है, जैसे कि बाज़ार में उन दवाओं की बिक्री रोकना और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई करना। संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा लिए गए कानूनी सैंपल की जांच के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 34 ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी मौजूद हैं।
- आयुष मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था, 'फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी' (PCIM&H), आयुष दवाओं के लिए फार्माकोपिया से जुड़े स्टैंडर्ड और फॉर्मुलरी स्पेसिफिकेशन तैयार करती है। ये स्टैंडर्ड आयुष दवाओं की पहचान, शुद्धता और क्षमता तय करने के लिए आधिकारिक गाइड का काम करते हैं। 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' और इसके तहत बने नियमों के अनुसार, इन स्टैंडर्ड का पालन करना ज़रूरी है। PCIM&H आयुष दवाओं के लिए 'अपीलेट ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी' के तौर पर भी काम करती है। साथ ही, यह आयुष दवाओं की क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम को मज़बूत करने के लिए ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी, ड्रग एनालिस्ट और दूसरे संबंधित लोगों के लिए स्टैंडर्डाइज़ेशन, क्वालिटी कंट्रोल और टेस्टिंग के तरीकों पर रेगुलर कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम भी चलाती है।
- AOGUSY स्कीम के तहत आयुष दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम देश भर में फैले तीन-स्तरीय नेटवर्क के ज़रिए काम करता है। इस नेटवर्क में 1 नेशनल फार्माकोविजिलेंस कोऑर्डिनेशन सेंटर (NPvCC), 5 इंटरमीडियरी फार्माकोविजिलेंस सेंटर (IPvCs) और 97 पेरिफेरल फार्माकोविजिलेंस सेंटर (PPvCs) शामिल हैं। इन सेंटर्स की ज़िम्मेदारी है कि वे दवाओं से होने वाले संभावित बुरे असर (adverse drug reactions) पर नज़र रखें और गुमराह करने वाले विज्ञापनों की रिपोर्ट संबंधित राज्य रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ को दें, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ़ उचित कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, इस प्रोग्राम के ज़रिए देश भर के अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को दवाओं की क्वालिटी, डोज़ (posology) और दवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों के बारे में जागरूक किया जाता है। आयुष दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस सिस्टम को मज़बूत करने के मकसद से, आयुष मंत्रालय ने 30 मई 2025 को "आयुष सुरक्षा" नाम का एक IT-इनेबल्ड ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। यह पोर्टल MLAs/OAs की जानकारी इकट्ठा करने और आयुष दवाओं से जुड़े संभावित बुरे असर (ADRs) की रिपोर्ट करने में मदद करता है।
- इसके अलावा, आयुष मंत्रालय ने आयुष दवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयुष उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सर्टिफ़िकेशन को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित पहल की हैं।
- आयुष दवाओं के लिए WHO का फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट सर्टिफ़िकेट (WHO-CoPP), सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन (CDSCO) द्वारा जारी किया जाता है। यह सर्टिफ़िकेट तब दिया जाता है जब आयुष वर्टिकल में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और CDSCO के ड्रग इंस्पेक्टर मिलकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का संयुक्त निरीक्षण करते हैं और यह देखते हैं कि वे हर्बल दवाओं के लिए WHO की टेक्निकल रिपोर्ट सीरीज़ (TRS) गाइडलाइंस का पालन कर रही हैं या नहीं।
- आयुष मंत्रालय ने आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AYUSHEXCIL) के ज़रिए आयुष क्वालिटी मार्क (AQM) पहल शुरू की है। इस फ़्रेमवर्क के तहत, सक्षम सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी वैध क्वालिटी सर्टिफ़िकेट और कानूनी मंज़ूरी (जैसे WHO-GMP, आयुष प्रीमियम मार्क और अन्य मान्यता प्राप्त सर्टिफ़िकेट, जो भी लागू हों) की जांच और पुष्टि के बाद आयुष क्वालिटी मार्क दिया जाता है।
आयुष मंत्रालय ने देश भर में सर्टिफाइड आयुष दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए ये कदम उठाए हैं:
- 'नेशनल आयुष मिशन' नाम की केंद्र-प्रायोजित योजना के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को 'आयुष्मान आरोग्य मंदिरों' (AAMs) और सरकारी आयुष अस्पतालों/डिस्पेंसरी के लिए ज़रूरी आयुष दवाओं की सप्लाई में मदद दी जा रही है। यह मदद उनके 'स्टेट एनुअल एक्शन प्लान' (SAAP) में मिले प्रस्ताव के आधार पर दी जाती है।
2. आयुष मंत्रालय के सहयोग से और वाणिज्य मंत्रालय के 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड' (DGFT) द्वारा अधिसूचित 'आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल' (AYUSHEXCIL) ने आयुष दवाओं की डिजिटल घरेलू डिलीवरी को बढ़ावा देने और उनके अंतरराष्ट्रीय निर्यात को बढ़ाने के लिए क्रमशः 28 जनवरी, 2026 को क्विक-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म 'ज़ेप्टो' (Zepto) और 25 मई, 2026 को 'स्पाइस बोर्ड ऑफ़ इंडिया' के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
3. सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियानों, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और आयुर्वेद दिवस मनाने, सोशल मीडिया अभियानों और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, मेलों और सम्मेलनों जैसे अन्य आउटरीच कार्यक्रमों के ज़रिए लोगों में जागरूकता लाने की पहल की जा रही है।
आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (AOGUSY) के तहत "आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को उच्च मानकों तक ले जाने के लिए उन्हें मजबूत और अपग्रेड करना" वाले हिस्से के अंतर्गत, पिछले तीन वर्षों में आयुष दवा क्षेत्र में काम करने वाले मैन्युफैक्चरर्स (जिनमें स्टार्ट-अप और MSME शामिल हैं) को दी गई वित्तीय सहायता का राज्य-वार (कर्नाटक सहित) विवरण नीचे दिया गया है:
अनुलग्नक-1
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क्रमांक
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वित्त वर्ष
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राज्य
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सरकारी/निजी/पीएसयू
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विवरण
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अवमुक्त धनराशि(रु. में)
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1
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2023-24
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मध्य प्रदेश
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निजी
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श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा. लिमिटेड, मध्य प्रदेश
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9,108,000
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2
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केरल
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निजी
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सीताराम आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड, त्रिशूर, केरल।
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5,000,000
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|
3
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केरल
|
निजी
|
पंकजकस्तूरी हर्बल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पूवाचल, केरल
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5,000,000
|
|
4
|
राजस्थान
|
निजी
|
बीजैन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, अलवर, राजस्थान
|
5,000,000
|
|
5
|
असम
|
पीएसयू
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असम आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स, गुवाहाटी, असम (PSU)
|
4,559,519
|
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6
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जम्मू-कश्मीर
|
सरकारी
|
सरकारी फ़ार्मेसी, जम्मू और कश्मीर
|
10,500,000
|
|
7
|
गुजरात
|
सरकारी
|
स्टेट फ़ार्मेसी, राजपीपला, गुजरात
|
4,420,248
|
|
8
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अरुणाचल प्रदेश
|
सरकारी
|
राज्य फार्मेसी, अरुणाचल प्रदेश
|
6,702,164
|
|
|
Total
|
105,153,187
|
|
9
|
2024-25
|
अरुणाचल प्रदेश
|
सरकारी
|
राज्य फार्मेसी, अरुणाचल प्रदेश
|
7,042,077
|
|
10
|
केरल
|
निजी
|
पंकजकस्तूरी हर्बल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पूवाचल, केरल
|
4,432,807
|
|
11
|
तमिलनाडु
|
सरकारी
|
राज्य सरकार ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशाला, तमिलनाडु
|
5,100,000
|
|
12
|
राजस्थान
|
निजी
|
बीजैन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, अलवर, राजस्थान
|
14,454,189
|
|
13
|
गुजरात
|
सरकारी
|
स्टेट फ़ार्मेसी, राजपीपला, गुजरात
|
20,000,000
|
|
14
|
तमिलनाडु
|
पीएसयू
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राज्य सरकार की फ़ार्मेसी, तमिलनाडु मेडिसिनल प्लांट फ़ार्म्स एंड हर्बल मेडिसिन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TAMPCOL), तमिलनाडु
|
4,500,000
|
|
15
|
अरुणाचल प्रदेश
|
सरकारी
|
राज्य फार्मेसी, अरुणाचल प्रदेश
|
3,108,000
|
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Total
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137,620,447
|
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16
|
2025-26
|
पंजाब
|
निजी
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श्री धन्वंतरि हर्बल्स प्रा. लिमिटेड
|
28,500,000
|
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17
|
केरल
|
निजी
|
सीताराम आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड, त्रिशूर, केरल।
|
25,000,000
|
|
18
|
अरुणाचल प्रदेश
|
सरकारी
|
राज्य फार्मेसी, अरुणाचल प्रदेश
|
3,594,164
|
|
19
|
केरल
|
पीएसयू
|
द फ़ार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन (IM) केरल लिमिटेड, कुट्टानेल्लूर पी.ओ. त्रिशूर
|
27,801,008
|
|
20
|
मध्य प्रदेश
|
सरकारी
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राज्य सरकार फार्मेसी, ग्वालियर
|
9,149,799
|
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कुल
|
167,459,733
|
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कुल योग
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410,233,367
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यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
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पीके/केसी/एनएम
(रिलीज़ आईडी: 2296445)
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